मेडिकल कचरे से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर CPCB-NGT सख्त, 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर करेगा कार्रवाई
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खिलाफ बायोमेडिकल वेस्ट निपटान नियमों का पालन न करने पर कार्रवाई करेगा। ...और पढ़ें

CPCB 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों पर कार्रवाई करेगा

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को बताया है कि वह 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खिलाफ कार्रवाई करेगा जिन्होंने बायोमेडिकल वेस्ट (जैव-चिकित्सा अपशिष्ट) के निपटान के नियमों का पालन नहीं किया है।
बता दें 'ग्रीन बॉडी' बायोमेडिकल वेस्ट के रखरखाव और ट्रीटमेंट में नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही है।
5 अगस्त के एक आदेश में, NGT के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर अफरोज अहमद की बेंच ने कहा कि CPCB ने देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बायोमेडिकल वेस्ट को 'गहराई में दबाने' (डीप बरियल) की प्रक्रिया के बारे में एक रिपोर्ट दाखिल की है।
'डीप बरियल' को लेकर क्या हैं नियम?
बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के तहत 'डीप बरियल' निपटान का एक सीमित तरीका है, जिसकी इजाजत सिर्फ ग्रामीण या दूर-दराज के इलाकों में की जानी चाहिए।
जहां कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी उपलब्ध नहीं है। ऐसी प्रक्रिया के लिए तय राज्य अथॉरिटी से पहले मंजूरी लेनी जरूरी है।
ट्रिब्यूनल ने पाया कि 'डीप बरियल' का इस्तेमाल करने वाली 9,178 हेल्थकेयर फैसिलिटीज (HCFs) में से सिर्फ 5,715 ही मानक नियमों का पालन कर रही थीं। सबसे ज्यादा उल्लंघन इन मामलों में हुए
बरियल पिट के नीचे भूजल स्तर को कम से कम छह मीटर बनाए रखने में विफलता (477 एचसीएफ नियमों का पालन नहीं कर रहे) और निर्धारित प्राधिकरण की उचित मंजूरी के बिना संचालन (341 एचसीएफ)।
ट्रिब्यूनल ने पाया कि संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियमों के पालन में कमियां थीं। उत्तर प्रदेश के सभी 111 और राजस्थान के सभी 33 एचसीएफ नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।
CPCB करेगा राज्यों पर कार्रवाई
ट्रिब्यूनल ने कहा, 'CPCB की ओर से पेश वकील ने बताया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCBs)/प्रदूषण नियंत्रण समितियों (PCCs) को अभी सूचना भेजी गई है।
अगर आठ हफ्तों के अंदर नियमों का पालन नहीं किया गया, तो पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत निर्देश जारी किए जाएंगे।'
अपने आदेश में, ट्रिब्यूनल ने CPCB को निर्देश दिया कि वह 28 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई की तारीख से कम से कम एक हफ्ते पहले आगे की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करे।