4 घंटे का हाई लेवल ड्रामा, 526 सांसदों की वोटिंग और रच गया इतिहास; इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने की कहानी
Indira Gandhi: यह लेख 19 जनवरी 1966 को इंदिरा गांधी के भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने की ऐतिहासिक घटना का वर्णन करता है। लाल बहादुर शास्त्री के ...और पढ़ें
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भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री श्री मति इंदिरा गांधी। फाइल फोटो

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 60 साल पहले आज ही के दिन भारतीय संसद में एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला था। देश को श्री मति इंदिरा गांधी के रूप में पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं। महज 48 साल की उम्र में इंदिरा गांधी को आज ही के दिन सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया था।
19 जनवरी 1966, चार घंटे के हाई लेवल ड्रामा के बाद कांग्रेस संसदीय पार्टी (CCP) ने इंदिरा को प्रधानमंत्री बनाने का फैसला किया। आजादी के बाद पहली बार देश की कमान किसी महिला के हाथों में सौंपी गई थी।

इंदिरा के नाम का एलान
देश के अगले पीएम पद के लिए इंदिरा के नाम का एलान हुआ। इस दौरान सफेद साड़ी और हल्के भूरे रंग की शॉल ओढ़े इंदिरा ने संसद में प्रवेश किया, जिसके बाद पूरी संसद में तालियों की गड़गड़ाहट गूंजने लगी। उस समय शायद ही किसी ने अंदाजा लगाया होगा कि चुपचाप और शांत रहने वाली इंदिरा भविष्य में 'आयरन लेडी' कहलाएंगी।
दरअसल जनवरी 1966 में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बाहदुर शास्त्री की ताशकंद में अचानक हुई मृत्यु से पूरे देश में मातम पसर गया था। ऐसे में गुलजारी लाल नंदा को कार्यकारी प्रधानमंत्री बनाया गया। शास्त्री सरकार में इंदिरा सूचना मंत्री थी। वहीं, 1960 में उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष भी बना दिया गया था।
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पीएम पद के 2 दावेदार
पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू की इकलौती संतान रहीं इंदिरा उन्हीं की छांव में पली-बढ़ीं थीं। सियासत इंदिरा को विरासत में मिली थी। ऐसे में लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद जब अगला पीएम चुनने की बारी आई, तो 16 में से 11 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इंदिरा के नाम पर मुहर लगा दी।
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हालांकि, पीएम पद के लिए इंदिरा अकेली दावेदार नहीं थीं। गुलजारी लाल नंदा और मोरारजी देसाई ने भी मैदान में एंट्री की। इंदिरा को भारी समर्थन मिलता देखकर गुलजारी लाल नंदा ने तो अपने पैर पीछे खींच लिए, लेकिन मोरारजी देसाई डटे रहे।
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526 सांसदों की वोटिंग
इंदिरा बनाम मोरारजी देसाई की ये लड़ाई बेहद दिलचस्प हो गई थी। कांग्रेस के किंगमेकर कहे जाने वाले के.कामराज ने इस टकराव को रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन मोरारजी देसाई नहीं मानें। आखिर में वोटिंग का दिन आया, यानी 19 जनवरी 2026, संसद में 526 कांग्रेस नेताओं का जमावड़ा लगा।
ये वो दिन था, जब पूरी दुनिया की निगाहें भारतीय संसद पर टिकी थीं। दोपहर तक स्थिति काफी हद तक साफ होने लगी थी। शाम को लगभग 3 बजे एक अधिकारी बाहर आया और उसने कहा, "मैं श्री मति इंदिरा गांधी की जीत की घोषणा करता हूं।"
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राष्ट्रपति भवन पहुंची इंदिरा गांधी
इस चुनाव में इंदिरा को 355 वोट मिले थे और मोरारजी देसाई को महज 169 मत मिले। कुछ ही देर में ये खबर पूरे देश में आग की तरह फैल गई। भारतीय संसद के बाहर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इंदिरा गांधी ने फौरन राष्ट्रपति भवन का रुख किया और तत्कालीन राष्ट्रपति राधाकृष्णन से मिलकर सरकार बनाने का प्रस्ताव पेश कर दिया।