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'ऑपरेशन सिंदूर एक केस स्टडी', पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा पर क्या बोले सेन प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी

Published: Thu, 09 Apr 2026 06:33 PM (IST)Updated: Thu, 09 Apr 2026 06:49 PM (IST)

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बेंगलुरु में 'रण संवाद' में ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों पर चर्चा की। सेना अब बहु-क्षेत्रीय संचालन (MDO) के लिए तैयार हो रही है।

HighLights

  1. ऑपरेशन सिंदूर से सूचना युद्ध के अनुभव साझा किए

  2. आधुनिक युद्ध में बहु-क्षेत्रीय संचालन (MDO) महत्वपूर्ण

  3. फेक न्यूज से निपटने को मनोवैज्ञानिक रक्षा डिवीजन बना

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बेंगलुरु में आयोजित रण संवाद के दौरान ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों पर चर्चा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि सूचना युद्ध (Information Warfare) अब आधुनिक युद्ध का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है और ऑपरेशन सिंदूर इसके लिए एक ब्लूप्रिंट के रूप में उभरा है

भारतीय सेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद अब सेना को आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहे हैं। उन्होंने इसे बहु-क्षेत्रीय संचालन (MDO) की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव का आधार बताया। जनरल द्विवेदी गुरुवार को बेंगलुरु में आयोजित त्रि-सेवा सेमिनार रण संवाद 2026 को संबोधित कर रहे थे।

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को एक केस स्टडी बताते हुए कहा कि यह मिशन पाकिस्तान के राज्य-प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की अचूक मारक क्षमता, तकनीकी समन्वय, और रणनीतिक दृढ़ता का प्रदर्शन था। उन्होंने पाकिस्तान के नकारात्मक प्रोपेगेंडा को बेनकाब करते हुए कहा कि भारत ने अपनी सत्य की सकारात्मकता से झूठ का मुकाबला किया।

सूचना युद्ध पर खास फोकस

सेना प्रमुख ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कुल प्रयास का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा सूचना युद्ध और नैरेटिव प्रबंधन पर खर्च हुआ। उन्होंने जोर दिया कि आज का युद्ध केवल पारंपरिक मैदान तक सीमित नहीं रह गया है।

उन्होंने कहा कि आज सैन्य परिवार सिर्फ 12 लाख सक्रिय जवानों तक सीमित नहीं है। अगर वेटरन और उनके परिवारों को शामिल करें तो यह संख्या 1.3 करोड़ तक पहुंच जाती है। ये सभी सूचना क्षेत्र का हिस्सा हैं।

कोई एक डोमेन निर्णायक नहीं

जनरल द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को MDO का बेहतरीन उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में जमीनी खुफिया नेटवर्क, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के इनपुट्स ने थल सेना और वायु सेना को सटीक हमलों में मदद की, जबकि नौसेना की तैनाती ने व्यापक रणनीतिक संतुलन बनाया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई एक क्षेत्र अकेले युद्ध का नतीजा तय नहीं करता। सफलता डोमेन के बीच सही क्रम और तालमेल से मिलती है।

मनोवैज्ञानिक रक्षा डिवीजन का गठन

इस अभियान के बाद एक अहम संस्थागत बदलाव यह हुआ कि सेना में मनोवैज्ञानिक रक्षा डिवीजन(PDD) का गठन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य फेक न्यूज और दुश्मन के प्रोपगैंडा का रीयल-टाइम में मुकाबला करना है।
स्थायी संघर्ष का युग

सेना प्रमुख ने वर्तमान विश्व को विस्तृत, अघोषित, बहु-क्षेत्रीय और बहु-डोमेन विश्व युद्ध की स्थिति बताया। उन्होंने कहा कि आज व्यापारी, नागरिक और नये अभिनेता भी युद्ध के नतीजों को प्रभावित कर रहे हैं। हर दिन नया सबक मिलता है और पुरानी मान्यताएं टूटती हैं।

युद्धक्षेत्र अब रैखिक नहीं, बहु-डोमेन

आज का युद्धक्षेत्र बहु-स्तरीय और बहु-डोमेन हो गया है। ज़मीनी हमलों के साथ-साथ साइबर हमले, स्पेस-आधारित टारगेटिंग और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर लगातार चलते रहते हैं। जनरल द्विवेदी ने चेतावनी दी कि अपने सेक्टर को ही देखने वाला कमांडर युद्ध का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा देख पाता है। अब क्रॉस-डोमेन जागरूकता आग्नेय शक्ति जितनी ही महत्वपूर्ण है।

प्रगति के बावजूद डोमेन के बीच समन्वय और युद्ध के विभिन्न स्तरों रणनीतिक, परिचालनात्मक और सामरिक में तालमेल अभी भी चुनौती बना हुआ है। साइबर और संज्ञानात्मक युद्ध को पारंपरिक संचालन के साथ और बेहतर तरीके से जोड़ने की जरूरत है। अंत में उन्होंने कहा कि लक्ष्य डोमेन साइलो से डोमेन फ्यूजन तक पहुंचना है, जहां भूमि, वायु, जल, साइबर और स्पेस के बीच की सीमाएं लगभग मिट जाती हैं।

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