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    आने वाला है बजट, बड़े शहरों के साथ छोटे-मझोले शहरों को क्या है उम्मीद?

    Updated: Thu, 15 Jan 2026 08:30 PM (IST)

    लेख भारतीय शहरों पर बढ़ते दबाव और अपर्याप्त शहरी विकास पर प्रकाश डालता है। स्वच्छ पानी, सीवर और सार्वजनिक परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाएँ अभी भी अपर्याप्त ...और पढ़ें

    आने वाला है बजट बड़े शहरों के साथ छोटे-मझोले शहरों को क्या है उम्मीद (फाइल फोटो)

    आने वाला है बजट बड़े शहरों के साथ छोटे-मझोले शहरों को क्या है उम्मीद (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. शहरी विकास के लिए बजट में प्राथमिकता और फंड की कमी।

    2. स्थानीय निकायों को स्वायत्तता और वित्तीय सशक्तिकरण की आवश्यकता।

    3. अमृत जैसी योजनाओं की निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। शहर पर दबाव बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2030 तक लगभग 45 फीसद आबादी शहरों में होगी। पर शहर उस हिसाब से उन्नत नहीं हो रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में खासतौर से केंद्र सरकार की नजर तो शहरी व्यवस्था और विकास पर गई है लेकिन इसके लिए जिस गति और फंड की जरूरत है वह पूरा नहीं हो रहा है।

    छोटे तो दूर, बड़े व सुविधाओं के हिसाब से कथित उन्नत शहरों में भी सौ फीसद साफ पानी और हवा, सीवर सिस्टम, बिजली, बेहतर सार्वजनिक यातायात जैसी मूलभूल सुविधाएं अपर्याप्त हैं। पैदल यात्री तो नजरों से ही ओझल हैं। शहरों के सीमित संसाधनों पर बोझ बढ़ता जा रहा है और उसके लिए दीर्घकालिक उपाय की जगह सिर्फ त्वरित उपाय ढूंढे जा रहे हैं।

    आने वाला है केंद्रीय बजट

    जरूरी है कि शहरी विकास केंद्र से लेकर राज्य तक के प्राथमिक एजेंडे में शामिल हो। फिलहाल केंद्रीय बजट आने वाला है और उसके बाद राज्यों के बजट पेश होने हैं। आंकड़ों के हिसाब से देखें तो कई योजनाएं चल रही है। केंद्र की ओर से लाखों करोड़ रुपये के फंड दिए हैं लेकिन नतीजा निराश ही करता है।

    शहरी विकास वैसे तो राज्य का विषय है, लेकिन अकेले राज्यों के भरोसे इन शहरों को सक्षम नहीं बनाया जा सकता है। ऐसे में शहरी विकास को दो तरीके से देखा जाना चाहिए। कुछ योजनाएं समग्र रूप से चलाई जा सकती हैं जैसे पेयजल, सीवर आदि के लिए अमृत योजना चल रही है।

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    लेकिन इसके लिए अलावा शहरों की दूसरी विशिष्ट जरूरतें होती है उसके लिए भी इंतजाम होने चाहिए। छोटे कस्बे से बढ़ रहे शहरों के लिए अनुभवी प्लानर नियुक्त होने चाहिए और तय समय में पूरे देश में लगभग 200 ऐसे शहरों के विकास के लिए रोडमैप पर बजट का ध्यान जाना चाहिए।

    राज्यों के लिए क्या है सुझाव?

    कुछ वर्ष पहले सरकार ने ऐसे दो दर्जन शहरों के लिए सोच दिखाई थी लेकिन वह जस का तस पड़ा है। शहरी मामलों के विशेषज्ञ हितेश वैद्य कहते हैं- क्वशहरों का विकास तभी संभव है जब उन्हें पूरी स्वायत्ता दी जाएगी। यानी उन पर ऊपर से कुछ थोपा न जाए बल्कि उनकी जरूरतें उनसे पूछी जाए और सहयोग दिया जाए।

    राज्यों को सिटी प्लान की जगह क्लस्टर सिटी प्लान बनाने के लिए बजट में राह दिखाई जानी चाहिए। निकायों के लिए प्रोफेशनल म्यूनसिपल कैडर सृजित किया जाना जाना चाहिए। निकायों के पास समर्पित अपने अधिकारियों का न होना भी इस राह में एक बड़ी बाधा है। क्व क्व जाहिर है कि सभी योजनाओं की सख्त निगरानी, आडिट की जानी चाहिए।

    साथ ही राज्यों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। अमृत मिशन, जल जीवन मिशन या स्मार्ट सिटी मिशन जैसे योजनाएं सिर्फ कमजोर निगरानी की वजह जमीनी स्तर पर उतनी कारगर नहीं हो पायी, जैसी सोच उन्हें शुरू करने के दौरान दिखाई गई थी। इसके पीछे राज्यों व नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति भी एक बड़ी चुनौती थी।

    ऐसे में बजट में नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए भी राह दिखाया जाना चाहिए। राज्यों को केंद्रीय योजनाओं में सक्रियता और अपने तईं प्रबंधन के लिए तो तैयार होना ही होगा लेकिन केंद्र को भी सोच बदलनी पड़ेगी।

    शहरी विकास की जरूरते:-

    • शहरी योजना: अमरावती जैसे नए शहरों के विकास की जररूत, मौजूदा शहरों का योजनावद्ध विस्तार और बस रहे नए शहर व कस्बों की योजना पर ध्यान।
    • सार्वजनिक परिवहन: मेट्रो, इलेक्टि्रक बसें और साइकिल ट्रैक का जाल बिछाना चाहिए ताकि निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो।
    • जल प्रबंधन: जल संचयन और प्रभावी जल निकासी प्रणाली होनी चाहिए ताकि बाढ़ जैसी स्थिति न बने।
    • एफोर्डेबल आवास: बढ़ती शहरी आबादी को देखते हुए कम आय समूह वाले सस्ते घरों के निर्माण तेजी से होना चाहिए।
    • पर्यावरण उपाय: शहरों के बढ़ते प्रदूषण को करने के लिए पार्कों व अर्बन फारेस्ट का अधिक विकास करना चाहिए। कचरा प्रबंधन पर फोकस होना चाहिए।
    • आपदा प्रबंधन: जलवायु परिवर्तन को देखते हुए शहरों को भूकंप, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से लड़ने के लिए सक्षम बनाना चाहिए।

    पानी, सीवर या सार्वजनिक परिवहन के लिए होंगे खास ऐलान

    एक फरवरी को पेश हो रहे बजट में दिल्ली-एनसीआर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सुगम और सभी क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए एक विशेष स्कीम घोषित हो सकती है। वायु प्रदूषण से निपटने में जुटे केंद्रीय वन एवं पर्यावऱण मंत्रालय ने वाहन प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए सरकार जो बड़े प्रस्ताव दिए है, उनमें एनसीआर में मेट्रो लाइन के विस्तार, नए मेट्रो स्टेशन बनाने और तीन गुना अधिक बसों का संचालन आदि शामिल है।

    इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में दूषित जल से होने वाली मौतों को देखते हुए अमृत योजना के नए चरण का भी ऐलान किया जा सकता है। वैसे भी मौजूदा समय में चल रहे अमृत स्कीम के दूसरे चरण की अवधि मार्च 2026 में खत्म हो रही है, जबकि इससे तहत होने वाली 1.50 लाख करोड़ के काम अभी भी लंबित है।

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