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    दिल्ली आबकारी केस: CBI को झटका-ED पर सवाल... क्या टिक पाएगा केजरीवाल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामला?

    Updated: Fri, 27 Feb 2026 08:43 PM (IST)

    दिल्ली आबकारी घोटाले में सीबीआई की चार्जशीट खारिज होने के बाद अरविंद केजरीवाल के खिलाफ ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले पर अनिश्चितता है। ...और पढ़ें

    CBI चार्जशीट खारिज, अब केजरीवाल पर ED केस का भविष्य सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर (AI द्वारा जनरेटेड फोटो)

    CBI चार्जशीट खारिज, अब केजरीवाल पर ED केस का भविष्य सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर (AI द्वारा जनरेटेड फोटो)

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    नीलू रंजन, नई दिल्ली। दिल्ली आबकारी घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत सभी आरोपियों के खिलाफ सीबीआई की चार्जशीट के खारिज होने के बाद इसी मामले में ईडी की मनी लांड्रिंग केस पर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।

    मूल अपराध (प्रिडिकेट आफेंस) के नहीं होने की स्थिति में मनी लांड्रिंग के केस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आठ अप्रैल से सुनवाई होगी। केजरीवाल के खिलाफ मनी लांड्रिंग के भविष्य सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा।

    FIR दर्ज होना अनिवार्य

    दरअसल मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत केस दर्ज करने के लिए प्रिडिकेट आफेंस तहत एफआईआर दर्ज होना अनिवार्य है। हाल ही में इसी राउज एवेन्यू की विशेष अदालत ने नेशनल हेराल्ड मामले में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट को इसी आधार पर खारिज कर दिया था।

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    कोर्ट का कहना था कि मूल अपराध में एफआईआर नहीं होने की स्थिति में मनी लांड्रिंग का केस नहीं चल सकता है। वैसे ईडी ने अदालत के फैसले को इस मामले में पटियाला हाउस कोर्ट के संज्ञान लेने का हवाला देते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है मूल आपराधिक मामले में आरोपितों को छूटने की पहली घटना नहीं है।

    लेकिन अलग-अलग मामलों में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अलग-अलग फैसले आते रहे हैं। इसके लिए पीएमएलए की धारा दो में "अपराध (क्राइम)" में स्पष्ट उल्लेख नहीं होना बताया जाता है। इसमें प्रिडिकेट आफेंस, प्रोसिड आफ क्राइम जैसे शब्दों का प्रयोग तो है, लेकिन पीएमएलए के तहत क्राइम क्या है, स्पष्ट नहीं है।

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    क्या अब भी चलेगा केस?

    दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 2022 में दिये फैसले के खिलाफ दाखिल याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में यह मुद्दा उठा। तीन फरवरी को जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एम कोटिस्वर सिंह की बेंच ने इस मुद्दे पर आठ अप्रैल से सुनवाई करने का फैसला दिया। इसके बाद ही यह साफ हो पाएगा कि आबकारी घोटाले में केजरीवाल व अन्य आरोपियों के खिलाफ मनी लांड्रिंग का केस चल पाएगा या नहीं।

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