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    बजट 2026 में तालिबान-भूटान के लिए खुला खजाना: चाबहार पोर्ट के लिए कुछ नहीं, बांग्लादेश को क्या मिला?

    Updated: Sun, 01 Feb 2026 06:40 PM (IST)

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026 का केंद्रीय बजट पेश किया, जिसमें चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया। भारत ने पहले सालाना 100 ...और पढ़ें

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2026 का केंद्रीय बजट पेश कर दिया है। लेकिन इस बार बजट में चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया है। गौर करने वाली बात ये है कि पिछले कई सालों से भारत ने चाबहार के विकास के लिए सालाना 100 करोड़ रुपये का बजट रखा था।

    chabahar port india

    ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में दक्षिणी तट पर स्थित चाबहार पोर्ट भारत के लिए व्यापारिक और रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। इस पोर्ट के विकास में भारत के महत्वपूर्ण भागीदार है। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के मद्देनजर इस बार में बजट में चाबहार का जिक्र भी नहीं है।

    कितना महत्वपूर्ण है चाबहार?

    अफगानिस्तान, मध्य एशिया और उससे आगे के क्षेत्रीय व्यापार और रणनीतिक पहुंच के लिए चाबहार की लोकेशन अहम है। यह ओमान की खाड़ी के ठीक मुहाने पर स्थित है और ईरान का पहला गहरे पानी का बंदरगाह है। चाबहार पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट की स्थिति के समान ही है। ग्वादर को चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के रूप में विकसित किया है।

    chabahar port location

    इस अनुसार भारत के लिए चाबहार पोर्ट पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का जवाबी कदम भी है। चाबहार पोर्ट में भारत ने दो दशक से भी पहले से निवेश करना शुरू कर दिया था। दरअसल बंटवारे के बाद पाकिस्तान की नापाक हरकतों के कारण ईरान और मध्य एशिया से भारत के संबंध टूट गए। 1996 में जब तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता में आया, जब भारत और ईरान के संबंधों में गहराई आई।

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    चाबहार को लेकर ईरान और भारत के बीच बातचीत 2002 में शुरू हुई और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में समझौते पर दस्तखत हुए। चाबहार ने भारत को न केवल आर्थिक कनेक्टिविटी दी, बल्कि इस क्षेत्र में चीन के प्रभाव को भी संतुलित करने का मौका मिला। हालांकि पिछले साल सितंबर में अमेरिका ने ईरान पर बड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए और चाबहार पोर्ट भी इसकी जद में आ गया।

    तालिबान-भूटान पर मेहरबान

    इस बाद सरकार ने 'अन्य देशों को सहायता' श्रेणी भूटान और अफगानिस्तान के लिए खजाना खोला है। वहीं बांग्लादेश के साथ संबंधों में तनाव के मद्देनजर उसे दी जाने वाली आर्थिक मदद को घटा दिया है। 2025-26 के बजट में बांग्लादेश को 120 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन इस बार इसे घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

    वहीं तालिबान के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए आवंटन 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 150 करोड़ रुपये कर दिया गया है। भूटान को मिलने वाला पसंदीदा देश का दर्जा बरकरार है। सरकार ने 2025-26 के संशोधित बजट में 1950 करोड़ रुपये के आवंटन को बढ़ाकर 2288.56 करोड़ रुपये कर दिया गया।

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