एअर इंडिया विमान क्रैश: वकील का दावा- सुसाइड नैरेटिव झूठा, इलेक्ट्रिकल सिस्टम की खामी से हुआ हादसा
अहमदाबाद-लंदन विमान हादसे में एएआईबी और बोइंग के दावों को पीड़ितों के वकील माइक एंड्रयूज ने खारिज किया है। उनका कहना है कि सुसाइड नैरेटिव के विपरीत, त ...और पढ़ें
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एअर इंडिया विमान हादसा (File Photo)
HighLights
वकील ने पायलट आत्महत्या सिद्धांत को सिरे से खारिज किया।
विमान में पहले से इलेक्ट्रिकल सिस्टम की खामी थी।
आरएटी डिवाइस का रनवे पर सक्रिय होना अहम।
शत्रुघ्न शर्मा, अहमदाबाद। एअर इंडिया के बोइंग विमान के उडान भरते ही महज 39 सेकंड में क्रैश हो जाने को लेकर अब तक छन छन कर बाहर आई रिपोर्ट की सत्यता आगामी दिनों में जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट से पता चलेगी, लेकिन एएआईबी व बोइंग के अब तक के सभी दावों को पीडितों के वकील माइक एंड्यूज ने सिरे से खारिज कर दिया है।
उनकी अपनी निजी जांच में विमान में पहले से खामी होने की बात कही जा रही है, वे प्लेन क्रैश के लक्षणों के आधार पर ईलेक्ट्रीक सिस्टम की खामी को विमान दुर्घटना का कारण मानते हैं।
अहमदाबाद से लंदन जा रहे विमान एआई-171 के हादसे में 241 यात्रियों की तथा 19 अन्य की मौत हुई थी, म्रतक 150 अमरीकी व ब्रिटिशर यात्रियों के परिजनों की ओर से अमरीका में केस लड रही बीस्ली एलन लॉ फर्म यूएसए के पार्टनर एवं अटार्नी माइक एंड्रयूज का दावा है विमान हादसे के बाद सुसाइड नैरेटिव फैलाया गया लेकिन विमान हादसा तकनीकी खामी से हुआ लगता है।
दुर्घटना के वीडियो पर क्या तर्क?
दुर्घटना के वीडियो और फोटो सबूत देखने पर लगता है कि रनवे छोड़ने से पहले ही आरएटी डिवाइस बाहर आकर काम कर रही थी। यह हादसे का अहम पहलू है, फ्यूल स्विच की खराबी के चलते आरएटी पहले ही बाहर आ गई थी। यह इस हादसे पर जारी हुई अंतरिम रिपोर्ट के दावे को खारिज करता है। एयरक्राफ्ट में उडान भरने से पहले से ही फॉल्ट सिग्नल दिख रहे थे। कहा जा रहा है कि विमान का ट्रांसपॉन्डर भी पहले बंद हुआ और फिर चालू हुआ।
अंतरिम रिपोर्ट में बताई गई पायलट सुसाइड थ्योरी को लॉ फर्म ने स्पष्ट खारिज कर दिया है। उनका यह भी दावा है कि हादसाग्रस्त विमान में पूर्व में भी तकनीकी खराबी थी, एक बार उसका ईलेक्ट्रीक पैनल को बदला गया था। वाटर लीक हो जाने से भी सर्किट खराब हो सकता है।
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माइक एंड्रयूज का क्या कहना है?
माइक एंड्रयूज बताते हैं कि आरएटी का रनवे पर ही एक्टिवेट होना, गेट पर फॉल्ट सिग्नल, और टैक्सी में ट्रांसपॉन्डर फेल होना - ये सब इलेक्ट्रिकल/सिस्टम फेलियर की तरफ इशारा करते हैं। विमान हादसे के बाद उसके फ्यूल स्विच के बंद होने को लेकर भी कई तरह की बातें सामने आई लेकिन पीडितों के वकील का दावा है की विमान में खराबी इससे पहले ही शुरु हो गई थी।
लॉ फर्म ने फ्लाइट सिमुलेटर टेस्टिंग के आधार पर दावा किया कि हादसे वाले विमान का टेक-ऑफ उम्मीद से लंबा या धीमा रहा। यह ब्रेक ड्रैग या कम थ्रस्ट का परिणाम हो सकता है, इसमें आम तौर पर 14 से 18 सेकंड लगते हैं। जबकि प्रीलिमिनरी रिपोर्ट के टाइमिंग को आधार माना जाए तो आरएटी एयरक्राफ्ट के रोटेट होने से कई सेकंड पहले ही बाहर आ चुकी थी। धीमा टेक-ऑफ और रेट का जल्दी बाहर आना इलेक्ट्रिकल फैल्योर के दावे को पुख्ता करता है ना कि पायलट की गलती को।
लॉ फर्म का कहना है कि विमान हादसे की रिपोर्ट एक वर्ष के भीतर देना होता है, ऐसे में एएआईबी 12 जून को या इससे पहले पूर्ण या अंतरिम रिपोर्ट जारी कर सकता है। एयर इंडिया
अमरीकी व ब्रिटिशर पीडितों को हादसे के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहा है इससे उनमें निराशा है तथा सूचना पाने के लिए संघर्ष करना पड रहा है।
सुरक्षा कारणों से रिपोर्ट सार्वजनिक ना हो: एफआईपी
फैडरेशन ऑफ इंडियन पायलेट एफआईपी के अध्यक्ष केप्टन सी एस रंधावा गुरुवार को विमान हादसे की पहली बरसी से पहले अहमदाबाद में मीडिया के समक्ष अपनी बात रखेंगे। रंधावा इसमें विमान हादसों से सबक लेने, बोइंग विमान 171 के हादसे की जांच, नागरिक उड्डयन के सुरक्षा मापदंडों एवं हादसों की जवाबदेही पर चर्चा करेंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नागरिक उड्डयन मंत्रालय आदि को एक पत्र भेजकर एएआईबी को अहमदाबाद विमान हादसे को लेकर कोई भी रिपोर्ट जारी करने से रोकने की मांग की है। उनहोंने विमान व यात्रियों की संपूर्ण सुरक्षा का हवाला देते हुए यह अपील की है।
जांच में जुटी अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय एजेंसियां
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) इंडिया, नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (एनटीएसबी), एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्रांच (एआईबी) यूके, फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) यूएस, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एवियशन (डीजीसीए) इंडिया, इसके अलावा विमान निर्माता कंपनी बोइंग, इंजन निर्माता जीई एयरोस्पेस, स्पेस टेक्निकल सदस्य के रूप में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड तथा तकनीकी सदस्य और ब्लैक बॉक्स ट्रांसपोर्ट के लिए इंडियन एयर फोर्स की भी मदद ली गई! जांच टीम में एविएशन मेडिसिन स्पेशलिस्ट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल ऑफीसर भी शामिल है।