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    दिल्ली HC के जज चलाते रहे गैस एजेंसी, मणिपुर के चीफ जस्टिस बनने तक भी जारी रहा कारोबार; अब हुआ खुलासा

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 08:57 AM (IST)

    न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सिद्धार्थ मृदुल ने दिल्ली और मणिपुर उच्च न्यायालयों में न्यायाधीश रहते हुए 16 साल तक एलपीजी वितरण एजेंसी चलाई, जो न्यायिक आच ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (एआई द्वारा निर्मित फोटो।)

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (एआई द्वारा निर्मित फोटो।)

    HighLights

    1. जस्टिस मृदुल ने न्यायाधीश रहते हुए 16 साल गैस एजेंसी चलाई।

    2. बीपीसीएल ने आचार संहिता उल्लंघन पर उनकी डीलरशिप निलंबित की।

    3. डीलरशिप निलंबन पर बहू ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संवैधानिक अदालतों के जज जब पद की शपथ लेते हैं तो उन्हें अलिखित नियम का पालन करना होता है, जिसके तहत सरकार, प्राइवेट पार्टियों या कंपनियों के साथ कोई भी आर्थिक लाभ, बिजनेस या व्यापारिक संबंध रखना उनके लिए अनैतिक माना जाता है।

    लेकिन जस्टिस (रिटायर्ड) सिद्धार्थ मृदुल जब दिल्ली हाई कोर्ट के जज और मणिपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस थे तो वह अपने 16 साल के कार्यकाल के दौरान एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसी चलाते रहे।

    रिन्यू कराते रहे एग्रीमेंट

    मृदुल ने 1986 में दिल्ली हाई कोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस शुरू की थी और मार्च 2008 में उसी कोर्ट में जज नियुक्त हुए। अक्टूबर 2023 में वे मणिपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने। किचन फ्लेम कंपनी के लिए बीबीसीएल और मृदुल के बीच डिस्ट्रीब्यूटरशिप एग्रीमेंट को 25 अगस्त 1995, 24 अगस्त 2005, 23 अगस्त 2010, 25 अगस्त 2015, 7 मई 2025 और पिछले साल 29 सितंबर (जिसकी वैलिडिटी 24 अगस्त 2030 तक है) को रिन्यू किया गया था।

    जज ने किया आचार संहित का उल्लंघन

    आखिरी एग्रीमेंट में स्टैम्प पेपर पर मृदुल की तस्वीर है और किचन फ्लेम के लिए उस पर उनके हस्ताक्षर हैं। पारदर्शिता के नियमों के तहत हितों के टकराव से बचने के लिए संवैधानिक अदालतों के जजों को कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी की जानकारी देनी होती है लेकिन जस्टिस मृदुल ने भारत पेट्रोलियम द्वारा 1984 में उन्हें दी गई एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप को बनाए रखकर आचार संहिता का उल्लंघन किया है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब न्यायपालिका इस संभावना के लिए तैयार होती दिख रही है कि संसद दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। उनके सरकारी बंगले से नोटों से भरे बैग मिले थे।

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    बीपीसीएल ने जज को भेजा नोटिस

    जस्टिस मृदुल के मामले में एक दिलचस्प विरोधाभास है। जहां जज ने कई लोगों, संस्थाओं और अधिकारियों को नोटिस जारी किए होंगे वहीं 29 मई को बीपीसीएल ने उन्हें ही एक नोटिस भेज दिया। इस नोटिस में पीएसयू ने दिसंबर 2025 में जज के खिलाफ दर्ज एक सार्वजनिक शिकायत का जिक्र किया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आपने पहले जज के तौर पर काम किया है।

    ऑयल मार्केटिंग कंपनी ने कहा कि जस्टिस मृदुल का गैस एजेंसी चलाना कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन है और उनसे पूछा कि उनकी डिस्ट्रीब्यूटरशिप क्यों न सस्पेंड की जाए।

    सस्पेंड हुई डिस्ट्रीब्यूशन डीलरशिप

    माना जा रहा है कि मृदुल ने बीपीसीएल के भेजे किसी भी नोटिस का जवाब नहीं दिया, जिसके बाद उसने 6 जुलाई को किचन फ्लेम की एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन डीलरशिप सस्पेंड कर दी।

    दो महीने पहले जस्टिस मृदुल की किचन फ्लेम के लिए डिस्ट्रीब्यूटरशिप संभालने वाले दीपक यादव की पत्नी मोनिका यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने बीपीसीएल से यह निर्देश देने की मांग की थी कि एजेंसी की प्रोप्राइटरशिप को उनके नाम पर फिर से बनाने के लिए उनकी अर्जी पर फैसला किया जाए।

    दिल्ली हाई कोर्ट ने बीपीसीएल से कहा था कि वह दो महीने के भीतर उनकी अर्जी पर फैसला करे। 6 जुलाई को बीपीसीएल द्वारा किचन फ्लेम की डीलरशिप सस्पेंड किए जाने के बाद मोनिका ने फिर से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने बीपीसीएल पर आरोप लगाया कि एजेंसी की ओनरशिप को फिर से तय करने की उनकी अर्जी पर जानबूझकर फैसला न लेने और साथ ही एलपीजी सप्लाई रोकने का काम किया गया है।

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