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    ईरान संकट के बीच क्या भारत में पेट्रोल-डीजल का पैदा हो जाएगा संकट, कितना बचा है तेल भंडार?

    Updated: Sun, 01 Mar 2026 10:31 PM (IST)

    होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने पर भारत को तत्काल कच्चे तेल की आपूर्ति में बड़ी बाधा नहीं आएगी। भारत के पास 10-15 दिन का कच्चा तेल भंडार है। ...और पढ़ें

    भारत में पेट्रोल-डीजल का पैदा हो जाएगा संकट(फाइल फोटो)

    भारत में पेट्रोल-डीजल का पैदा हो जाएगा संकट(फाइल फोटो)

    HighLights

    1. भारत के पास 10-15 दिन का कच्चा तेल भंडार मौजूद

    2. रिफाइनरियों में 7-10 दिन का अतिरिक्त ईंधन उपलब्ध

    3. लंबे संकट में रूस से तेल आयात विकल्प

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) जैसे कच्चे तेल के प्रमुख आपूर्ति मार्ग के बंद होने से भारत को निकट भविष्य में कच्चे तेल की आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान का सामना करना नहीं पड़ेगा।

    अधिकारियों के मुताबिक, भारत के पास कच्चे तेल का भंडार कम से कम 10 दिन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। हालांकि, अगर होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो देश रूसी तेल की खरीद बढ़ाकर अपने आयात स्रोतों में बदलाव कर सकता है।

    होर्मुज स्ट्रेट का महत्व

    यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा निकासी बिंदुओं में से एक है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। अधिकारियों ने कहा कि कम अवधि के लिए इसके बंद होने से भारत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि उसके पास ईंधन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति है।

    हालांकि, इसका तत्काल प्रभाव तेल की कीमतों पर दिखाई पड़ रहा है। ब्रेंट क्रूड इस सप्ताह सात महीने के उच्चस्तर लगभग 73 डालर प्रति बैरल पर बंद हुआ। यदि आपूर्ति बाधित होती है, तो कीमतें 80 डालर प्रति बैरल की ओर बढ़ सकती हैं।

    भारत के पास 10 से 15 दिन का कच्चा तेल भंडार

    एक अधिकारी ने कहा, 'भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के पास टैंक और पारगमन में मिलाकर 10 से 15 दिन का कच्चा तेल भंडार है। इसके अलावा, उनके ईंधन टैंक भरे हुए हैं, जो देश की 7-10 दिन की ईंधन जरूरत को आसानी से पूरा कर सकते हैं।'

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    एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भारत वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीका जैसे दूरदराज के देशों से भी तेल खरीद सकता है। हालांकि, बंदी के लंबे समय तक खिंचने से एलएनजी आपूर्ति की स्थिति खराब हो सकती है, क्योंकि भारत के पास ज्यादा विकल्प नहीं होंगे। एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि कच्चे तेल के उलट एलएनजी के कांट्रैक्ट लंबे समय के लिए नहीं है और हाजिर या मौजूदा बाजार में इसकी उपलब्धता सीमित है।

    (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)