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चीन के मेगा डैम के जवाब में भारत का हाइड्रो प्रोजेक्ट, सियांग घाटी में क्यों हुआ हिंसक प्रदर्शन? इनसाइड स्टोरी

Published: Sun, 25 Oct 2026 03:39 PM (IST)

अरुणाचल प्रदेश की सियांग घाटी में भारत की सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना चीन के मेगा डैम का जवाब है। हालांकि, स्थानीय जनजातियां क्यों इसका कड़ा विरोध कर रहा है।

चीन के मेगा डैम के जवाब में भारत का हाइड्रो प्रोजेक्ट को लेकर क्यों हुआ हिंसक प्रदर्शन(फोटो: रॉयटर्स)

चीन के मेगा डैम के जवाब में भारत का हाइड्रो प्रोजेक्ट को लेकर क्यों हुआ हिंसक प्रदर्शन(फोटो: रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश की सियांग घाटी के तीन जिलों में प्रस्तावित भारत की सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना को तिब्बत में चीन द्वारा बनाए जा रहे विशाल बांध के रणनीतिक जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, इस परियोजना को स्थानीय जनजातियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों को डर है कि बांध के जलाशय से उनके पैतृक गांव जलमग्न हो जाएंगे। नदी के साथ उनका सदियों पुराना सांस्कृतिक और प्राकृतिक जुड़ाव टूट जाएगा।

तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो के नाम से जानी जाने वाली सियांग नदी अरुणाचल के गेलिंग के पास भारत में प्रवेश करती है, जो असम के सादिया में दिबांग और लोहित नदियों से मिलकर ब्रह्मपुत्र का रूप लेने से पहले 294 किलोमीटर का सफर तय करती है।

क्या है बांध का दायरा?

एनएचपीसी के अनुसार, 11200 मेगावाट क्षमता की सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट सियांग पट्टी के तीन जिलों अपर सियांग, सियांग और पूर्वी सियांग में फैली होगी। इस परियोजना की परिकल्पना पहली बार 1983 में की गई थी और 2008 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया।

सितंबर में कैबिनेट द्वारा प्री-फिजिबिलिटी सर्वे कराने के फैसले के बाद से नदी किनारे बसे आदी और गालो सहित अन्य स्थानीय जनजातीय समुदायों ने इसका विरोध तेज कर दिया है।

violent protests erupt in the Siang Valley

केंद्र सरकार क्यों बनाना चाहती है यह परियोजना?

सीमा पार तिब्बत में चीन मेडोग में 60000 मेगावाट की एक मेगा डैम का निर्माण कर रहा है। अरुणाचल प्रदेश सरकार का कहना है कि SUMP परियोजना बाढ़ को नियंत्रित करने और चीनी बांध के संभावित प्रभावों को काउंटर करने के लिए बेहद जरूरी है।

इसका उद्देश्य राष्ट्रीय जल और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, सियांग-ब्रह्मपुत्र बेसिन में मौसमी बाढ़ पर लगाम लगाना और दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देना है।

अरुणाचल प्रदेश में देश की अप्रयुक्त पनबिजली क्षमता का लगभग 40% हिस्सा मौजूद है, लेकिन वर्तमान में स्थापित क्षमता केवल 2115 मेगावाट है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने 2025-2035 को पनबिजली दशक घोषित किया है।

Siang Valley protests

क्या बोले राज्य के मुख्यमंत्री?

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इस आशंका को दूर किया कि 11200 मेगावाट की यह परियोजना चीन के 60000 मेगावाट के बांध से ज्यादा पानी कैसे रोक सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी बांध की जल भंडारण क्षमता उसकी बिजली उत्पादन क्षमता पर निर्भर नहीं करती।

चीनी परियोजना की भंडारण क्षमता लगभग 5.5 अरब क्यूबिक मीटर आंकी गई है, जबकि SUMP को 9.2 BCM के लाइव स्टोरेज के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे यह कम बिजली उत्पादन के बावजूद अधिक पानी रोकने में सक्षम होगी।

मुख्यमंत्री ने समझाया कि बिजली उत्पादन पानी के गिरने की ऊंचाई पर निर्भर करता है। यारलुंग त्सांगपो के ग्रेट बेंड पर पानी के तेज और ऊंचे ढलान के कारण चीन का प्रोजेक्ट भारी मात्रा में बिजली बनाएगा, लेकिन इसका मतलब अधिक जल भंडारण नहीं है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दिबांग घाटी में प्रस्तावित एटालीन परियोजना केवल 75 लाख क्यूबिक मीटर भंडारण से 3097 मेगावाट बिजली बनाएगी, जबकि दिबांग परियोजना लगभग 4 BCM भंडारण के साथ 2880 मेगावाट बिजली बनाएगी। खांडू ने दोहराया कि सरकार जनता की चिंताओं को सुनेगी और उन्हें किसी भी हाल में बेसहारा नहीं छोड़ेगी।

India’s hydro project in response to China’s mega-dam

क्या है स्थानीय लोगों की चिंताएं?

परियोजना के खिलाफ आदी बाने केबांग-यूनाइटेड, एसयूएमपी-प्रभावित युवा संघ, सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम और आदी गालो वेलफेयर सोसाइटी जैसे कई संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

इन संगठनों का कहना है कि जलाशय बनने से उपजाऊ धान के खेत और रिहायशी इलाके डूब जाएंगे, जिससे स्थानीय जनजातियों की पारंपरिक आजीविका और खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।

किसानों के मंच का अनुमान है कि इससे 27 गांव डूब सकते हैं और 1.5 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो सकते हैं। इसके अलावा एंग्लो-अबोर युद्ध से जुड़े ऐतिहासिक स्थल केकर मोयिंग के नष्ट होने का भी खतरा है। मंच ने बिना सहमति के सर्वे कराने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय बलों की तैनाती की आलोचना की है।

पूर्व मुख्यमंत्री गेगॉन्ग अपांग ने भी परियोजना को रद करने की मांग की है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि सरकार पूरी स्पष्टता के साथ रोडमैप तैयार करेगी और प्रभावितों की हर समस्या का समाधान निकालेगी।

India’s hydro project in arunachal pradesh

क्या होता है प्री-फिजिबिलिटी सर्वे?

मुख्यमंत्री खांडू ने स्पष्ट किया कि प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट केवल परियोजना की तकनीकी व्यावहार्यता और संभावित प्रभावों का एक शुरुआती आकलन है, निर्माण कार्य शुरू करने की अनुमति नहीं।

यदि परियोजना तकनीकी रूप से व्यवहार्य पाई जाती है, तो उसके बाद सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट, पर्यावरण प्रभाव आकलन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जैसे कई कड़े चरणों से गुजरना होगा।

कई गांवों ने सर्वेक्षण कार्य के लिए सरकार के साथ समझौते भी किए हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, व्यापक और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों व जनता की भावनाओं को ध्यान में रखकर पूरी की जाएगी।

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