एथेनॉल का खेल या 36 हजार करोड़ का झोल? कांग्रेस ने चीनी की महंगाई पर सरकार को घेरा
कांग्रेस ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए सरकार की सुस्ती और ई-20 नीति को जिम्मेदार ठहराया है, आरोप लगाया कि इससे जमाखोरों को फायदा हो रहा है।

कांग्रेस ने चीनी की महंगाई पर सरकार को घेरा (फाइल फोटो)

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संजय मिश्र, नई दिल्ली। कांग्रेस ने चीनी की महंगाई के लिए सरकार की सुस्ती तथा ई-20 नीति को जिम्मेदार ठहराते हुए चीनी की कीमतें बढ़ाने के पीछे जमाखारों और कालाबाजारियों को बड़े पैमाने पर फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया है।
पार्टी ने यह आरोप भी लगाया है चीनी को महंगा कर 36000 करोड़ रुपए का घोटाला किया जा रहा है और त्योहारों के इस मौसम में यह रकम जनता की जेब से लूट होगी।
कांग्रेस ने चीनी की महंगाई पर सरकार को घेरा
चीनी खपत की आपूर्ति सुनिश्चित किए बिना पेट्रोल में एथनोल की मिलावट को प्रोत्साहित करने की सरकार की ई-20 नीति पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने चंद लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए गन्ना के घटते उत्पादन के बावजूद बड़ा हिस्सा एथनोल में दिए जाने का आरोप भी लगाया।
कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन ने 2025-26 में देश में 275 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन का आंकड़ा 30 अप्रैल को ही रख दिया था जो सरकार के 343 लाख मीट्रिक टन के उत्पादन की उम्मीद से कम था यानि सरकार को चीनी की कमी के बारे में अप्रैल से ही मालूम था।
फिर भी सरकार चुप रही जिसके परिणामस्वरूप चीनी की कीमतें 40-45 रुपए से बढ़कर अगस्त में 75 रुपए प्रति किलोग्राम हो गईं। त्योहरों के महीने में 30 लाख टन प्रति महीने चीनी खपत का दावा करते हुए कहा कि त्योहारों के मौसम अगस्त से नवंबर के चार महीने में 120 लाख मीट्रिक टन चीनी की खपत होगी और लोगों को प्रति किलो 30 रुपये अतिरिक्त अपनी जेब से देना होगा।
सुरजेवाला ने कहा कि साफ है कि चीनी के लिए 36,000 करोड़ रुपए अतिरिक्त चुकाने पड़ेंगे जिसका सीधा फायदा जमाखोरों और कालाबाजारियों को होगा जो एक घोटाला है।
ई-20 नीति को बताया चीनी संकट का कारण
चीनी का उत्पादन कम होने के लिए ई-20 नीति को जिम्मेदार ठहराते हुए सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार के कृषि विकास के बड़े-बड़े दावे जमीनी स्तर पर पूरी तरह विफल रहे हैं और सही मूल्य नहीं मिलने के कारण किसान गन्ना की खेती छोड़ रहे हैं।
बावजूद सरकार ने नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच ई-20 ईंधन के उत्पादन में 32 प्रतिशत गन्ना स्टॉक का इस्तेमाल किया, जिसकी वजह से बाजार में चीनी का स्टॉक कम हो गया है और ई-20 नीति की दोहरी मार जनता पर पड़ रही क्योंकि एक ओर जहां गाड़ियां खराब होकर गैरेज में जा रही हैं तो दूसरी ओर महंगी चीनी खरीदनी पड़ रही है।
सुरजेवाला ने आम जनता को राहत देने के लिए पीडीएस के जरिए परिवार के हर सदस्य को सब्सिडी वाली दरों पर 500 ग्राम चीनी प्रति माह देने की 2017 में बंद हुई योजना फिर से शुरू करने की मांग की।
