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1965 युद्ध के दौरान गई थी गुजरात के तत्कालीन सीएम की जान; 60 साल पहले पाक की वो क्या थी 'नापाक' हरकत

Updated: Fri, 20 Feb 2026 05:05 PM (IST)

1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता का विमान पाकिस्तानी लड़ाकू जेट ने मार गिराया था। ...और पढ़ें

जब सीएम बलवंतराय मेहता की मौत ने सबको झकझोर दिया (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)

जब सीएम बलवंतराय मेहता की मौत ने सबको झकझोर दिया (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। साल 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे देश को हिला दिया। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता का विमान पाकिस्तान के लड़ाकू विमान ने मार गिराया।

इस हादसे में सीएम बलवंतराय मेहता समेत आठ लोगों की जान चली गई। यह घटना युद्ध के इतिहास की एक दुर्लभ और दर्दनाक कहानी बन गई, जब एक राजनीतिक नेता की जान आसमान में ही चली गई।

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1965 की जंग और सीएम की उड़ान

1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध अगस्त में शुरू हुआ और सितंबर तक हालात बेहद तनावपूर्ण हो चुके थे। 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बिना शर्त युद्धविराम का प्रस्ताव पास किया। भारत ने तुरंत मान लिया, लेकिन पाकिस्तान ने 23 सितंबर को सहमति दी।

इसी दौरान उसी दिन दोपहर में गुजरात के मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता अहमदाबाद से मिथापुर (कच्छ के पास) जा रहे थे। उनके साथ उनकी पत्नी सरोजबेन, तीन सहयोगी और दो पत्रकार भी थे।

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आठ सीटों वाले बीचक्राफ्ट विमान को राज्य सरकार के मुख्य पायलट जहांगीर इंजीनियर उड़ा रहे थे, जो भारतीय वायुसेना और रॉयल एयर फोर्स के पूर्व पायलट रह चुके थे। उन्हें अंदाजा नहीं था कि वे युद्ध जैसे माहौल में खतरे की ओर बढ़ रहे हैं।

आसमान में हुआ हमला

पाकिस्तान वायुसेना के फ्लाइंग ऑफिसर क़ैस हुसैन ने कराची के मौरिपुर एयरबेस से अमेरिकी एफ-86 सैबर जेट उड़ाया। उनके साथ फ्लाइट लेफ्टिनेंट बुखारी भी थे, लेकिन ईंधन की कमी के कारण बुखारी लौट गए।

ग्राउंड कंट्रोल से सूचना मिली कि सीमा के पास एक अज्ञात विमान उड़ रहा है। शक हुआ कि यह टोही (जासूसी) मिशन हो सकता है। कैस हुसैन को 20,000 फीट से नीचे 3000 फीट पर आने का आदेश मिला, जहां सीएम का विमान उड़ रहा था।

जैसे ही सैबर जेट पास आया, बीचक्राफ्ट ने पंख हिलाकर संकेत दिया कि वह नागरिक विमान है। लेकिन ग्राउंड कंट्रोल के आदेश पर हुसैन ने फायरिंग कर दी। पहली गोली बाएं पंख में लगी, दूसरी से इंजन में आग लग गई। विमान कच्छ क्षेत्र में सीमा के पास गिर गया और सभी आठ लोगों की मौत हो गई।

सच्चाई जानकर टूटा गर्व

हमले के बाद कैस हुसैन कराची बेस लौटे। उन्हें लगा कि उन्होंने दुश्मन का मिशन रोक दिया है। लेकिन शाम 7 बजे ऑल इंडिया रेडियो की खबर में बताया गया कि जिस विमान को गिराया गया, उसमें गुजरात के मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता और अन्य नागरिक सवार थे।

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यह सुनकर हुसैन हैरान रह गए। उन्होंने अपने अधिकारियों से पूछा कि साफ तौर पर नागरिक विमान को क्यों गिराया गया। जवाब मिला कि सीमा के पास होने और दूसरे मोर्चे के खतरे की आशंका के कारण ऐसा आदेश दिया गया था।

46 साल बाद मांगी माफी

करीब 46 साल बाद, 2011 में, सेवानिवृत्त कैस हुसैन ने इस घटना पर एक लेख पढ़ा। उन्हें गहरा अफसोस हुआ। उन्होंने पायलट जहांगीर इंजीनियर की बेटी फरीदा सिंह को मुंबई में खोजकर ईमेल के जरिए माफी मांगी। उन्होंने लिखा कि उन्होंने यह काम नफरत में नहीं, बल्कि युद्ध के आदेश का पालन करते हुए किया था।

फरीदा सिंह ने जवाब में कहा कि उन्होंने कभी नफरत नहीं रखी। उन्होंने लिखा, "युद्ध में अच्छे लोगों से भी बुरे काम हो जाते हैं। हम सब एक बड़े खेल के मोहरे थे।"

1965 की जंग में चार नागरिक या गैर-लड़ाकू विमान पाकिस्तानी फायरिंग का शिकार हुए थे, लेकिन किसी मुख्यमंत्री की मौत ने इस घटना को खास और बेहद दर्दनाक बना दिया। इतिहास में बहुत कम ऐसा हुआ है जब युद्ध के दौरान किसी राज्य का मुख्यमंत्री हवा में ही अपनी जान गंवा बैठा हो।

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