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आजम खान ने कैसे बनाया था जौहर विश्वविद्यालय? ईडी की जांच में बड़ा खुलासा

Updated: Thu, 20 Aug 2026 09:09 PM (IST)

ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि आजम खान का जौहर विश्वविद्यालय उनके मंत्री रहते हुए ठेकों से मिली रिश्वत की रकम से बना है।

आजम खान ने रिश्वत के पैसों से बनाया जौहर विश्वविद्यालय (जागरण)

आजम खान ने रिश्वत के पैसों से बनाया जौहर विश्वविद्यालय (जागरण)

HighLights

  1. ईडी जांच में जौहर विश्वविद्यालय पर रिश्वत से बनने का खुलासा।

  2. ठेकेदार ने ठेके का 30-40% विश्वविद्यालय पर खर्च करना बताया।

  3. आजम खान ट्रस्ट के आजीवन अध्यक्ष, फंडिंग की जांच जारी।

नीलू रंजन, नई दिल्ली। आजम खान का जौहर विश्वविद्यालय उनके मंत्री रहते हुए दिए गए ठेके से मिली रिश्वत की रकम से बनी है। ईडी की जांच में इसका खुलासा हुआ है।

एक ठेकेदार ने ईडी को दिये बयान में ठेके के 30-40 फीसद रकम जौहर विश्वविद्यालय के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में खर्च करने का खुलासा किया है।

मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने 2025-26 के आयकर रिपट्न में विश्वविद्यालय की 94.33 करोड़ रुपये की संपत्ति होने का दावा किया है। जबकि अधिकारियों ने विश्वविद्यालय के 59 भवनों के निर्माण में 494.46 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया है। ईडी ने आजम खान ट्रस्ट के आजीवन अध्यक्ष हैं।

ठेके के पैसों से बना जौहर विश्वविद्यालय?

सूत्रों के अनुसार 2012 से 2017 की सपा सरकार के दौरान आजम खान कैबिनेट मंत्री के साथ-साथ यूपी जल निगम के अध्यक्ष थे। इस दौरान बहुत सारे ठेके आजाम खान के गृह क्षेत्र रामपुर के ठेकेदारों को दिये गए।

ठेके के एवज में इन ठेकेदारों ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट में दान देने के साथ ही असली ठेके के स्थान पर पर निर्माण सामग्री को जौहर विश्वविद्यालय तक पहुंचा दिया।

ईडी अब ट्रस्ट के सभी दानकर्ताओं की सूची की जांच कर रही है और उनसे पूछताछ कर रही है। ऐसे ही एक ठेकेदार से बुधवार के छापे के दौरान पूछताछ की गई और उनका बयान दर्ज किया।

उक्त ठेकेदार ने अपने बयान में बताया कि 2013-14 से 2017-18 के बीच आजम खान के प्रभाव के कारण उसे 150 करोड़ रुपये के ठेके मिले। इस रकम का 30 से 40 फीसद जौहर विश्वविद्यालय के लिए निर्माण सामग्री खरीदने पर खर्च किया गया।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने की पुष्टि

आयकर विभाग की जांच से भी इसकी पुष्टि होती है। जिसमें उस दौरान ठेकेदारों द्वारा ठेके के बड़े हिस्से को जौहर विश्वविद्यालय तक पहुंचने की बात है।

ईडी की जांच के दौरान एक ऐसी कंपनी का पता चला, जिसे 2025 में उप्र जल निगम से 1.98 करोड़ रुपये का काम कंस्ट्रक्शन और डिजाइन के लिए मिला था।

बाद में उस कंपनी में जौहर ट्रस्ट को 50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिया। इसी तरह से 25 करोड़ रुपये का ठेका पाने वाली एक कंपनी ने ट्रस्ट को 40 लाख का दान दिया।

ईडी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार बुधवार को दिल्ली, रामपुर और सहारनपुर में गए छापे के दौरान जौहर ट्रस्ट की फंडिंग से जुड़े कई अहम दस्तावेज मिले हैं।

इन सभी की जांच की जा रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ईडी की कोशिश जौहर विश्वविद्यालय को मिली सभी फंडिंग के मूल स्रोत का लगाना है, चाहे किसी ने निर्माण सामग्री खरीदकर दिया हो, या फिर दान के रूप में ट्रस्ट को दिया गया है।

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