चीन-पाक की बदलती चाल: भारत ने भी बदल ली अपनी रणनीति, दुश्मनों से निपटने का मास्टर प्लान तैयार
भारत चीन और पाकिस्तान से बनी दोहरी सुरक्षा चुनौती के मद्देनजर अपनी सैन्य रणनीति और परंपरागत युद्ध क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। एक IISS रिपोर्ट के ...और पढ़ें
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चीन और पाकिस्तान की चुनौती के बीच भारत तेज कर रहा सैन्य तैयारी (AI द्वारा जनरेटेड फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान से बनी दोहरी सुरक्षा चुनौती को देखते हुए भारत अपनी सैन्य रणनीति और परंपरागत युद्ध क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है।
एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी देशों के साथ लंबे समय से जारी तनाव और सीमा विवादों ने भारत को बड़े स्तर के सैन्य अभियानों के लिए तैयारी बढ़ाने को मजबूर किया है।
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फार स्ट्रैटेजिक स्टडीज (आइआइएसएस) की एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय सुरक्षा आकलन रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सुरक्षा चिंताओं का केंद्र अब भी पाकिस्तान और चीन ही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य में होने वाला कोई भी बड़ा संघर्ष सीमित और क्षेत्रीय स्वरूप का हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद भारत अपनी सैन्य तैयारियों को लगातार आधुनिक और आक्रामक बना रहा है।
IISS ने क्या कहा?
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के साथ सीमा पार आतंकवाद और लगातार तनाव ने भारत की सैन्य सोच को प्रभावित किया है। 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट कार्रवाई और 2025 के अभियानों जैसे कदमों ने यह संकेत दिया है कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के दायरे को पहले से अधिक व्यापक मान रहा है।
आईआईएसएस ने कहा है कि इन सैन्य अभियानों से मिले अनुभवों को भारतीय सैन्य सिद्धांत में शामिल किया जा रहा है, जिससे सेना की आपरेशनल क्षमता और रणनीतिक तैयारी दोनों मजबूत हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब “न युद्ध, न शांति” जैसी स्थिति से निपटने की रणनीति पर काम कर रहा है, क्योंकि चीन और पाकिस्तान के साथ सीमाओं पर लगातार तनाव बना हुआ है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन के साथ भारत का टकराव मुख्य रूप से सीमा और सैन्य तैनाती तक सीमित रहा है, लेकिन हिंद महासागर क्षेत्र और एशिया-प्रशांत में बढ़ती चीनी सक्रियता भारत के लिए नई रणनीतिक चुनौती बनती जा रही है। इसी कारण भारत अपनी सैन्य मौजूदगी और तैयारी को लगातार विस्तार दे रहा है।
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अमेरिका-चीन टकराव से भारत की दूरी
हालांकि रिपोर्ट का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र से बाहर भारत की सैन्य भूमिका सीमित रह सकती है और वह ताइवान को लेकर अमेरिका-चीन टकराव से दूरी बनाए रखने की कोशिश करेगा।रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के सैन्य सिद्धांत अब तेजी से बदलते सुरक्षा माहौल के अनुरूप विकसित हो रहे हैं।
इससे यह संकेत मिलता है कि राजनीतिक नेतृत्व सेना की तैयारियों और संभावित संघर्षों से निपटने की क्षमता को लेकर पहले से अधिक आश्वस्त है।29 से 31 मई तक सिंगापुर में होने वाले शांगरी-ला संवाद में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों और बदलते सैन्य समीकरणों पर चर्चा होने की उम्मीद है।