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CJI चीफ गेस्ट विवाद: कौन हैं मनन कुमार मिश्रा? BCI-NALSAR मामले में अब तक क्या-क्या हुआ

Updated: Fri, 14 Aug 2026 04:47 PM (IST)

सीनियर वकील मनन कुमार मिश्रा और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) NALSAR विश्वविद्यालय के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने के विवाद में घिर गए हैं।

BCI - NALSAR विवाद

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सीनियर वकील और राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गए हैं। एक दशक से अधिक समय तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रमुख रहे मिश्रा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

विवाद तब शुरू हुआ जब बार काउंसिल ने NALSAR यूनिवर्सिटी के 2026 में ग्रेजुएट होने वाले बैच के एनरोलमेंट पर रोक लगाने का फैसला किया।

इस कदम से कानूनी और राजनीतिक हलकों में भारी उथल-पुथल मच गई है। कई पक्ष इस फैसले को विवादास्पद बता रहे हैं और मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। पूरा मामला अब चर्चा का विषय बना हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

इस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने भी कड़ी टिप्पणी की है। साथ ही, देश की वकीलों की सबसे बड़ी संस्था के प्रमुख के तौर पर मिश्रा के लंबे कार्यकाल की भी फिर से जांच-पड़ताल शुरू हो गई है।

इस विवाद के बीच, सुप्रीम कोर्ट में BCI में ढांचागत सुधारों की मांग करते हुए एक याचिका दायर की गई है। इसमें चेयरमैन और अन्य पदाधिकारियों के लिए निश्चित कार्यकाल तय करने जैसी मांगें शामिल हैं।

यह याचिका ऐसे समय में आई है जब BCI को शुरुआती तौर पर राज्य बार काउंसिलों को यह निर्देश देने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था कि वे NALSAR के 2026 के ग्रेजुएट छात्रों को वकील के तौर पर एनरोल न करें।

क्या है पूरा मामला?

छात्रों ने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को बुलाने के प्रस्ताव का विरोध किया था। काफी आलोचना के बाद कुछ ही घंटों में यह आदेश वापस ले लिया गया। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने BCI के दखल पर सवाल उठाए।

CJI सूर्यकांत ने कहा कि छात्रों को विरोध करने का अधिकार है और काउंसिल का इस मामले में दखल देने का कोई मतलब नहीं है। इस विवाद के कारण कुछ जगहों से मिश्रा के इस्तीफे की भी मांग उठी है, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी शामिल है।

कौन हैं मनन कुमार मिश्रा?

मनन कुमार मिश्रा एक सीनियर वकील और बिहार से BJP के राज्यसभा सांसद हैं। वे नवंबर 2014 से BCI के चेयरमैन हैं और 2025 में रिकॉर्ड सातवीं बार लगातार इस पद के लिए चुने गए। BCI चेयरमैन का चुनाव दो साल के कार्यकाल के लिए होता है।

मिश्रा बिहार के गोपालगंज जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने छपरा के राजेंद्र कॉलेज से BSc (ऑनर्स) किया और पटना लॉ कॉलेज से LLB की डिग्री हासिल की। उन्होंने गोपालगंज सिविल कोर्ट में अपनी वकालत शुरू की और बाद में 1982 में पटना हाई कोर्ट चले गए। इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट बने।

कांग्रेस उम्मीदवार से BJP सांसद बनने तक

मिश्रा का राजनीतिक करियर भी रहा है। BJP में शामिल होने से पहले उन्होंने 2010 का बिहार विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था। 2024 में, BJP ने उन्हें बिहार से राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया, जहां वे निर्विरोध चुने गए।

कैसे शुरू हुआ NALSAR विवाद?

विवाद तब शुरू हुआ जब NALSAR के कुछ छात्रों ने यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर, रजिस्ट्रार और फैकल्टी को चिट्ठी लिखकर आने वाले दीक्षांत समारोह (convocation) के लिए CJI सूर्य कांत को दिए गए प्रस्तावित निमंत्रण का विरोध किया।

छात्रों की यह आपत्ति CJI की उन टिप्पणियों के बाद आई, जो उन्होंने संसद तक 20 जुलाई के विरोध मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की थीं। इसके बाद BCI ने NALSAR से उन लोगों के बारे में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी जिन्होंने कथित तौर पर इस अभियान को शुरू किया, आयोजित किया या लोगों को इकट्ठा किया।

अपने शुरुआती संदेश में, मिश्रा ने कहा कि जो लॉ स्टूडेंट देश के सर्वोच्च न्यायिक पद का सम्मान नहीं करता, उसकी कानूनी पेशे के लिए उपयुक्तता पर सवाल उठाए जा सकते हैं। इसके बाद BCI ने राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया कि वे NALSAR के 2026 बैच के ग्रेजुएट्स का एनरोलमेंट अगले आदेश तक रोक दें।

अपने फैसले से पलटा BCI

इस निर्देश की कानून जगत और सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना आलोचना हुई। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने इस कदम को 'गैर-कानूनी', 'अनुचित' और 'बुनियादी तौर पर गलत' बताया, साथ ही यह भी साफ किया कि वे CJI के निमंत्रण का विरोध करने वाले छात्रों का समर्थन नहीं करते हैं।

इसके बाद BCI ने अपने आदेश में बदलाव करते हुए कहा कि NALSAR के 2026 बैच के ग्रेजुएट्स में से 'ज्यादातर' निर्दोष हैं और उन्हें कुछ लोगों के कथित व्यवहार के लिए सजा नहीं दी जानी चाहिए। संशोधित सूचना के तहत 2026 बैच के सभी ग्रेजुएट को स्टेट बार काउंसिल में एनरोल करने की इजाजत दी गई।

बाद में मिश्रा ने कहा कि सीनियर एडवोकेट, वकीलों, छात्रों और आम लोगों की बात सुनने के बाद काउंसिल ने इस मामले को पूरी तरह बंद करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि 2026 बैच का किसी भी गड़बड़ी या आंदोलन में कोई हाथ नहीं था और अब आगे किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने BCI के दखल पर सवाल उठाए

यह मामला शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने BCI के शुरुआती आदेश पर कड़ा रुख अपनाया। CJI ने कहा, 'उन्हें कौन रोक सकता है?' और साथ ही यह भी कहा कि छात्रों को विरोध करने का अधिकार है। इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना भी शामिल थे. इस मामले में BCI की भूमिका पर सवाल उठाए।

CJI ने कहा कि यह उनके और छात्रों के बीच बातचीत का मामला था। कोर्ट ने BCI को नोटिस जारी किया और निर्देश दिया कि BCI या किसी स्टेट बार काउंसिल के कहने पर NALSAR के छात्रों या फैकल्टी के ख़िलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। BCI के वकील ने कोर्ट को बताया कि सर्कुलर पहले ही वापस ले लिया गया है। मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।

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