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टैरिफ से रूसी तेल तक... भारतीयों की खरी-खरी से बैचेन हुए ट्रंप के सहयोगी नवारो, बोले- भूल नहीं सकता

Updated: Wed, 12 Aug 2026 10:01 PM (IST)

पीटर नवारो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच अच्छे कामकाजी संबंध हैं और वे भारत द्वारा रूसी तेल आयात पर अमेरिकी टैरिफ के मतभेदों को सुलझा लेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच अच्छे कामकाजी संबंध- नवारो (फोटो-रॉयटर्स)

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच अच्छे कामकाजी संबंध- नवारो (फोटो-रॉयटर्स)

HighLights

  1. ट्रंप-मोदी रूसी तेल आयात टैरिफ मतभेद सुलझाएंगे।

  2. नवारो को इंटरनेट पर भारतीयों से हमले झेलने पड़े।

  3. भारत और चीन, रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में शामिल।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका में व्यापार और मैन्युफैक्चरिंग मामलों के सीनियर काउंसलर पीटर नवारो ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बहुत अच्छे कामकाजी संबंध हैं और वे भारत द्वारा रूसी तेल के आयात से जुड़े अमेरिकी टैरिफ के मुद्दे पर मतभेदों को सुलझा लेंगे।

नवारो ने भारतीयों के कमेंट पर उठाए सवाल

एएनआइ से बात करते हुए नवारो ने कहा, 'मुझे लगता है कि यूक्रेन-रूस युद्ध के दौरान, 6-8 महीने पहले, मैंने एक लेख लिखा था। उसमें बिल्कुल सही तथ्य बताए गए थे कि यूक्रेन पर रूस के हमले से पहले भारत रूस के साथ तेल व्यापार में शामिल नहीं था।'

नवारो ने आगे बताया, 'बाद में वह इसमें बड़े पैमाने पर शामिल हो गया और रूस की ओर से बहुत सारे रिफाइंड उत्पाद बेच रहा था, जिससे युद्ध की मशीनरी को मदद मिली।'

नवारो ने आगे कहा, 'और वह मुद्दा सुलझा लिया गया है। हो सकता है कि उस लेख से इसमें थोड़ी मदद मिली हो, लेकिन मैं आपको बता सकता हूं कि इंटरनेट पर भारतीय लोगों ने मुझ पर तीखे हमले किए थे। मैं बस इतना ही कहूंगा कि ऐसा न करें।'

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति के सहयोगी नवारो ने कहा कि इस मुद्दे को आखिरकार राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी खुद ही संभाल लेंगे।

पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच अच्छे संबंध

नवारो ने टैरिफ को लेकर कहा, 'अमेरिका में हम समस्याओं को इस तरह हल नहीं करते हैं। आपके सवाल के जवाब में कहूं तो, राष्ट्रपति और आपके प्रधानमंत्री के बीच बहुत अच्छे कामकाजी संबंध हैं। वे इसे आपस में सुलझा लेंगे और इसमें मेरे या किसी और के दखल देने की कोई बात नहीं है।'

नवारो की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत में इस बात पर विचार किया जा रहा है कि अमेरिका उन देशों के खिलाफ व्यापारिक कदम उठा सकता है जो रूस से तेल खरीद रहे हैं।

7 अगस्त को, अमेरिकी सीनेट ने 86-11 वोटों से 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' पास किया था। दोनों पार्टियों के समर्थन वाला यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों के सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है जो रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों में शामिल हैं।

देखा जाए तो भारत और चीन दो ऐसे देश हैं, जो रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल हैं।

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