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    'शादी का वादा करते मुकर जाना हमेशा...', दुष्कर्म के मामले में केरल हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी 

    Updated: Tue, 18 Nov 2025 10:40 PM (IST)

    केरल उच्च न्यायालय ने कहा कि रिश्ता खत्म होने या किसी और से शादी करने पर सहमति से बने यौन संबंध को बलात्कार नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति जी गिरीश ने ...और पढ़ें

    केरल हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)

    केरल हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. रिश्ता टूटने पर बलात्कार नहीं: हाई कोर्ट

    2. सहमति से बने संबंध: कोर्ट का फैसला

    3. शादी का झूठा वादा: कोर्ट की टिप्पणी

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि किसी रिश्ते को खत्म करना या बाद में किसी और से शादी करना स्वचालित रूप से पूर्व में सहमति से बनाए गए यौन संबंध को बलात्कार का मामला नहीं बना देता।

    न्यायमूर्ति जी गिरीश ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति "अच्छे अवसरों" की तलाश में किसी अन्य व्यक्ति से विवाह कर लेता है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी अन्य महिला के साथ उसका पूर्व सहमति से बनाया गया संबंध कानून के तहत बलात्कार बन जाता है।

    किस मामले पर कोर्ट कर रहा था सुनवाई

    न्यायालय भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (बलात्कार), 493 (धोखे से सहवास) और 496 (कपटपूर्ण विवाह समारोह) के तहत आरोपी एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

    क्या है पूरा मामला?

    आरोप था कि इस व्यक्ति ने एक महिला के साथ लम्बे समय तक संबंध बनाए, उससे शादी करने का वादा किया, लेकिन अंततः किसी और से शादी कर ली। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह रिश्ता 2009 में शुरू हुआ था, जब शिकायतकर्ता पहले से ही शादीशुदा थी और उसके दो बच्चे थे। 2013 में उसके पति की मृत्यु के बाद आरोपी उसके साथ रहने लगा और संबंध जारी रखा।

    शिकायतकर्ता को विश्वास हो गया था कि वे विवाहित हैं, जब उसने एक निजी समारोह में उसकी सोने की चेन पहनाई। हालांकि, 2014 में आरोपी ने कानूनी तौर पर दूसरी महिला से शादी कर ली। जब उससे पूछताछ की गई तो उसने शिकायतकर्ता को आश्वासन दिया कि वह अब भी उसे अपनी पत्नी मानता है।

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    लेकिन 2017 में उसने रिश्ता खत्म कर दिया, जिसके बाद उसने बलात्कार और धोखाधड़ी से शादी करने का आरोप लगाते हुए आपराधिक मामला दर्ज कराया।

    हाई कोर्ट ने क्या कहा?

    उच्च न्यायालय ने कहा कि उनके बीच संबंध स्पष्ट रूप से सहमति से बने थे, न कि विवाह के किसी कपटपूर्ण वादे से प्रेरित होकर। कहा गया है कि विवाह के झूठे वादे पर आधारित यौन संबंध को बलात्कार माना जाने के लिए यह साबित होना चाहिए कि पुरुष का शुरू से ही महिला से विवाह करने का कोई इरादा नहीं था और उसने केवल उसका यौन शोषण करने के लिए झूठे वादे किए थे।

    अदालत ने यह भी कहा कि उनका रिश्ता तब शुरू हुआ जब महिला कानूनी रूप से विवाहित थी, जिससे उसका यह दावा कमजोर हो गया कि उसे गुमराह किया गया था और वह आरोपी से कानूनी रूप से विवाहित थी।

    सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णयों का हवाला देते हुए न्यायालय ने कहा कि भावनात्मक जुड़ाव या भविष्य के इरादों पर आधारित सहमति से की गई अंतरंगता बलात्कार नहीं मानी जाएगी, जब तक कि शुरू से ही धोखा साबित न हो जाए।

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