क्या है इच्छामृत्यु? सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार दी मंजूरी, किन-किन देशों में है वैध; 'राइट टू डाई' की पूरी डिटेल
सर्वोच्च न्यायालय ने भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु को मंजूरी दे दी है, जिससे असाध्य रोगों से जूझ रहे मरीज जीवन-रक्षक उपचार बंद करा सकते हैं। ...और पढ़ें

क्या है निष्क्रिय इच्छामृत्यु?(फाइल फोटो)
HighLights
सर्वोच्च न्यायालय ने निष्क्रिय इच्छामृत्यु को दी मंजूरी
असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों को गरिमापूर्ण मृत्यु का अधिकार
'लिविंग विल' के तहत कृत्रिम जीवन-रक्षक उपचार से इनकार संभव
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसले में पहली बार देश में निष्क्रिय इच्छामृत्यु को मंजूरी दी है। कोर्ट का यह फैसला हरीश राणा बनाम केंद्र सरकार के मामले में आया है। इससे पहले भारत की अदालतों में इच्छामृत्यु की मांग वाले कई मामले आए लेकिन इच्छामृत्यु की इजाजत नहीं दी गई। इसके पीछे संविधान को एक अहम वजह बताया गया। आइये जानते हैं कि आखिर यह निष्क्रिय इच्छामृत्यु क्या है और पहली बार अदालत ने इसे कब मान्यता दी?
क्या है इच्छामृत्यु?
इच्छामृत्यु का मतलब है किसी असाध्य या लाइलाज बीमारी से जूझे रहे व्यक्ति व्यक्ति के जीवन को जानबूझकर समाप्त करना। इस तरह की मृत्यु को मंजूरी देने का प्राथमिक उद्देश्य यही रखा गया था कि बीमारी से पीडि़त व्यक्ति को असहनीय शारीरिक पीड़ा और कष्ट से मुक्ति मिल सके।
इच्छामृत्यु को मुख्यत: दो तरह से बांटा जाता है। एक- सक्रिय इच्छामृत्यु और दूसरी निष्क्रिय इच्छामृत्यु।
सक्रिय इच्छामृत्यु
सक्रिय इच्छामृत्यु सक्रिय इच्छामृत्यु को एक्टिव यूथेनेशिया कहते हैं। इसमें मरीज की मृत्यु को संभव बनाने के लिए सीधे तौर पर कोई सक्रिय कदम उठाया जाता है। उदाहरण के लिए मरीज को कोई घातक पदार्थ या इंजेक्शन (जैसे सोडियम पेंटोथोल) देना, जिससे व्यक्ति को कुछ ही सेकंड में गहरी नींद आ जाए और नींद में ही दर्द रहित मृत्यु हो जाए।
निष्क्रिय इच्छामृत्यु
वहीं, निष्क्रिय इच्छामृत्यु, जिसे पैसिव यूथेनेशिया कहते हैं, में मरीज के जीवन को लंबे समय तक बनाए रखने वाले जरूरी चिकित्सा उपचार को रोक दिया जाता है या हटा लिया जाता है। इसमें डॉक्टर सक्रिय रूप से मरीज को मारते नहीं हैं, बल्कि वे जीवन बचाने वाले इलाज या प्रणालियों को रोक देते हैं। उदाहरण के लिए जीवन रक्षक प्रणालियों जैसे वेंटिलेटर, कृत्रिम तौर पर जिंदा रखने की तकनीक या दवाओं को हटा लेना, ताकि मरीज प्राकृतिक रूप से मृत्यु को प्राप्त कर सके।
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पहली बार निष्क्रिय इच्छामृत्यु को दी मान्यता
2018 में सर्वोच्च न्यायालय ने गरिमा के साथ मरने के अधिकार को एक मौलिक अधिकार माना और इस अधिकार को लागू करने के लिए गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए गाइडलाइंस तय कीं। 2023 में उच्चतम न्यायालय ने इन गाइडलाइंस में बदलाव किया ताकि गरिमा के साथ मरने का अधिकार और भी आसानी से मिल सके।
क्या है संविधान का अनुच्छेद 21
एनजीओ कामन काज की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पांच जजों की संविधान पीठ ने 2018 का यह फैसला सुनाया था। तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण वाली संविधान पीठ ने यह माना कि गरिमा के साथ मरने का अधिकार, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का ही एक हिस्सा है।
न्यायालय ने कहा कि जो मरीज किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और जीवन-रक्षक उपकरणों पर निर्भर हैं, उन्हें अपना इलाज बंद करने या रुकवाने की इजाजत दी जा सकती है। लिविंग विल की वैधता को भी मंजूरी सर्वोच्च न्यायालय ने लिविंग विल की वैधता को भी मंजूरी दी।
इसका मतलब यह है कि कोई भी व्यक्ति पहले से ही लिखित निर्देश दे सकता है कि अगर भविष्य में उसे कोई ऐसी गंभीर बीमारी हो जाती है जिससे उसके ठीक होने की कोई उम्मीद न हो, तो उसे कृत्रिम जीवन-रक्षक उपचार न दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को मशीनों के सहारे बेवजह जिदा रखना उसकी गरिमा के खिलाफ हो सकता है।
इन देशों में भी वैध है इच्छामृत्यु
- नीदरलैंड ने 2001 और बेल्जियम ने 2002 में स्पष्ट नियमों और दिशा-निर्देशों के साथ सक्रिय इच्छामृत्यु को कानूनी रूप से वैध किया है।
- बेल्जियम और लक्जमबर्ग (2010) ने यह अधिकार नाबालिगों को भी दिया है।
- कनाडा ने 2016 में मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग (एमएआइडी) कार्यक्रम शुरू किया था, जिसके तहत वर्ष 2024 में 15,300 से अधिक इच्छामृत्यु के मामले सामने आए हैं।
- स्विट्जरलैंड में 1942 से ही सहायता प्राप्त आत्महत्या को कानूनी मान्यता प्राप्त है, जिसका संचालन डिग्निटास जैसी संस्थाएं करती हैं।
- अमेरिका के ओरेगन राज्य ने 1997 में ही डेथ विद डिग्निटी एक्ट लागू कर दिया था।
- 2026 की स्थिति के अनुसार, अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में यह माडल मान्य है, जबकि 40 राज्यों में इस पर सख्त प्रतिबंध है।
- जापान जीवन रक्षक प्रणालियों को हटाने यानी निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति देता है।
अन्य देश: स्पेन (2021), आस्टि्रया (2022), आस्ट्रेलिया (2017), न्यूजीलैंड (2021 में जनमत संग्रह द्वारा), कोलंबिया (2014) और इक्वाडोर (2024) में भी सहायता प्राप्त मृत्यु के विभिन्न रूपों को कानूनी अनुमति मिली हुई है। जर्मनी में 2020 से सहायता प्राप्त मृत्यु की अनुमति है।