INDI गठबंधन की अहम बैठक: राहुल, ममता और अखिलेश समेत कई नैता रहे मौजूद; DMK ने बनाई दूरी
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नेताओं का स्वागत किया और अपनी शुरुआती बातों में एजेंडा बताया। इस चर्चा में वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिविजन ...और पढ़ें
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन INDI ब्लॉक के नेताओं की बैठक दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई। 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद यह उनकी पहली औपचारिक बैठक थी।
यह बैठक चार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद हुई। जहां केरल और तमिलनाडु में गैर-बीजेपी पार्टियों को जीत मिली, वहीं पश्चिम बंगाल-असम में बीजेपी की जीत मिली। अपने सहयोगी 'ऑल इंडिया NR कांग्रेस' के साथ पुडुचेरी में सत्ता बनाए रखने के कारण इन नतीजों को विपक्ष के लिए एक झटके के तौर पर देखा गया।
ममता के कहने पर बुलाई गई बैठक
यह बैठक ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कहने पर बुलाई गई। पश्चिम बंगाल में 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था और अब उसे अंदरूनी विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है।
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टीएमसी के 'इंडी' (INDI) गठबंधन के साथ रिश्ते कभी अच्छे तो कभी खराब रहे हैं और उसने राज्य में लोकसभा चुनाव अकेले ही लड़ा था। बैठक खत्म होने के बाद गठबंधन के नेताओं ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
शुरुआती बातें और एजेंडा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नेताओं का स्वागत किया और अपनी शुरुआती बातों में एजेंडा बताया। इस चर्चा में वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर), बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा जांच एजेंसियों के कथित गलत इस्तेमाल, गैर-बीजेपी राज्य सरकारों के साथ भेदभाव, महंगाई, निजीकरण, बेरोजगारी, पेपर लीक और विपक्ष द्वारा केंद्र की "कमजोर" बताई गई विदेश नीति जैसे मुद्दे शामिल हैं।
कौन-कौन हो रहा शामिल?
INDI गठबंधन की बैठक में कुल 23 पार्टियां हिस्सा ले रही हैं। इसमें शामिल होने वाले विपक्षी नेताओं में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ वामपंथी दलों के नेता भी शामिल हैं। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे वर्चुअल तरीके से बैठक में शामिल हो रहे हैं।
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कौन-कौन शामिल नहीं हो रहा?
डीएमके ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वह कांग्रेस के धोखे का हवाला देते हुए बैठक का बहिष्कार करेगी। यह फैसला तमिलनाडु चुनावों के बाद आया है, जिसमें डीएमके एक कार्यकाल के बाद सत्ता से बाहर हो गई थी। इसके बाद कांग्रेस ने राज्य में सरकार बनाने के लिए नई पार्टी टीवीके के साथ गठबंधन किया।
आम आदमी पार्टी (AAP) भी इसमें शामिल नहीं है। बैठक से पहले नई दिल्ली के कई चौराहों पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी को निशाना बनाने वाले पोस्टर लगाए गए। इन पोस्टरों में विपक्षी नेताओं द्वारा कांग्रेस सांसद के खिलाफ पहले की गई टिप्पणियों को दिखाया गया था।

इनमें एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार, टीएमसी की ममता बनर्जी, डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के वे बयान शामिल थे, जिनमें राहुल गांधी और कांग्रेस की आलोचना की गई थी।
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