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    भारत के जखीरे में जल्द शामिल होंगी अजेय हाइपरसोनिक मिसाइलें, DRDO ने किया स्क्रैमजेट इंजन का सफल परीक्षण

    Updated: Sun, 10 May 2026 08:30 PM (IST)

    भारत ने ध्वनि से पांच गुना तेज हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक में बड़ी सफलता हासिल की है। डीआरडीओ ने 'एक्टिवली कूल्ड फुलस्केल स्क्रैमजेट कंबस्टर' का सफल परीक ...और पढ़ें

    भारत के जखीरे में जल्द शामिल होंगी अजेय हाइपरसोनिक मिसाइलें। (X- @DRDO_India)

    भारत के जखीरे में जल्द शामिल होंगी अजेय हाइपरसोनिक मिसाइलें। (X- @DRDO_India)

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    जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। भारत ने ध्वनि से पांच गुना तेज रफ्तार से चलने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है, जो भविष्य के युद्धों की तस्वीर बदल सकती है। इस मिसाइल को न रडार पकड़ सकता है और न कोई एयर डिफेंस सिस्टम छू सकता है।

    रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एक ऐसे एडवांस्ड इंजन का सफल परीक्षण किया है, जो भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगा, जिनके पास ये अजेय तकनीक है।

    आइएएनएस के अनुसार, डीआरडीओ ने हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम के तहत 'एक्टिवली कूल्ड फुलस्केल स्क्रैमजेट कंबस्टर' का सफल और लंबी अवधि का परीक्षण किया है। यही स्क्रैमजेट कंबस्टर इस मिसाइल को 6100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार दिलाता है। इस रफ्तार को मैक 5+ भी कहा जाता है।

    रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हैदराबाद स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (डीआरडीएल) में हुए इस परीक्षण में स्क्रैमजेट कंबस्टर इंजन 1,200 सेकेंड यानी करीब 20 मिनट तक लगातार सफलतापूर्वक चलता रहा। इससे पहले जनवरी में 700 सेकेंड का परीक्षण किया गया था।

    अमेरिका, रूस, चीन के समूह में भारत

    रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस उपलब्धि से भारत भविष्य में अपनी स्वदेशी हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने के काफी करीब पहुंच गया है। अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के पास पहले से इस क्षेत्र में क्षमता है। अब भारत भी तेजी से उसी क्लब की ओर बढ़ता दिख रहा है।

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    हाइपरसोनिक मिसाइलों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि वे बेहद तेज गति के साथ उड़ान के दौरान दिशा भी बदल सकती हैं। इससे दुश्मन के रडार और मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की रक्षा क्षमता का बड़ा प्रदर्शन भी है। इससे भारत को रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी और भविष्य में मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग तथा निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर डीआरडीओ, उद्योग जगत और अकादमिक संस्थानों को बधाई दी।

    स्क्रैमजेट तकनीक ऐसे बनाती है मिसाइल को घातक

    सामान्य मिसाइलों और लड़ाकू विमानों के मुकाबले हाइपरसोनिक मिसाइलें कहीं ज्यादा तेज और घातक होती हैं। एएनआई के अनुसार, इनमें इस्तेमाल होने वाला एयर-ब्रीदिंग स्क्रैमजेट कंबस्टर इंजन हवा से आक्सीजन लेकर काम करता है, इसलिए इसे अलग से आक्सीजन ढोने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे मिसाइल हल्की, तेज और लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम बनती है।

    लेकिन इतनी अधिक गति पर सबसे बड़ी चुनौती इंजन और मिसाइल के अत्यधिक गर्म हो जाने की होती है। डीआरडीओ ने जिस “एक्टिव कूलिंग'' तकनीक का सफल परीक्षण किया है, वह इसी समस्या का समाधान माना जा रहा है। यह तकनीक इंजन को बेहद ऊंचे तापमान में भी सुरक्षित रखती है और मिसाइल को लंबे समय तक तेज रफ्तार से उड़ने में मदद करती है।

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