Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    'अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा, इसे कोई बदल नहीं सकता', भारत की चीन को दो टूक

    Updated: Tue, 11 Aug 2026 05:31 PM (GMT+05:30)

    विदेश मंत्रालय ने फिर दोहराया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, चीन द्वारा स्थानों के नाम बदलने के प्रयासों को खारिज किया। ...और पढ़ें

    HighLights

    1. विदेश मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न अंग बताया।

    2. चीन द्वारा स्थानों के नाम बदलने के प्रयास खारिज किए गए।

    3. भारत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता पर जोर दिया।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को फिर दोहराया कि अरुणाचल प्रदेश 'भारत का एक अभिन्न हिस्सा' है। मंत्रालय ने यह बात सीमावर्ती राज्य में जगहों के नाम बदलने को लेकर चीन के साथ चल रहे विवाद के बीच कही है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, 'मैं एक बार फिर दोहराना चाहता हूं कि अरुणाचल प्रदेश भारत का एक अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और यह एक ऐसा तथ्य है जो पहले से ही स्पष्ट है ।साथ ही, मैं इस बात पर भी जोर देना चाहता हूं कि इस निर्विवाद सच्चाई को कोई नहीं बदल सकता।'

    बॉर्डर पर शांति बनाए रखना जरूरी

    इसके अलावा, भारत-चीन संबंधों पर बात करते हुए जायसवाल ने कहा, 'भारत और चीन के बीच सीमावर्ती इलाकों से जुड़े मामलों पर, हमने चीनी के साथ बातचीत में हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि हम इन मुद्दों को बहुत गंभीर मानते हैं और इन इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना सबसे जरूरी है। हमने यह भी कहा है कि हमारे सीमा मामलों की स्थिति का असर हमारे व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा।

    भारत-चीन सीमा मामलों पर हाल ही में हुई WMCC की 36वीं बैठक में भी इस बात को दोहराया गया था। इस बैठक में, दोनों पक्षों ने खुलकर बातचीत की और 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) के पास की स्थिति की समीक्षा की। भारतीय ने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया कि द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना जरूरी है।'

    खबरें और भी

    चीन की चालबाजी के बीच भारत की दो टूक 

    चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश की जगहों के लिए बार-बार चीनी नाम रखने की कोशिशों के बीच, भारत ने 'सर्वे ऑफ इंडिया' के आधिकारिक नक्शे पर राज्य की 27 जगहों की पहचान उनके स्टैंडर्ड नामों से की है। सरकार ने कहा कि इस कदम का मकसद इन जगहों की सही पहचान करना और उनके भौगोलिक और ऐतिहासिक महत्व के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।

    भारत ने अरुणाचल प्रदेश में जगहों के नाम बदलने की बीजिंग की कोशिशों को हमेशा खारिज किया है। भारत का कहना है कि ऐसी कोशिशें 'बेकार और बेतुकी' हैं और इनसे यह सच्चाई नहीं बदल सकती कि यह राज्य भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा।'

    रणनीतिक और ऐतिहासिक रूप से अहम

    इन 27 जगहों में से कई रणनीतिक और ऐतिहासिक रूप से अहम हैं, जिनमें लॉन्ग जू (1959 में भारत-चीन के बीच सैन्य टकराव की जगह) और थाग ला (जहां 1962 की लड़ाई की शुरुआती लड़ाइयों में से एक हुई थी) शामिल हैं।

    इस लिस्ट में पूर्वी अरुणाचल प्रदेश का अहम लॉजिस्टिक्स हब जयरामपुर, साथ ही जसवंत गढ़ और शेर-ए-थापा मेमोरियल भी शामिल हैं, जो 1962 की लड़ाई के भारतीय सैन्य नायकों की याद दिलाते हैं।

    यह भी पढ़ें- स्लोवेनिया में खालिस्तान समर्थकों ने भारतीय दूतावास को बनाया था निशाना, विदेश मंत्रालय ने की निंदा

    यह भी पढ़ें- 'सुनियोजित तमाशा', विदेश मंत्रालय ने अनुच्छेद 370 पर पाकिस्तान के 'यौम-ए-इस्तेहसाल' को किया खारिज