विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

वित्त वर्ष 2026-27 में दुनिया भर में छाएगा भारत का विकास दर, रहेगा 7% के पार

By Rajeev KumarEdited By: Prince Gourh
Published: Thu, 29 Jan 2026 10:52 PM (IST)

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की विकास दर 6.8-7.2% रहने का अनुमान है, जो वैश्विक स्तर ...और पढ़ें

वित्त वर्ष 2026-27 में दुनिया भर में छाएगा भारत का विकास दर (फाइल फोटो)

वित्त वर्ष 2026-27 में दुनिया भर में छाएगा भारत का विकास दर (फाइल फोटो)

HighLights

  1. वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की विकास दर 6.8-7.2% अनुमानित।

  2. वैश्विक व्यापार युद्ध, अमेरिकी शुल्क से विकास दर पर असर संभव।

  3. नीतिगत सुधारों, कम महंगाई से घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत।

राजीव कुमार, नई दिल्ली। आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में भी भारतीय विकास दर दुनिया में सबसे तेज बनी रहेगी। गुरुवार को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में घरेलू विकास दर की मजबूती और महंगाई दर कम रहने की वजह से आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में आर्थिक विकास दर 6.8-7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।

क्योंकि विभिन्न देशों में जारी व्यापार युद्ध और भू-राजनीतिक उथल-पुथल की वजह से वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिकी को बहुत मदद मिलने की संभावना नहीं है। इस कैलेंडर वर्ष में अमेरिका के साथ व्यापार समझौता नहीं हुआ तो भारतीय विकास दर प्रभावित भी हो सकती है।

कैसा रहेगा अमेरिका का बाजार

दूसरी तरफ, चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका की तरफ से 50 प्रतिशत शुल्क के बावजूद सर्विस सेक्टर के निर्यात में जारी तेजी से विकास दर 7.4 प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-दिसंबर में वस्तु व सेवा को मिलाकर पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 5.9 प्रतिशत का इजाफा चल रहा है।

लेकिन जिस हिसाब से अमेरिका होने वाले निर्यात की बढ़ोतरी दर कम हो रही है, उसे देखते हुए अमेरिका के साथ व्यापार समझौता नहीं होने पर विकास दर पर असर दिख सकता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 का हवाला देते हुए देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी.अनंत नागेश्वरन कहते हैं, अगर मैन्यूफैक्चरिंग और निर्यात पर फोकस किया जाए तो भारत अपने विकास दर को 7.5-8 प्रतिशत ले जा सकता है।

राज्यों को भी अपनी नीति में केंद्र के हिसाब से बदलाव करना होगा और नौकरशाही को अंग्रेजों के जमाने की मानसिकता से बाहर निकलकर बेवजह के नियमों से उद्योग जगत को मुक्त करना होगा। क्योंकि अमेरिकी शुल्क एवं वैश्विक अशांति को देखते हुए भारत में आने वाले शुद्ध विदेशी निवेश में कमी हो रही है। रुपए में लगातार कमजोरी आ रही है।

AI की वजह से निवेश होंगे प्रभावित

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से निवेश के प्रभावित होने की आशंका है जिससे बाजार में नकदी पर असर हो सकता है।आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि इन सबके बावजूद पिछले कुछ सालों से लगातार हो रहे नीतिगत और चालू वित्त वर्ष में श्रम संहिता और जीएसटी जैसे सुधार से घरेलू अर्थव्यवस्था विकास दर की गति को कायम रखने में सक्षम है।

यही वजह है कि राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में जीडीपी के 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो पिछले पांच वित्त वर्ष में सबसे कम होगा। औसत महंगाई दर 2.9 प्रतिशत पर है और यह भी पिछले पांच साल में सबसे कम है। वैश्विक अनिश्चितता भारत के लिए एक अवसर भी है और अपने नीतिगत फैसले से नए आकार ले रही वैश्विक व्यवस्था में भारत अपनी अहम भूमिका निभा सकता है।

राज्यों को मुख्य रूप से भूमि उपलब्धता व नियम सरलीकरण पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया है। डालर के मुकाबले रुपए के मूल्य में हो रही गिरावट पर चिंता तो जाहिर की गई है, लेकिन यह भी कहा गया है कि अभी इससे अर्थव्यवस्था को कोई खतरा नहीं है। सर्वेक्षण में इस ओर भी ध्यान दिलाया गया है कि पिछले एक साल में वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने भारत की उधार लेने की क्षमता को अपग्रेड किया है।

वर्ष 2027 में किन देशों की क्या रह सकती है विकास दर प्रतिशत में (IMF के मुताबिक)

  • अमेरिका- 2.0
  • लैटिन अमेरिका- 2.7
  • ईयू के देश- 1.4
  • मध्य पूर्व व सेंट्रल एशिया- 4.0
  • विकासशील एशिया- 4.8
  • भारत- 6.4

देश में बच्चों के लिए बैन होगा इंटरनेट मीडिया? सर्वे में सामने आई चौंकाने वाली बातें

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।