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    NEET पेपर लीक के आरोपी दिनेश बिवाल के निकले राजनीतिक संबंध, अब बीजेपी-कांग्रेस आमने सामने

    Updated: Sun, 17 May 2026 09:57 AM (IST)

    NEET पेपर लीक मामले में आरोपी दिनेश बिवाल के राजनीतिक संबंधों को लेकर बवाल मचा हुआ है। भाजपा बिवाल से दूरी बना रही है, जबकि कांग्रेस भाजपा पर बड़े मगर ...और पढ़ें

    आरोपी दिनेश बिवाल (बाएं) ।

    आरोपी दिनेश बिवाल (बाएं) ।

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 3 मई को हुई NEET परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर बवाल मचा हुआ है। जैसे-जैसे सीबीआई पेपर लीक मामले में अपनी जांच आग बढ़ा रही है वैसे-वैसे लीक से जुड़े कई खुलासे हो रहे हैं। जांच में सामने आए अहम नामों में से एक नाम जयपुर के जमवा रामगढ़ के दिनेश बिवाल का है।

    लेकिन NEET पेपर लीक से जुड़े आरोपों के अलावा बिवाल का राजनीतिक सफर और नेताओं द्वारा अचानक उनसे दूरी बनाने की कोशिश अपने आप में एक अलग कहानी बन गई है।

    बिवाल को लेकर क्या खुलासा हुआ?

    कई पोस्टरों, होर्डिंग्स और सोशल मीडिया पोस्ट में बिवाल को बीजेपी पदाधिकारी बताया गया है। अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर उन्होंने खुद को "बीजेपी जयपुर ग्रामीण का पूर्व जिला मंत्री" बताया है। अब बीजेपी के साथ उनके कथित संबंधों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

    बीजेपी नेताओं ने क्या कहा?

    एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी नेताओं ने उन्हें कोई भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने से इनकार कर दिया। बीजेवाईएम के प्रदेश अध्यक्ष शंकर गौरा ने कहा कि उनके नेतृत्व में जयपुर ग्रामीण जिले में अभी तक कोई नियुक्ति नहीं की गई है। उनसे पहले जब अंकित चेची प्रदेश अध्यक्ष थे तब भी संगठनात्मक नियुक्तियां कथित तौर पर बहुत कम हुई थीं।

    हाल के दिनों में अमित शर्मा और बलराम दून जयपुर ग्रामीण के जिला अध्यक्ष थे। दोनों नेताओं ने यह भी दावा किया कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने न तो बिवाल को कोई आधिकारिक जिम्मेदारी दी और न ही उन्हें संगठनात्मक बैठकों में आमंत्रित किया।

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    हालांकि, दून ने यह स्वीकार किया कि जब 2011 में वे बीजेवाईएम जयपुर ग्रामीण जिला अध्यक्ष बने थे तब बिवाल पहले से ही पिछली टीम का हिस्सा थे और राज्य मंत्री के पद पर थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने महेंद्र पाल मीणा, जो अब विधायक हैं और जिनकी तस्वीरें बिवाल के साथ सोशल मीडिया पर सामने आई थीं को अपनी टीम में शामिल किया था।

    वहीं, दीन से पहले जिला अध्यक्ष रहे रघुवीर चौधरी ने इस बात से इनकार किया कि बिवाल उनकी टीम का हिस्सा थे। महेंद्र पाल मीणा ने कहा कि वह नियमित रूप से अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से मिलते हैं। बिवाल के साथ अपनी तस्वीरों के बारे में पूछे जाने पर मीणा ने जवाब दिया कि एक जन प्रतिनिधि होने के नाते कई लोग उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं।

    बीजेपी के मुख्य संगठन के भीतर यह दावा किया जा रहा है कि बिवाल को जो भी जिम्मेदारियां मिलीं, वे समय-समय पर पार्टी के अलग-अलग नेताओं की सिफारिशों के जरिए मिलीं। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि उनकी सिफारिश असल में किसने की थी तो ज्यादातर नेता चुप रहे।

    सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों ने बिवाल की सिफारिश की थी उनमें जमवा रामगढ़ के पूर्व विधायक जगदीश मीणा और महेंद्र पाल मीणा शामिल थे। शायद इसी वजह से बिवाल के सोशल मीडिया पेज पर मौजूद लगभग हर दूसरी तस्वीर में वह या तो महेंद्र मीणा के साथ नजर आते हैं या फिर अभिवादन करते हुए दिखाई देते हैं।

    कांग्रेस ने उठाए सवाल

    राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि भाजपा नेता इस मुद्दे को महज लोगों के एक साथ तस्वीरें खिंचवाने का मामला बताकर खारिज नहीं कर सकते।

    उन्होंने दावा किया कि बिवाल की तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें वह आठ से दस बीजेपी नेताओं के साथ दिख रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने सवाल उठाया कि बीजेपी इन आरोपों का जवाब देने से क्यों बच रही है और पूछा कि क्या सरकार इस घोटाले में शामिल बड़े मगरमच्छों को बचाने की कोशिश कर रही है।

    कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौर ने जोर देकर कहा कि बिवाल कभी भी भाजपा कार्यकर्ता नहीं थे।

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