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    चिनूक हेलिकॉप्टर ने बनाया कीर्तिमान, पहली बार तैनात किया पोंटून असेल्ट ब्रिज; भारतीय वायु सेना की बढ़ी क्षमता

    Updated: Wed, 25 Mar 2026 06:52 AM (IST)

    भारतीय वायुसेना के चिनूक हेलिकॉप्टर ने पश्चिमी सेक्टर में पहली बार आर्मी के पोंटून असेल्ट ब्रिज को सफलतापूर्वक तैनात किया। यह संयुक्त अभ्यास भारतीय से ...और पढ़ें

    चिनूक हेलिकॉप्टर ने पश्चिमी सेक्टर में पहली बार आर्मी के पोंटून असेल्ट ब्रिज को सफलतापूर्वक तैनात किया।

    चिनूक हेलिकॉप्टर ने पश्चिमी सेक्टर में पहली बार आर्मी के पोंटून असेल्ट ब्रिज को सफलतापूर्वक तैनात किया।

    HighLights

    1. चिनूक ने पहली बार पोंटून असेल्ट ब्रिज तैनात किया।

    2. पश्चिमी कमांड के साथ संयुक्त अभ्यास में सफलता मिली।

    3. सेना की जल अवरोध पार करने की क्षमता बढ़ी।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना (IAF) के भारी भरकम चिनूक हेलिकॉप्टर ने पश्चिमी सेक्टर में एक संयुक्त अभ्यास के दौरान पहली बार आर्मी के पोंटून असेल्ट ब्रिज को हेलीकॉप्टर से तैनात किया है। यह अभ्यास भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड के साथ किया गया, जिसमें सैन्य इंजीनियरों ने ब्रिज के विभिन्न सेगमेंट्स को हेलिकॉप्टर से उठाकर जल्दी से पानी में जोड़कर तैनात किया।

    पोंटून असेल्ट ब्रिज भारतीय सेना की आक्रामक टुकड़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण उपकरण है। यह नदियों, नहरों और अन्य जल स्रोतों को पार करने में मदद करता है, जो पश्चिमी कमांड के क्षेत्र में आम हैं। आमतौर पर इस ब्रिज को भारी टाट्रा ट्रकों से तैनात किया जाता है और पानी में जोड़कर 300 मीटर तक की निरंतर पुलिया बनाई जाती है। T-90 भिश्म मुख्य युद्ध टैंक आसानी से इस ब्रिज पर से गुजर सकता है।

    चिनूक 11 टन तक वजन उठाने में सक्षम

    चिनूक भारत का सबसे भारी ऑपरेशनल हेलिकॉप्टर है, जो 11 टन तक का वजन उठाने की क्षमता रखता है। इसके टैंडम रोटर डिजाइन की वजह से यह पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में भारी सामान पहुंचाने में माहिर है। पूर्वी अरुणाचल से लेकर पूर्वी लद्दाख की ऊंची चोटियों तक चिनूक पहले से सक्रिय है। इससे पहले भारतीय वायुसेना इस भूमिका में रूसी Mi-26 हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करती थी।

    नदियां, नहरें और खाईं ऐतिहासिक रूप से सेनाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती रही हैं। चिनूक द्वारा ब्रिज की हवाई तैनाती से भारतीय सेना की जल अवरोधों को तेजी से पार करने की क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।

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