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    I-PAC रेड मामला: ED अफसरों पर नहीं होगी FIR, ममता सरकार को नोटिस; SC में क्या-क्या हुआ?

    Updated: Thu, 15 Jan 2026 05:03 PM (IST)

    ED की I-PAC दफ्तर पर रेड के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ED अधिकारियों पर दर्ज FIR पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी कर जवाब म ...और पढ़ें

    I-PAC रेड मामला ED अफसरों पर FIR पर रोक बंगाल सरकार को नोटिस (एआई द्वारा फोटो एडिट कराई गई है)

    I-PAC रेड मामला ED अफसरों पर FIR पर रोक बंगाल सरकार को नोटिस (एआई द्वारा फोटो एडिट कराई गई है)

    HighLights

    1. ED अधिकारियों पर दर्ज FIR पर SC ने लगाई रोक।

    2. सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया।

    3. केंद्रीय एजेंसी की जांच में दखल नहीं दिया जा सकता।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में राजनीतिक रणनीतिकार संस्था I-PAC के दफ्तर पर हुई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। ED ने आरोप लगाया है कि बंगाल पुलिस और राज्य सरकार ने जांच में दखल दिया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश देते हुए ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर फिलहाल रोक लगा दी है।

    सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश

    सुप्रीम कोर्ट की बेंच जिसकी अध्यक्षता जस्टिस पीके मिश्रा कर रहे थे, उन्होंने कहा कि किसी भी केंद्रीय एजेंसी की जांच में दखल नहीं दिया जा सकता है। कोर्ट ने ED अधिकारियों पर दर्ज FIR को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया है और पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।

    IPAC (1)

    अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि रेड के दौरान की गई CCTV फुटेज और सर्च की रिकॉर्डिंग से जुड़े सभी स्टोरेज डिवाइस सुरक्षित रखे जाएं। कोर्ट ने कहा कि मामले में कानून से जुड़े गंभीर सवाल हैं और उन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता।

    ED ने कोर्ट में क्या तर्क दिया?

    ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य पुलिस के साथ मिलकर जांच के दौरान सबूतों की चोरी की। उन्होंने दावा किया कि रेड के समय मुख्यमंत्री खुद I-PAC के ऑफिस पहुंचीं और ED अधिकारियों के लैपटॉप, मोबाइल फोन और अहम दस्तावेज जबरन ले लिए।

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    ED का यह भी कहना है कि कोलकाता पुलिस कमिश्नर और डीजीपी की मौजूदगी में PMLA के तहत की जा रही तलाशी में दखल दिया गया। एजेंसी ने इसे कोई एक घटना नहीं बताते हुए कहा कि पहले भी केंद्रीय एजेंसियों की जांच में राज्य मशीनरी के हस्तक्षेप का पैटर्न देखा गया है।

    ED ने कोर्ट से पश्चिम बंगाल के डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर को सस्पेंड करने और मामले की CBI जांच कराने की मांग की है। एजेंसी का कहना है कि राज्य में निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।

    IPAC (2)

    ममता सरकार और बंगाल पुलिस का पक्ष

    पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंक्षी ममता बनर्जी की ओर से सीनियर वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने ED के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि I-PAC ऑफिस में केवल चुनाव से जुड़ा गोपनीय डेटा था, जिसका ED की जांच से कोई लेना-देना नहीं था।

    वकीलों ने दलील दी कि ममता बनर्जी Z-कैटेगरी की सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति हैं, इसलिए उनके साथ पुलिस अधिकारियों का होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कुछ ही मिनटों के लिए वहां गई थीं और कोई दस्तावेज जब्त नहीं किया। पंचनामा में भी किसी जब्ती का जिक्र नहीं है।

    ममता बनर्जी ने खुद ED की कार्रवाई को गलत इरादे से की गई बताते हुए सवाल उठाया कि एजेंसी दो साल बाद और चुनाव से ठीक पहले ही बंगाल में क्यों सक्रिय हुई।

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