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    भारत में कभी नहीं होगी तेल-गैस की कमी, कई देशों के साथ मिलकर बनाया सॉलिड प्लान

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 06:25 PM (IST)

    भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए तेल और गैस आयात के स्रोतों का विस्तार किया है। ...और पढ़ें

    भारत ने ऊर्जा संकट दूर करने के लिए उठाए ठोस कदम

    भारत ने ऊर्जा संकट दूर करने के लिए उठाए ठोस कदम

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत अपनी ऊर्जा क्षमता को मजबूत करने के लिए लगातार कदम बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई देशों से संपर्क किया।

    राज्यसभा में सरकार के बयान के अनुसार, भारत ने अपने एनर्जी इंपोर्ट (ऊर्जा आयात) के दायरे को काफी बढ़ा दिया है।

    अब भारत 15 देशों से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) मंगा रहा है, जबकि पहले यह संख्या छह थी। इसी तरह, कच्चे तेल के लिए भी अब 41 देशों से सप्लाई ली जा रही है, जबकि पहले यह संख्या 27 थी।

    मिडिल ईस्ट संकट के बीच सरकार का बड़ा कदम

    यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भूराजनीतिक तनाव और अहम समुद्री रास्तों पर रुकावटों की वजह से एनर्जी सप्लाई पर चिंता भी ई हुई है।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोमवार को राज्यसभा को बताया कि इस बड़े सोर्सिंग नेटवर्क का मकसद किसी एक मार्केट या शिपिंग रूट में रुकावट से भारत पर पड़ने वाले असर को कम करना था।

    डायवर्सिफिकेशन से बढ़ेगी भारत की क्षमता

    ANI की रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने एक लिखित जवाब में बताया कि, 'इस डायवर्सिफिकेशन से किसी खास देश, इलाके या ट्रांजिट रूट पर निर्भरता कम हो है और सप्लाई में रुकावट और मार्केट में उतार-चढ़ाव को संभालने की भारत की क्षमता बढ़ी है।'

    LNG सप्लायर बेस का विस्तार इस बात का संकेत है कि भारत अपनी एनर्जी खरीद को और अधिक मार्केट तक फैलाने की कोशिश कर रहा है।

    कच्चे तेल की सोर्सिंग को 41 देशों तक बढ़ाने की जानकारी पहले ही दी जा चुकी थी, जब भारत ने मिडिल ईस्ट से होने वाली एनर्जी शिपमेंट के जोखिमों का सामना किया था।

    ग्लोबल चेन पर पैनी नजर

    मंत्रालय ने कहा कि वह पब्लिक सेक्टर की तेल और गैस कंपनियों और अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर एनर्जी सप्लाई में संभावित खतरों पर नजर रख रहा है और ग्लोबल सप्लाई की स्थितियों पर नजर रखा रहा है।

    इसके जवाब में कहा गया, 'सरकार, पब्लिक सेक्टर की तेल और गैस कंपनियों और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर, लगातार ग्लोबल सप्लाई की स्थितियों का आकलन करती है। कच्चे तेल, LNG और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए सही कदम उठाती है।'

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    तेल भंडार बनाना सबसे अहम 

    बाहरी देशों से आयात में विविधता लाने के साथ-साथ, सरकार देश में कच्चा तेल जमा करने की अपनी क्षमता भी बढ़ा रही है।

    इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड अभी आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में तीन स्टोरेज फैसिलिटी चलाती है, जिनकी कुल क्षमता 5.33 मिलियन मीट्रिक टन है।

    ओडिशा के चंडीखोल और कर्नाटक के पादुर में दो कमर्शियल-कम-स्ट्रैटेजिक रिजर्व के जरिए 6.5 मिलियन टन की और क्षमता को मंजूरी दी गई है। हालांकि, ये फैसिलिटी अभी इस्तेमाल के लिए उपलब्ध नहीं हैं।

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