'इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड का प्रस्ताव हो रहा तैयार', बोले सीडीएस अनिल चौहान; इससे कैसे बढ़ेगी सेना की ताकत?
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने घोषणा की है कि थिएटर कमांड्स के गठन पर सशस्त्र बलों के बीच चर्चा पूरी हो चुकी है।

सीडीएस जनरल अनिल चौहान(फाइल फोटो)

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सशस्त्र बल एक बड़े बदलाव की कगार पर खड़े दिख रहे हैं। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने रण संवाद के दूसरे संस्करण में घोषणा की कि थिएटर कमांड्स के गठन को लेकर सशस्त्र बलों के बीच चर्चा पूरी हो चुकी है।
CDS चौहान ने कहा कि मैं ऑपरेशन तिरंगा की रिपोर्ट एक हफ्ते या उसके आस-पास पूरा कर पाऊंगा, जो कि थिएटर कमांड्स की चर्चा और रूपरेखा तैयार करने की प्रक्रिया का नाम है। हालांकि, CDS ने यह भी कहा कि कुछ छोटी-मोटी दिक्कतें अभी भी सुलझानी बाकी हैं।
जनरल चौहान पिछले साल 30 सितंबर को रिटायर होने वाले थे, उन्हें 30 मई तक का सेवा विस्तार दिया गया है। CDS ने जनवरी में पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि सशस्त्र बलों के भीतर चल रही चर्चाओं को मई के अंत तक पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
एक बार मसौदा तैयार हो जाने के बाद, थिएटर कमांड का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा जाएगा, और फिर इसे प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) के पास भेजा जाएगा। एक बार मंजूरी मिल जाने के बाद थिएटर कमांड व्यवस्था स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा सुधार बन जाएगी।
क्या हैं थिएटर कमांड्स ?
एक एकीकृत थिएटर कमांड एक एकल कमांड मुख्यालय होगा, जहां तीनों सेनाओं के सभी अंग एक ही कमांडर को रिपोर्ट करेंगे। तीन अलग-अलग थिएटर कमांड्स बनाए जाने हैं। उम्मीद है कि इनमें से प्रत्येक थिएटर एक विशिष्ट क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालेगा।
ये तीनों कमांड्स क्रमशः पाकिस्तान सीमा, चीन सीमा और समुद्री क्षेत्र की देखरेख करेंगे। वर्तमान में, तीनों सेनाएं सत्रह ऑपरेशनल और फंक्शनल कमांड्स में विभाजित हैं।
पाकिस्तान सीमा की देखरेख करने वाला थिएटर कमांड संभवतः जयपुर में स्थित होगा और इसकी कमान थल सेना के एक अधिकारी के हाथों में होगी। चीन सीमा के लिए जिम्मेदार एकीकृत थिएटर कमांड लखनऊ में स्थित होगा।
कहा जा रहा है कि इस कमांड की कमान वायु सेना के एक अधिकारी के हाथों में होगी। समुद्री क्षेत्र की देखरेख करने वाला कमांड संभवतः तिरुवनंतपुरम में स्थित होगा और इसकी कमान नौसेना के एक अधिकारी के हाथों में होगी।
क्या होगा थिएटर कमांड्स के फायदे?
थिएटर कमांड्स का उद्देश्य तीनों सेनाओं की युद्धक क्षमता को बढ़ाना होगा। तीनों सेनाओं की क्षमताओं को एक ही कमांड के तहत एकीकृत करने से अधिक तालमेल के साथ मिलकर लड़ पाएंगी। एक ही कमांडर के अधीन काम करने से निर्णय लेने की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हो जाएगा, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देना संभव हो पाएगा।
संयुक्त कमांड का एक और फायदा यह है कि संसाधनों का आवंटन और उन्हें एक साथ लाना ज्यादा कुशल तरीके से किया जा सकता है, जिससे संसाधनों और उनके प्रभाव को अधिकतम किया जा सके। इस कदम से लॉजिस्टिक्स में दोहराव भी कम होगा।
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