बांकीपुर रिजल्ट से महागठबंधन के अंदर हलचल, RJD की ड्राइविंग सीट को लेकर सियासत तेज
बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा की हार के बावजूद महागठबंधन के भीतर राजद के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं। ...और पढ़ें

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समय कम है?
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अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का नतीजा केवल भाजपा की हार तक सीमित नहीं है, बल्कि महागठबंधन के भीतर भी हलचल पैदा कर गया है।
कांग्रेस की चुनावी दूरी, वाम दलों द्वारा प्रशांत किशोर को खुलकर बधाई एवं राजद की करारी हार ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिहार में विपक्ष की राजनीति अब भी राजद के नेतृत्व में ही आगे बढ़ेगी।
राजद की 'ड्राइविंग सीट' को लेकर कसमसाहट
बातें अभी पर्दे के पीछे की जा रही हैं, लेकिन घटनाक्रम बता रहे हैं कि गठबंधन के भीतर राजद की 'ड्राइविंग सीट' को लेकर गहरी कसमसाहट है।
कांग्रेस की नाराजगी, वाम दलों की स्वतंत्र प्रतिक्रिया और जनसुराज के उभार ने बहस तेज कर दी है कि बिहार में विपक्ष की राजनीति की अगली दिशा और उसकी ड्राइविंग सीट किसके हाथ में होनी चाहिए।
बिहार की मौजूदा स्थिति से कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को अवगत करा दिया गया है। वाम दलों ने भी संकेतों में बहुत कुछ स्पष्ट कर दिया है। प्रशांत किशोर के पक्ष में माकपा और माले की सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है।
माकपा के महासचिव एमए बेबी ने भाजपा की हार को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बताया है। साथ ही उन्होंने इस जनादेश को व्यापक जनसंघर्षों में बदलते हुए लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष शक्तियों की बड़ी एकता बनाने पर जोर दिया है।
किस ओर रुख कर रहे वाम दल
भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने भी प्रशांत किशोर की जीत को मेहनत से अर्जित उपलब्धि बताया और आगे की बड़ी लड़ाई के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।
दोनों शीर्ष नेताओं की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब महागठबंधन का सबसे बड़ा घटक राजद सबसे खराब स्थिति का सामना कर रहा है।
महागठबंधन में खटपट के संकेत चुनाव से पहले ही मिलने लगे थे। कांग्रेस ने पहले बांकीपुर सीट पर दावा ठोका। बाद में प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पूरे चुनाव के दौरान राजद से दूरी बनाए रहा।
प्रदेश प्रवक्ता आसितनाथ तिवारी ने सार्वजनिक रूप से कहा कि राजद ने गठबंधन की ताकत का प्रभावी इस्तेमाल नहीं किया। यह सीधे तौर पर तेजस्वी यादव की रणनीति पर सवाल था।
चुनाव के दौरान भी कांग्रेस राजद से कटी-कटी ही रही। यहां तक कांग्रेस के बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भी गुपचुप तरीके से किशोर की मदद की।
कांग्रेस के भीतर कैसी सुगबुगाहट?
बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार झा का कहना है कि तेजस्वी यादव का राजनीतिक प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा। बांकीपुर में राजद का पारंपरिक मुस्लिम-यादव समीकरण भी कमजोर पड़ता दिखा।
ऐसे में कांग्रेस का एक वर्ग गंभीरता से यह मान रहा कि भाजपा के मुकाबले बिहार में विपक्ष को नया चेहरा और नई रणनीति की जरूरत है। झा के अनुसार कांग्रेस के नेतृत्व में बिहार में विपक्ष के नए स्वरूप के उभार के लिए पूरा मैदान खुला है।
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तेजस्वी यादव को लेकर बढ़ी चिंता
बिहार में विपक्षी दलों की सबसे बड़ी चिंता की वजह तेजस्वी यादव की राजनीति के प्रति बढ़ती उदासीनता है। बांकीपुर चुनाव के दौरान विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा था और केंद्र सरकार के खिलाफ जंतर-मंतर से राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक माहौल भी बन रहा था।
बावजूद तेजस्वी यादव ने विदेश यात्रा को प्राथमिकता दी और करीब तीन सप्ताह तक देश से बाहर रहे।जबकि सहयोगी दल चाहते थे कि वे नेतृत्व संभालें।
नतीजा हुआ कि बांकीपुर में राजद न केवल तीसरे स्थान पर खिसक गई, बल्कि उसकी प्रत्याशी की जमानत भी जब्त हो गई। ऐसे में सहयोगी दलों में भविष्य की रणनीति और नेतृत्व पर नए सिरे से विचार की बेचैनी स्वाभाविक है।