गंभीर संकट: वन्यजीवों के विचरण में बाधक है पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बना आलीशान रिसोर्ट
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि रिसोर्ट के चलते केन नदी तक प्यास बुझाने जाने वाले वन्यजीवों को खासी परेशानी होती है। छतरपुर के राजगढ़ गांव स्थित खसर ...और पढ़ें

वन्यजीवों के विचरण में बाधक है पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बना आलीशान रिसोर्ट
HighLights
वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी बी.श्रीनिवास कुमार ने नियम ताक पर रखकर बनवाया है रिसोर्ट
केन नदी तक प्यास बुझाने जाने वाले वन्यजीवों के लिए बना मुसीबत
जेएनएन, पन्ना। पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन में वरिष्ठ आइआरएस अधिकारी बी.श्रीनिवास कुमार द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से बनवाया गया रिसोर्ट वन्यजीवों के लिए मुसीबत बन गया है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि रिसोर्ट के चलते केन नदी तक प्यास बुझाने जाने वाले वन्यजीवों को खासी परेशानी होती है। छतरपुर के राजगढ़ गांव स्थित खसरा नंबर 1841 की करीब पांच एकड़ भूमि पर रिसोर्ट बनाया गया है।
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण आवागमन मार्ग है और यहां स्थायी निर्माण से उनके प्राकृतिक व्यवहार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों के लिए केन नदी प्रमुख जल स्रोतों में से एक है। गर्मी और अन्य मौसम में बाघ, तेंदुआ, भालू, चीतल, सांभर और अन्य वन्य जीव नियमित रूप से इस क्षेत्र में आते हैं।
ऐसे में कोर क्षेत्र में रिसोर्ट जैसी व्यावसायिक गतिविधियों से वाहन आवाजाही, मानव हस्तक्षेप और ध्वनि प्रदूषण बढ़ने की आशंका है। वहीं रिसोर्ट में आने वाले लोगों पर भी वन्य प्राणियों के हमले का खतरा हो सकता है।
वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले नरेंद्र बगड़िया और पुष्पेंद्रनाथ द्विवेदी का कहना है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और वन्यजीव संरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुरूप कोर क्षेत्र में किसी भी गतिविधि का मूल्यांकन वन्यजीवों पर उसके प्रभाव को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। यदि निर्माण से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन पर असर पड़ रहा है तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
जांच में मिले तथ्य
इस मामले में शिकायत के बाद जांच तो हो चुकी है लेकिन वन विभाग ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने इस मामले को लेकर कई बार शिकायतें दर्ज कराईं, जिसके बाद जांच हुई और रिपोर्ट में यह लिखा गया कि निर्माण वन भूमि पर किया गया है। इसके बावजूद कार्रवाई में सुस्ती समझ से परे है।