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    सरकार का एलपीजी सब्सिडी बिल एक लाख करोड़ के पार, बजट अनुमान से 70000 करोड़ रुपये अधिक

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 09:17 PM (IST)

    चालू वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार का एलपीजी सब्सिडी बिल एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है, जो बजट आवंटन से 70000 करोड़ करोड़ रुपये ज्यादा है। ...और पढ़ें

    एलपीजी (File Photo)

    एलपीजी (File Photo)

    HighLights

    1. एलपीजी सब्सिडी बिल ₹1 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान।

    2. बजट आवंटन से ₹70,000 करोड़ अधिक होगा यह खर्च।

    3. तेल कंपनियों को प्रति सिलेंडर ₹490 का नुकसान हो रहा।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष (2026-27) में सरकार का एलपीजी सब्सिडी बिल एक लाख करोड़ से ज्यादा रह सकता है। यह केंद्रीय बजट में तय 30 हजार करोड़ रुपये के आवंटन से लगभग 70 हजार करोड़ रुपये ज्यादा होगा।

    इसकी वजह यह है कि ईंधन और एलपीजी की कीमतों में वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा सरकार और तेल कंपनियां खुद वहन कर रही हैं। पीएल कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार अभी तेल कंपनियों को प्रति सिलेंडर 490 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    क्या कहती है रिपोर्ट?

    रिपोर्ट के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में कुल सब्सिडी खर्च में भारी वृद्धि हुई। अप्रैल-मई, 2026 के दौरान मुख्य सब्सिडी पर कुल खर्च 755.40 अरब रुपये रहा जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 512.50 अरब रुपये था। यानी इसमें साल-दर-साल 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। खाद्य सब्सिडी 279.90 अरब रुपये से बढ़कर 408 अरब रुपये हो गई, जो साल-दर-साल 46 प्रतिशत की वृद्धि है।

    पोषक तत्व आधारित उर्वरक सब्सिडी 43.1 अरब रुपये से बढ़कर 60.10 अरब रुपये हो गई। इस अवधि में पिछले साल पेट्रोलियम सब्सिडी 280 करोड़ रुपये रही जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह शून्य थी। रिपोर्ट के अनुसार, सब्सिडी पर ज्यादा खर्च की वजह युद्ध जैसी स्थिति से पैदा हुई अनिश्चितता है, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

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    पीएल कैपिटल का अनुमान क्या?

    पीएल कैपिटल का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में सरकार पूंजीगत खर्च को लेकर सावधानी बरतेगी, क्योंकि वह ज्यादा कर्ज लेने के बजाय राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखने को प्राथमिकता दे सकती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मई, 2026 तक पूंजीगत खर्च सालाना आधार पर 13 प्रतिशत बढ़कर 2.5 लाख करोड़ रुपये था।