दो-तिहाई का गणित और 7 सांसद, BJP में विलय के पीछे की कहानी; क्या कहता है दल-बदल नियम
राघव चड्ढा ने दावा किया है कि आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई से अधिक राज्यसभा सांसदों ने भाजपा में विलय कर लिया है, जिससे दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी ...और पढ़ें

राघव चड्ढा समेत तीन आप सांसद भाजपा में शामिल।

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई से ज्यादा राज्यसभा सांसदों ने शुक्रवार को पाला बदल लिया। उन्होंने दावा किया कि दसवीं अनुसूची के तहत उनका भाजपा में विलय हो गया है। यह एक ऐसा कदम है जिससे उन्हें दल-बदल विरोधी कानून के तहत सदन की सदस्यता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एक बार जब कोई व्यक्ति राज्यसभा के लिए चुन लिया जाता है तो उसकी सदस्यता संविधान के तहत सुरक्षित हो जाती है। कोई भी पार्टी किसी सांसद को सीधे तौर पर नहीं हटा सकती, लेकिन दल-बदल विरोधी प्रावधानों के तहत उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है।
चड्ढा के दावे पर 4 सांसदों ने नहीं लगाई अभी मुहर
चड्ढा ने दावा किया कि हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल के भी इस कदम में शामिल होने की संभावना है। हालांकि, बाकी बचे ज्यादातर सांसदों ने अब तक कोई घोषणा नहीं की है।
आप के कुल 10 राज्यसभा सांसदों में से अपनी सदस्यता बचाने के लिए कम से कम दो-तिहाई (सात) सांसदों को किसी दूसरी पार्टी में विलय का समर्थन करना जरूरी है। इन 10 सांसदों में से तीन दिल्ली से और सात पंजाब से थे। चड्ढा ने जो सात नाम गिनाए उनमें मालीवाल दिल्ली से एकमात्र सांसद हैं और बाकी छह पंजाब से हैं।
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राघव चड्ढा ने क्या दावा किया?
घोषणा करते हुए चड्ढा ने कहा कि राज्यसभा में आप के 10 सांसद हैं और उनमें से दो-तिहाई से ज्यादा हमारे साथ हैं। उन्होंने हस्ताक्षर किए हैं और आज सुबह हमने हस्ताक्षरित पत्र और दस्तावेज राज्यसभा के सभापति को सौंप दिए। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अंतिम निर्णय राज्यसभा के सभापति का होता है।
राघव चड्ढा ने कैसे किया दल-बदल?
दसवीं अनुसूची के पैराग्राफ 2 में यह प्रावधान है कि अगर कोई सदस्य अपनी मर्जी से अपनी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता छोड़ देता है या पार्टी व्हिप के खिलाफ वोट करता है तो उसे दल-बदल के आधार पर डिसक्वालिफाई कर दिया जाएगा।
हालांकि, उसी टेक्स्ट के पैराग्राफ 4 में कहा गया है कि विलय के मामले में दल-बदल के आधार पर तब अयोग्यता लागू नहीं होगी जब संबंधित विधायी दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य विलय के लिए सहमत हो जाते हैं।
राघव चड्ढा ने क्या आरोप लगाकर छोड़ी आप?
जैसा कि इस महीने की शुरुआत में बताया गया था कि चड्ढा और मालीवाल दोनों ही पहले से आप के खिलाफ बोल रहे थे, लेकिन बाकी सांसदों का फैसला चौंकाने वाला था। अपनी इस बात को आगे बढ़ाते हुए चड्ढा ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने खुद को पार्टी की गतिविधियों से अलग कर लिया है क्योंकि वह उनके अपराधों का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे।
पीसी के दौरान उन्होंने कहा, “मैं उनकी दोस्ती के लायक नहीं था, क्योंकि मैं उनके अपराधों में शामिल नहीं था। हमारे पास सिर्फ दो ही विकल्प थे या तो राजनीति छोड़ दें और पिछले 15-16 सालों में किए गए अपने जनहित के कामों को त्याग दें या फिर अपनी पूरी ऊर्जा और अनुभव के साथ सकारात्मक राजनीति करें। इसलिए, हमने यह फैसला किया है कि हम यानी राज्यसभा में आप के दो-तिहाई सदस्य भारत के संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को भाजपा में विलय कर लेंगे।”
मालीवाल का मामला अलग
मालीवाल के मामले में जहां एक ओर वह लगभग एक साल तक आप और उसके प्रमुख अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मुखर रही थीं वहीं दूसरी ओर उन्होंने अब तक किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल नहीं हुई हैं।
विशेषज्ञों की राय
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील शैल द्विवेदी कहते हैं कि आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले सात राज्यसभा सांसदों की सदस्यता नहीं जाएगी। राज्यसभा में पार्टी के कुल दस सांसद है और उनमें से अगर सात ने पार्टी छोड़कर भाजपा में विलय कर लिया है तो संविधान की दसवीं अनुसूची के मुताबिक ये वैध विलय माना जाएगा और दल-बदल कानून लागू नहीं होगा।
आम आदमी पार्टी की ओर से अदालत में चुनौती दिए जाने के मुद्दे पर द्विवेदी कहते हैं कि पार्टी ये दलील दे सकती है कि उनके दल में कोई विभाजन नहीं हुआ है। न ही मूल पार्टी के दो तिहाई सदस्यों ने दूसरे दल में विलय किया है ऐसे में जो लोग स्वयं को अलग कह रहे हैं वे दल बदल कह रहे हैं और वे अयोग्य घोषित किये जाएं। लेकिन संविधान में ऐसा कुछ स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है उसमें सिर्फ दो तिहाई सदस्यों के अलग होकर दूसरी पार्टी में विलय की बात कही गई है।