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कीमोथेरेपी का मिल गया ऑप्शन, भारतीय वैज्ञानिकों ने बनाई कैंसर की 'स्मार्ट' दवा RK-251; जानिए पेशेंट पर कैसे करेगी असर

Updated: Thu, 20 Aug 2026 11:12 PM (IST)

भारतीय वैज्ञानिकों ने कैंसर के इलाज के लिए 'आरके-251' नामक एक 'स्मार्ट' दवा विकसित की है, जो केवल कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती है।

भारतीय वैज्ञानिकों ने बनाई कैंसर की स्मार्ट दवा

भारतीय वैज्ञानिकों ने बनाई कैंसर की स्मार्ट दवा

HighLights

  1. भारतीय वैज्ञानिकों ने 'आरके-251' नामक स्मार्ट कैंसर दवा बनाई।

  2. यह दवा केवल कैंसर कोशिकाओं को ही निशाना बनाती है।

  3. कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों को कम करने में सहायक हो सकती है।

जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह है कि दवा कैंसर कोशिकाओं के साथ कुछ स्वस्थ कोशिकाओं को भी प्रभावित कर सकती है।

इसी समस्या को कम करने की दिशा में भारतीय विज्ञानियों ने आरके-251 नाम की एक 'स्मार्ट' दवा तैयार की है। इसे कैंसर के अधिक लक्षित और कम नुकसान वाले इलाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआती प्रयास माना जा रहा है।

भारतीय वैज्ञानिकों ने बनाई कैंसर की स्मार्ट दवा

सरकार ने इस दवा की घोषणा करते हुए बताया कि इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि शरीर में घूमते समय यह अपेक्षाकृत निष्क्रिय रहे और कैंसर कोशिकाओं के खास रासायनिक माहौल में पहुंचने पर सक्रिय हो।

खास बात ये है कि इसे कीमोथेरेपी का विकल्प भी माना जा रहा है। हालांकि, इस दवा को अभी परीक्षणों के कई दौर से गुजरना है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह शोध इंस्टीट्यूट आफ एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलाजी (आइएएसएसटी) और आइआइटी गुवाहाटी के विज्ञानियों ने किया है।

शोध का नेतृत्व आइएएसएसटी के डा. असिस बाला और आइआइटी गुवाहाटी के डा. कृष्णा पी. भाबक ने किया है। शोध के नतीजे जर्नल ऑफ मेडिसिनल केमिस्ट्री में प्रकाशित हुए हैं।

Cancer

कैंसर कोशिका में ही सक्रिय होगी दवा

आरके-251 को आसान भाषा में एक ऐसे 'मालिक्यूलर स्विच' की तरह समझा जा सकता है, जो कैंसर कोशिका के माहौल में पहुंचने के बाद सक्रिय होने के लिए तैयार किया गया है।

कई कैंसर कोशिकाओं में रिएक्टिव आक्सीजन स्पीशीज (आरओएस) का स्तर सामान्य कोशिकाओं की तुलना में ज्यादा होता है। विज्ञानियों ने इसी अंतर का फायदा उठाने की कोशिश की है।

आरओएस के संपर्क में आने पर आरके-251 से एनबीडीएचईएक्स नाम का एक्टिव कंपाउंड निकलता है। यह कैंसर कोशिकाओं में मौजूद जीएसटीपी1 जैसे प्रोटीन को निशाना बनाता है, जो कोशिका के जीवित रहने और दवा के प्रति प्रतिरोध में भूमिका निभा सकता है।

सरकार के अनुसार, इस तरह की लक्षित दवा की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि पारंपरिक उपचार में स्वस्थ ऊतकों को होने वाले नुकसान से कई दुष्प्रभाव सामने आ सकते हैं। लक्ष्य यह है कि दवा सामान्य ऊतकों में कम सक्रिय रहे और ट्यूमर वाली जगह पर ज्यादा असर करे।

शोधकर्ताओं ने आरके-251 का परीक्षण ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर की कोशिकाओं पर किया। यह ब्रेस्ट कैंसर का अपेक्षाकृत आक्रामक प्रकार है। प्रयोगशाला में दवा ने सामान्य कोशिकाओं की तुलना में कैंसर कोशिकाओं पर ज्यादा असर दिखाया।

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