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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 04, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    दत्तकपुत्र ने पिता के साथ किया ऐसा व्यवहार, अब करना पड़ेगा भुगतान

    By Nancy BajpaiEdited By:
    Updated: Thu, 04 Jan 2018 09:19 AM (GMT+05:30)

    दत्तकपुत्र द्वारा पिता की संपत्ति हड़पकर उसे दरकिनार करना भारी पड़ा, अब सैलरी से प्रतिमाह 10 हजार रुपए पिता को देने होंगे।। ...और पढ़ें

    दत्तकपुत्र ने पिता के साथ किया ऐसा व्यवहार, अब करना पड़ेगा भुगतान
    दत्तकपुत्र ने पिता के साथ किया ऐसा व्यवहार, अब करना पड़ेगा भुगतान

    भोपाल (नईदुनिया)। अक्सर आपने सुना होगा कि पुत्र ने पिता की संपत्ति हड़पकर उन्हें दरकिनार कर दिया, लेकिन यह खबर पढ़ने के बाद ऐसे पुत्र इस तरह की हरकत करने से पहले हजार बार सोचेंगे।

    कटारा हिल्स मे रहने वाले श्याम सुंदर शर्मा की खुद की औलाद नहीं थी, तो उन्होंने 1968 में अपनी बहन के चार बच्चों में से सबसे छोटे बेटे को गोद लिया था। उस समय उसकी उम्र 2 वर्ष थी। लेकिन जब वह बड़ा होकर संपन्न हुआ तो वह पिता की सारी संपत्ति हड़पकर उन्हें दर-दर की ठोकरे खाने के लिए मजबूर कर चला गया। श्याम सुंदर ने इसकी शिकायत की। एसडीएम टीटी नगर संजय श्रीवास्तव ने अनोखा आदेश सुनाया। उन्होंने राजस्थान के चित्तौ़ड़गढ़ स्थित जिस चंदेरिया फैक्ट्री में दत्तक पुत्र महावीर प्रसाद शर्मा काम करता है, उसके प्रेसीडेंट को नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में उन्होंने दत्तक पुत्र के वेतन में से प्रतिमाह 10 हजार रुपए वसूल करने के लिए कहा है। इतना ही नहीं यह भी पूछा है कि क्या दस हजार रुपए प्रतिमाह देने के लिए महावीर प्रसाद शर्मा सक्षम है या नहीं।

    2012 में तत्कालीन डीजीपी को भी की थी शिकायत
    बीएचईएल में मार्केटिंग मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त श्याम सुंदर शर्मा ने अपने दत्तक पुत्र महावीर प्रसाद शर्मा के खिलाफ 12 फरवरी 2012 को डीजीपी नंदन दुबे से लिखित शिकायत की थी। जिसमें तत्कालीन थाना प्रभारी सीपी द्विवेदी ने समझौता करा दिया था, लेकिन बाद में वह मुकर गया।

    2013 में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव को लिखा था पत्र
    श्याम सुंदर शर्मा ने पुत्र के खिलाफ भरण पोषण अधिनियम के तहत मुख्यमंत्री के तत्कालीन प्रमुख सचिव रहे मनोज श्रीवास्तव को भी लिखित में शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर श्रीवास्तव ने यह मामला तत्कालीन भोपाल कलेक्टर निशांत वरवड़े को स्थानांतरित कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। बार-बार नोटिस जारी करने के बाद भी जब दत्तक पुत्र उपस्थित नहीं हुआ तो एसडीएम ने कंपनी को नोटिस जारी कर सैलरी में से एक लाख 20 हजार रुपए वसूलने के आदेश दिए है।

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