गिग वर्कर्स से मोबाइल डाटा और पैटरनिटी लीव तक... राघव चड्ढा ने राज्यसभा में उठाए थे ये 10 मुद्दे, सोशल पर खूब हुए वायरल
आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटा दिया है और उनके बोलने के समय पर भी रोक लगाने का आग्रह किया है। यह कदम पार्टी के भ ...और पढ़ें
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AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा डिप्टी लीडर पद से हटाया

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पार्टी ने राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटा दिया है। AAP ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर उन्हें पद से हटाने के लिए कहा था। इसके साथ ही पार्टी ने अपने पत्र में ये भी कहा है कि राघव चड्ढा को आप के कोटा से बोलने का समय भी न दिया जाए।
राघव साल 2012 से AAP के साथ लगातार काम कर रहे हैं। वे दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के चुनावी अभियान का अहम हिस्सा माने जाते हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट से राजनेता बने चड्ढा दिल्ली लोकपाल बिल और पार्टी के घोषणापत्र का मसौदा तैयार करने वाली समिति के सदस्य भी थे।
राघव राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की सबसे मुखर आवाजों में से एक रहे हैं। वह अक्सर शासन-प्रशासन से जुड़े रोजमर्रा के मुद्दों और उपभोक्ताओं से संबंधित उन मसलों को उठाते रहे हैं, जिनका सीधा असर मिडिल क्लास पर पड़ता है।
राज्यसभा में डिप्टी लीडर के तौर पर, चड्ढा ने संसद में 'मिडिल क्लास' से जुड़े मुद्दों को जोर-शोर से उठाया है। एयरपोर्ट पर खाने-पीने की आसमान छूती कीमतों से लेकर टेलिकॉम कंपनियों के 'रिचार्ज चक्र' तक, AAP सांसद ने उन सभी मुद्दों को उठाया है, जिनका सीधा असर नागरिकों की जेब पर पड़ता है। हाल के समय में राघव चड्ढा द्वारा उठाए गए वो सवाल जो आम आदमी से जुड़े रहे और उन्होंने सोशल मीडिया पर जमकर सुर्खियां बटोरी।
खबरें और भी

1. पैटरनिटी लीव पर कानून
AAP सांसद राघव चड्ढा ने संसद में मांग की कि पैटरनिटी लीव को कानूनी अधिकार के रूप में मान्यता दी जाए। उन्होंने कहा कि देखभाल साझी जिम्मेदारी है। पिताओं को करियर और बच्चे के जन्म के बाद पत्नी की देखभाल के बीच चुनाव नहीं करना चाहिए।
2. उड़ान देरी पर मुआवजा
चड्ढा ने संसद में पूछा कि एयरलाइंस उड़ान में देरी पर कोई मुआवजा क्यों नहीं देतीं जबकि वे सामान के एक अतिरिक्त किलो के लिए भारी शुल्क वसूलती हैं। उन्होंने निष्पक्ष नीति की मांग की कि अगर वजन ग्राम-ग्राम ट्रैक होता है तो देरी के हर घंटे के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।
3. शहरी भीड़-भाड़ कम करने का मिशन
सांसद ने संसद में 'राष्ट्रीय शहरी भीड़-भाड़ कम करने का मिशन' प्रस्तावित किया। उन्होंने बताया कि ट्रैफिक में हर साल 168 घंटे बर्बाद होते हैं। बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन, वैज्ञानिक पार्किंग और सुगम आवागमन की मांग की गई क्योंकि शहरों की सुगमता भारत की आर्थिक प्रगति पर निर्भर करती है।
4. छोटे निवेशकों को राहत पैकेज
चड्ढा ने पश्चिम एशिया संघर्ष से प्रभावित छोटे निवेशकों और SIP धारकों के लिए सुरक्षा कवच की मांग की। प्रस्ताव में STT छूट, पूंजीगत नुकसान को 15 साल तक आगे ले जाने की सुविधा और म्यूचुअल फंड में टैक्स-न्यूट्रल स्विचिंग शामिल है ताकि बाजार विश्वास बहाल हो सके।
5. फलों का जूस 'मीठा पानी'
AAP नेता ने बड़े फूड ब्रांड्स की गुमराह करने वाली लेबलिंग की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कंपनियां ताजे फलों की तस्वीरों के जरिए असल में मीठा पानी बेच रही हैं। ऐसे भ्रामक विज्ञापनों से डायबिटीज जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। सख्त नियमों की मांग की गई।
6. डेटा पैक पर सुविधा
AAP सांसद ने कहा कि बचा हुआ डेटा उपभोक्ता की निजी संपत्ति है। आधी रात को इसे जब्त करने की बजाय रोलओवर सिस्टम लागू होना चाहिए। उन्होंने डेटा को अगले रिचार्ज में इस्तेमाल करने और परिवार-मित्रों को ट्रांसफर करने की सुविधा की मांग की ताकि डिजिटल इंडिया में लोगों को पूरा मूल्य मिले।
7. कपल्स की टैक्स फाइलिंग
चड्ढा ने विवाहित जोड़ों को इनकम टैक्स रिटर्न संयुक्त रूप से फाइल करने की अनुमति देने का सुझाव दिया। इससे मध्यम वर्गीय परिवारों को काफी राहत मिलेगी। ‘मैरिज बोनस’ के जरिए कुल टैक्स बोझ कम होगा और जोड़ों को एक इकाई के रूप में टैक्स देना आसान होगा।
8. न्यूनतम बैलेंस पर पेनल्टी खत्म हो
AAP सांसद ने न्यूनतम बैलेंस न रखने पर लगाए गए जुर्माने को 'गरीबी पर जुर्माना' बताया। उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल में बैंक 19,000 करोड़ रुपये वसूल चुके हैं। किसानों और पेंशनभोगियों को इस अनुचित दंड से मुक्ति दिलाने की मांग की गई।
9. लड़कियों के लिए स्कूलों में पैड की मांग
सांसद ने मासिक धर्म स्वच्छता को दान नहीं बल्कि मौलिक अधिकार बताया। खराब स्वच्छता के कारण लड़कियां स्कूल छोड़ रही हैं। चड्ढा ने पैड और निजता तक पहुंच को गरिमा और समानता का मुद्दा बताते हुए अधिकार-आधारित नीति बनाने की मांग की।
10. गिग वर्कर्स की सुरक्षा पर खतरा
चड्ढा ने 10 मिनट डिलीवरी के दबाव की निंदा की। प्लेटफॉर्म कंपनियों पर गिग वर्कर्स को ‘हेलमेट पहने बंधक’ बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने असुरक्षित दबाव, सामाजिक सुरक्षा की कमी और सम्मानजनक वेतन की मांग की ताकि वर्कर्स को इंसान समझा जाए, न कि सिर्फ नंबर।