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    शिक्षा बजट में कमी पर एस्टीमेट कमेटी ने उठाए सवाल, सालाना 10% अनिवार्य बढ़ोतरी की सिफारिश

    Updated: Wed, 12 Aug 2026 11:13 PM (IST)

    प्राक्कलन समिति ने शिक्षा बजट में कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे नई शिक्षा नीति के लक्ष्य 6% जीडीपी तक पहुंचाने के लिए सालाना 10% अनिवार्य वृद्धि की ...और पढ़ें

    शिक्षा बजट में 10% अनिवार्य बढ़ोतरी की सिफारिश।   (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

    शिक्षा बजट में 10% अनिवार्य बढ़ोतरी की सिफारिश। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

    HighLights

    1. शिक्षा बजट को जीडीपी के 6% तक पहुंचाने की सिफारिश।

    2. केंद्र सरकार शिक्षा बजट में 10% वार्षिक वृद्धि सुनिश्चित करे।

    3. निःशुल्क ड्रेस, पाठ्यपुस्तकों की दरों की द्विवार्षिक समीक्षा हो।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। केंद्र सरकार के बजट आवंटन पर पैनी नजर रखने वाली प्राक्कलन समिति (एस्टीमेट कमेटी) ने शिक्षा के बजट में कमी पर सवाल उठाए हैं और इसे नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की सिफारिशों के अनुरूप सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के छह प्रतिशत तक पहुंचाने के लिए इनमें सालाना दस प्रतिशत तक की अनिवार्य बढ़ोतरी की सिफारिश की है।

    समिति का मानना है कि मौजूदा समय में देश में शिक्षा पर कुल जीडीपी का संयुक्त व्यय (केंद्र व राज्य दोनों का) अभी 4.1 प्रतिशत ही है, जो लक्ष्य से दूर है। यह स्थिति तब है, जब नीति का अमल अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

    लोकसभा सदस्य डॉ. संजय जायसवाल की अगुवाई में गठित इस 30 सदस्यीय प्राक्कलन समिति ने बुधवार को इसे लेकर अपनी रिपोर्ट लोकसभा को सौंप दी है। इसमें समिति ने कहा कि 2020 में आई नई शिक्षा नीति के प्राथमिक और बड़े उद्देश्यों में एक शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय को जीडीपी के छह प्रतिशत तक बढ़ाना था। लेकिन इसके बाद भी यह लक्ष्य से लगातार कम बना हुआ है।

    2026-27 में शिक्षा मंत्रालय को 1.39 लाख करोड़ रुपये का आवंटन दिया गया था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.27 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है, लेकिन यह वृद्धि लक्ष्य तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि एक समयबद्ध रूपरेखा तैयार की जाए। इसमें केंद्र व राज्य दोनों अपने शिक्षा खर्च में और बढ़ोतरी करें।

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    वहीं केंद्र सरकार को शिक्षा बजट में औसत की जगह हर साल दस प्रतिशत तक अनिवार्य बढ़ोतरी सुनिश्चित करनी चाहिए। तभी धीरे-धीरे जीडीपी के लक्ष्य के साथ तालमेल बैठाया जा सकेगा।

    लोकसभा अध्यक्ष की ओर से गठित होने वाली प्राक्कलन समिति हर साल बजट के आवंटन को जांचती है और देखती है कि नीति के अनुरूप या किसी विभाग की जरूरत के अनुरूप आवंटन हो रहा है या नहीं। इस समिति के सभी 30 सदस्य लोकसभा से होते हैं।

    दरों की हर दो साल में हो समीक्षा

    समिति ने स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर व सामाजिक रूप से वंचित वर्ग के बच्चों को दी जाने वाली निःशुल्क ड्रेस व पाठ्यपुस्तकों की दरों में मुद्रास्फीति व प्रचलित बाजार कीमतों को ध्यान में रखते हुए हर दो साल में संशोधन की सिफारिश की है।

    समिति का कहना है कि मौजूदा समय में समग्र शिक्षा योजना के तहत पहली से आठवीं कक्षा के छात्रों को निःशुल्क ड्रेस के लिए प्रति छात्र छह सौ रुपये और पाठ्यपुस्तकों के लिए पहली कक्षा से पांचवीं कक्षा के लिए प्रति छात्र 250 रुपये और छठवीं से आठवीं कक्षा के लिए प्रति छात्र चार सौ रुपये की वित्तीय मदद दी जाती है। इसमें कई सालों से बढ़ोतरी नहीं होने से छात्रों को दिक्कत हो रही है।