AI, रक्षा और ऊर्जा... भारत-जापान के बीच हुए बड़े समझौते, आर्थिक सुरक्षा रोडमैप भी तैयार
भारत और जापान ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा, ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने के लिए एक संयुक्त रोडमैप पर सहमति जताई है। ...और पढ़ें
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जापानी पीएम सनाए तकाईची और प्रधानमंत्री मोदी(फोटो: पीटीआई)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत और जापान ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से गुरुवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, धातुओं, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ आर्थिक सुरक्षा के लिए एक संयुक्त रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई है। यह ऐतिहासिक समझौता भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नई दिल्ली की तीन दिवसीय यात्रा पर आईं उनकी जापानी समकक्ष साने ताकाची के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद हस्ताक्षरित हुआ।
वार्ता के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए पीएम ताकाची ने कहा कि जापान और भारत एक साथ मजबूत और समृद्ध होने के लिए एक-दूसरे की ताकतों का लाभ उठाएंगे। अशांत वैश्विक परिदृश्य के बीच, ऐसा पारस्परिक रूप से पूरक सहयोगात्मक संबंध बनाना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
यह यात्रा पिछले साल पीएम मोदी की टोक्यो यात्रा के बाद हो रही है, जब जापान ने अगले दशक में भारत में अपने निवेश को दोगुना से अधिक कर 61 बिलियन डॉलर से अधिक करने का संकल्प लिया था, जो दोनों देशों के बीच गहरे होते आर्थिक संबंधों को दर्शाता है।

$12.5 बिलियन के नए निवेश की तैयारी
भारतीय सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025/26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच भारत में जापानी निवेश 3.2 बिलियन डॉलर रहा।
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प्रधानमंत्री साने तकाईची की इस पहली आधिकारिक नई दिल्ली यात्रा के दौरान, 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के समानांतर जापानी कंपनियां करीब 120 सहयोग समझौतों के माध्यम से भारत में लगभग 12.5 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा करने के लिए तैयार हैं।
यह निवेश मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वच्छ ऊर्जा, मोबिलिटी, मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा, जो भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था में जापान के बढ़ते विश्वास को रेखांकित करता है।
प्रधानमंत्री तकाईची के साथ भारत आए जापान के डिप्टी चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी मसानाओ ओजाकी ने बताया कि इस शिखर सम्मेलन के साथ-साथ भारत-जापान आर्थिक मंच में 150 से अधिक जापानी कंपनियां भाग ले रही हैं। ओजाकी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह मंच सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और व्यावसायिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने में मदद करेगा।

मसौदा और परियोजनाओं पर बनीं बात
जापानी समाचार पत्र द योमिउरी शिम्बुन के अनुसार, दोनों देशों के बीच संयुक्त वक्तव्य के मसौदे में समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को गहरा करने के साथ-साथ भारत में जापानी निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करने की योजना शामिल है।
इन प्रस्तावित समझौतों में मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर सामग्री संयंत्र के लिए फुजीफिल्म का सहयोग, सुजुकी का बायोगैस प्रोजेक्ट और जापानी तथा भारतीय एआई स्टार्टअप्स द्वारा संयुक्त रूप से किया जाने वाला एप्लिकेशन डेवलपमेंट जैसे महत्वपूर्ण कदम शामिल हैं।
यह निवेश पैकेज अगले एक दशक में भारत में 10 ट्रिलियन येन के जापानी निजी निवेश को सुगम बनाने की पिछले साल घोषित व्यापक प्रतिबद्धता का ही हिस्सा है। इसके अलावा, मसौदा वक्तव्य दोनों देशों के पारस्परिक रूप से पूरक सहयोग को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है और जापान के फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक विजन के तहत आगे की प्रगति का स्वागत करता है।
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रक्षा सहयोग और सप्लाई चेन को मिलेगी मजबूती
दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। दोनों पक्ष समुद्री सुरक्षा सहयोग की समीक्षा करेंगे, रक्षा उपकरण हस्तांतरण के लिए जापान के अद्यतन दिशानिर्देशों को स्वीकार करेंगे और इस वर्ष के अंत से पहले अगली भारत-जापान विदेश और रक्षा मंत्री स्तरीय (2+2) वार्ता आयोजित करने पर सहमत होंगे।
दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के निर्यात पर चीन के प्रतिबंधों की पृष्ठभूमि में, संयुक्त वक्तव्य का मसौदा कथित तौर पर गैर-बाजार नीतियों और आर्थिक जबरदस्ती पर चिंता व्यक्त करता है, जबकि सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) की मजबूती पर अधिक सहयोग पर जोर देता है।
ऊर्जा क्षेत्र में, भारत और जापान ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए संयुक्त भंडारण पहलों की संभावना तलाशेंगे। दोनों देश भारतीय बाजार में प्रवेश करने वाले जापानी छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) का समर्थन करने और भारत में जेआर ईस्ट की E10 श्रृंखला शिंकांशेन (बुलेट ट्रेन) तकनीक लाने पर चर्चा को आगे बढ़ाएंगे।

आर्थिक सुरक्षा और एआई सहयोग का नया युग
इस नई साझेदारी के तहत आर्थिक सुरक्षा को केंद्र में रखा गया है। कोविड-19 महामारी और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बाद से, दोनों सरकारों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में कमजोरियों को कम करने की मांग की है, विशेष रूप से सेमीकंडक्टर्स और महत्वपूर्ण खनिज जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में।
16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाची के बीच हुई वार्ता के बाद दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सहयोग के एक नए स्तंभ के रूप में उभारा है।
दोनों नेताओं ने अपनी अर्थव्यवस्थाओं की पूरक ताकतों पर प्रकाश डाला। जहां एक तरफ जापान उन्नत विनिर्माण, सटीक इंजीनियरिंग और औद्योगिक तकनीक लाता है, वहीं दूसरी तरफ भारत के पास एक बड़ा सॉफ्टवेयर उद्योग, कुशल तकनीकी कार्यबल और तेजी से विस्तारित होता डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र है।
इस नई साझेदारी का उद्देश्य एआई नवाचार और इसके औद्योगिक अनुप्रयोगों को गति देने के लिए इन दोनों शक्तियों को एक साथ मिलाना है।
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