Youth Budget: स्कूल-कॉलेज में कंटेंट क्रिएटर लैब, कौशल विकास पर जोर... बजट 2026 में युवाओं के लिए क्या हुआ एलान?
बजट 2026 में सरकार ने युवाओं के लिए कौशल विकास पर विशेष जोर दिया है। बेरोजगारी भत्तों के बजाय 'सीखो, काम करो और आगे बढ़ो' का संदेश दिया गया है। 15000 ...और पढ़ें

निजी तथा सरकारी क्षेत्रों में नए एएचपी संस्थानों की स्थापना की जाएगी

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जितेंद्र शर्मा, नई दिल्ली। बेरोजगारी भत्तों और अनुदानों जैसी बैसाखियां युवाओं को थमाने के बजाए सरकार ने युवाओं को इस बार साफ संदेश दिया है- 'सीखो, काम करो और आगे बढ़ो।' तमाम घोषणाओं ने कौशल का ऐसा कर्तव्य पथ दिखाया है, जिस पर विभिन्न क्षेत्रों में संभावनाओं के द्वार खुलते दिखाई देते हैं।
एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) सेक्टर को 'ऑरेंज इकोनॉमी' का आधार बताते हुए सरकार ने घोषणा की है कि देशभर के 15000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित की जाएंगी।

वैश्विक मांग को भुनाने का रोडमैप
स्वास्थ्य के क्षेत्र में हेल्थ केयरगिवर की वैश्विक मांग को भुनाने का रोडमैप इस बजट में है और पहली बार 'शिक्षा से रोजगार एवं उद्यम' संबंधी उच्चाधिकार प्राप्त स्थायी समिति के गठन की घोषणा की है, जो कि विकसित भारत की राह में परिवर्तनों-आवश्यकताओं का आकलन कर कौशल विकास और रोजगार सृजन के प्रस्ताव तैयार करेगी।
बजट 2025-26 में केंद्र सरकार ने युवा भारत की आकांक्षाओं को पूरा करने की प्रतिबद्धता जताते हुए सेवा क्षेत्र पर विशेष जोर दिया है। चूंकि, विशेषज्ञ लगातार सुझाव दे रहे हैं कि कौशल विकास के प्रयास स्कूली स्तर की शिक्षा से ही शुरू करने होंगे, इसलिए सरकार इस दिशा में ठोस कदम बढ़ाती हुई दिखाई भी दी है। सरकार का मानना है कि एवीजीसी एक बढ़ता हुआ उद्योग है, जिसमें वर्ष 2030 तक 20 लाख पेशेवरों की आवश्यकता होगी।

एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित करने का निर्णय
इन संभावनाओं के अनुरूप युवाओं को तैयार करने के लिए ही स्कूल-कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित करने का निर्णय किया है, जिसके लिए तकनीकी सहायता इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी मुंबई देगा। भारतीय डिजाइन उद्योग के विस्तार और डिजाइनों की कमी को देखते हुए पूर्वी क्षेत्र में एक नए राष्ट्रीय डिजाइन इंस्टीट्यूट की स्थापना की घोषणा की है।
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इसी तरह विकसित भारत के लिए पेशेवर तैयार करने की कार्ययोजना में भारत सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी विशेष संभावनाएं नजर आ रही हैं। जिस तरह से वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य देखभाल सेवा प्रदाताओं (हेल्थ केयरगिवर) की मांग बढ़ रही है, उसे देखते हुए सरकार ने घोषणा की है कि वृद्धों की चिकित्सा और संबद्ध देखभाल सेवाओं को शामिल करते हुए एक मजबूत देखभाल सेवा परिवेश बनाया जाएगा।

डेढ़ लाख हेल्थ केयरगिवर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा
देखभाल सेवा और स्वास्थ्य, योग, मेडिकल और सहायक उपकरणों के संचालन जैसे संबद्ध कौशलों का संयोजन करके मल्टी स्किल्ड केयरगिवर्स को प्रशिक्षित करने के लिए नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क के अनुरूप कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे। आने वाले वर्षों में डेढ़ लाख हेल्थ केयरगिवर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। वहीं, संबद्ध स्वास्थ्य सेवा पेशवरों (एएचपी) के लिए मौजूदा संस्थानों का उन्नयन किया जाएगा।
निजी तथा सरकारी क्षेत्रों में नए एएचपी संस्थानों की स्थापना की जाएगी। इसमें ऑप्टोमेट्री, रेडियोलाजी, एनेस्थिसिया, ओटी टेक्नोलॉजी, एप्लाइड साइकोलॉजी और व्यवहार संबंधी स्वास्थ्य सहित 10 चयनित विषय क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा और अगले पांच वर्षों में एक लाख एएचपी जोड़े जाएंगे। कौशल विकास से रोजगार और स्वरोजगार के इन प्रयासों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 'शिक्षा से रोजगार एवं उद्यम' उच्चाधिकार प्राप्त स्थायी समिति के गठन का प्रस्ताव रखा है।
प्राथमिकता में कौशल विकास, 62 प्रतिशत बढ़ा बजट
सरकार को विश्वास है कि यह समिति वर्ष 2047 तक दस प्रतिशत की वैश्विक हिस्सेदारी के साथ सेवा क्षेत्र में भारत को विश्व में अग्रणी बनाने में सहयोग करेगी। यह समिति विकास, रोजगार और निर्यात के लिए संभावनाओं को बढ़ाने के लिए क्षेत्रों को प्राथमिकता देगी। नौकरी और कौशल आवश्यकताओं पर एआई सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रभाव का भी आकलन करेगी और उसके लिए उपाय सुझाएगी।
कौशल विकास सरकार की प्राथमिकता में है। यही वजह है कि कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय का बजट इस बार 62 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में बजट प्रस्ताव 6100 करोड़ रुपये का था, जो कि इस वर्ष 9885.80 करोड़ रुपये कर दिया गया है।