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    CJP जंतर मंतर प्रोटेस्ट: दीपके की भारत में एंट्री से हिंसक आंदोलन तक... 6 जून से अब तक क्या-क्या हुआ?

    By Shubham KumarEdited By: Shubham Kumar
    Updated: Thu, 23 Jul 2026 06:08 PM (IST)

    6 जून को अभिजीत दीपके भारत पहुंचते हैं। सैकड़ों की संख्या में उनके समर्थक उनके साथ जंतर-मंतर पर पहुंचकर नीट परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ शिक्षा मंत्री धर ...और पढ़ें

    कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन।

    कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन।

    HighLights

    1. देशभर में बड़ा रही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग।

    2. एक महीने से ज्यादा समय से जारी है विरोध प्रदर्शन।

    3. सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए चार प्रस्ताव दिए।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'NEET-UG' इस समय गंभीर धांधली, पेपर लीक और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हुई है। इसके चलते राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर पिछले एक महीने से भी अधिक समय से आक्रोशित छात्रों और अभिभावकों के देशव्यापी आंदोलन का गढ़ बना हुआ है।

    क्या बिहार और क्या महाराष्ट्र, नीट परीक्षा विवाद को लेकर सड़कों पर उतरे युवाओं की गूंज ने पूरे देशभर की सियासत को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। पुलिस प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बड़े पैमाने पर झड़प भी देखने को मिला। बिगड़ते हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों के सामने पिछले 24 घंटों में चार बार बातचीत का प्रस्ताव भी रखा है।

    बहरहाल स्थिति जो भी हो, ये कहना गलत नहीं होगा कि दिल्ली से जन्मा यह विरोध प्रदर्शन अब धीरे-धीरे पूरे देश में फैलता जा रहा है। ऐसे में देखने वाली बात यह है कि अब ये विरोध प्रदर्शन कहां जाकर थमता है। आइए अब इस विरोध प्रदर्शन के शुरुआत से लेकर अभी तक की बड़ी बातों पर प्रकाश डालते हैं। 

    Abhijeet Dipke

    अमरीका से वापसी और आंदोलन का आगाज

    NEET-UG परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के सामने आने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके 6 जून 2026 को अमेरिका से भारत लौटे। भारत आते ही उन्होंने सड़क पर उतरकर छात्रों की मांगों का समर्थन किया। इसके बाद जून के मध्य में जंतर-मंतर पर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें CJP के साथ AISA और SFI जैसे कई छात्र संगठन शामिल हुए।

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    'प्रधान गो बैक' अभियान और केंद्रीय मांगें

    आंदोलनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी सुधार की मांग उठाई। CJP ने 30 जून को देशभर में 'प्रधान गो बैक' अभियान की शुरुआत की, जिसने सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक छात्रों को लामबंद किया।

    Abhijeet Dipke (1)

    सोनम वांगचुक का प्रवेश और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल

    इस पूरे विरोध प्रदर्शन में नया मोड़ तब आया जब 28 जून को प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर आंदोलन में शामिल हुए। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा कर दी।

    सोनम वांगचुक का यह कदम आंदोलन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जिससे आम जनता और मीडिया का ध्यान इस ओर तेजी से खींचा और लोगों ने बड़े पैमाने पर जंतर-मंतर आना शुरू किया।   

    CJP protest (12)

    छात्रों की समानांतर भूख हड़ताल

    हालांकि एक पक्ष यह भी है कि सोनम वांगचुक के समर्थन में AISA के छात्र नेताओं नेहा, आमीन और मनीष ने भी जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया। लगातार 20 दिनों से अधिक चले इस अनशन में सोनम वांगचुक का वजन लगभग 10 किलो तक घट गया और उनकी सेहत गंभीर रूप से बिगड़ने लगी।

    वांगचुक का अस्पताल शिफ्ट होना और विवाद का बढ़ना

    इस पूरे मामले में सियासत सातवें आसमान पर तब पहुंच गया, जब 21वें दिन पुलिस ने हाई कोर्ट के आदेश और डॉक्टरों की चिकित्सा सलाह का हवाला देते हुए सोनम वांगचुक को जबरन जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया।

    CJP protest (5)

    इसके बाद देशभर में प्रशसान के इस कार्रवाई को लेकर आक्रोश देखने को मिला। इतना ही नहीं CJP और अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने वांगचुक को असंवैधानिक तरीके से उठाया और आंदोलन को कुचलने की कोशिश की, जिसे लेकर भारी हंगामा हुआ।

    अभिजीत दीपके की भूख हड़ताल और वापसी

    फिर क्या? सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाने के विरोध में 18 जुलाई को अभिजीत दीपके ने भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। हालांकि, 20 जुलाई को अस्पताल से वांगचुक और उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो के आग्रह पर दीपके ने अनशन खत्म किया। अस्तपाल से वांगचुक का संदेश था कि 'लड़ाई लंबी है और इसके लिए ऊर्जा बचाकर रखना जरूरी है।

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    'संसद चलो' मार्च और पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प

    अब सवाल जब यह है कि आखिर ये विरोध प्रदर्शन हिंसक कब बना? इस बात को ऐसे समझिए कि 20 जुलाई को CJP और छात्रों ने संसद घेराव का आह्वान करते हुए 'संसद चलो' मार्च निकाला। सेंट्रल दिल्ली और संसद मार्ग पर बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस बल के बीच तीखी झड़प हुई।

    शास्त्री भवन के पास पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और कई नेताओं को हिरासत में लिया। इस दौरान कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश द्वार बंद करने पड़े और इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया।

    CJP protest (6)

    आंदोलन स्थल पर दोबारा कब्जा

    इतने का बाद भी एक बात को माननी होगी कि प्रदर्शनकारियों की हिम्मत अभी भी टूटी नहीं। झड़प और पुलिस की कार्रवाई के बावजूद, प्रदर्शनकारी पूरी रात जंतर-मंतर पर डटे रहे। अभिजीत दीपके और समर्थकों ने पुलिस द्वारा हटाए गए टेंट और बैरिकेड्स के बीच दोबारा से जंतर-मंतर के मुख्य स्थल पर कब्जा जमाया और अपनी शांतिपूर्ण धरने को जारी रखने का एलान किया।

    सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का माहौल

    हालांकि अब जब यह विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैलता दिख रहा है और दूसरी ओर संसद का मानसून सत्र जारी है। तब केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की अपील की है। सरकार ने पिछलेत 24 घंटों में प्रदर्शनकारियों के सामने चार बार बातचीत का प्रस्ताव दिया है। स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त करने की अपील की है। 

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