भारत-ईरान के बीच अगले हफ्ते होगी बातचीत, BRICS ऊर्जा समिट में तेल खरीद पर होगी चर्चा
भारत ईरान के साथ अपने ऊर्जा संबंधों को मजबूत कर रहा है, जिसके तहत ईरान के पेट्रोलियम मंत्री अगले हफ्ते गुरुग्राम में ब्रिक्स ऊर्जा सम्मेलन में भाग लें ...और पढ़ें

भारत-ईरान के बीच अगले हफ्ते तेल खरीद पर होगी चर्चा
HighLights
ईरान के पेट्रोलियम मंत्री ब्रिक्स ऊर्जा सम्मेलन में भाग लेने गुरुग्राम आ रहे हैं।
भारत और ईरान के बीच तेल व गैस खरीद पर द्विपक्षीय वार्ता होगी।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध हटने के बाद भारत ईरान से तेल खरीदेगा।
जयप्रकाश रंजन, जागरण। पश्चिम एशिया में शांति स्थापित होने को लेकर बन रही उम्मीदों के बीच भारत ने ईरान के साथ अपने पारंपरिक ऊर्जा संबंधों को मजबूती देने पर आगे बढ़ रहा है।
ईरान की तरफ संकेत है कि वह नये माहौल में भारत के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ाने को तत्पर है। यही वजह है कि अगले हफ्ते ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन (गुरुग्राम) के लिए ईरान ने अपने पेट्रोलियम मंत्री मोहसिन पाकेनजाद के नेतृत्व में एक बड़ा दल भेज रहा है। इसमें ईरान सरकार में उप-ऊर्जा मंत्री व कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।
भारत-ईरान के बीच होगी बातचीत
ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसिन पाकेनजाद की भारत के पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर से अलग से द्विपीय मुलाकात होने वाली है जिसमें दोनों देशों के बीच तेल व गैस खरीद के अलावा ऊर्जा से जुडे़ अन्य मुद्दों पर विमर्श होने की संभावना है।
माना जा रहा है कि ईरान की सरकार पश्चिमएशिया संघर्ष की समाप्ति के बाद जल्द से जल्द अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल व गैस की खुल कर बिक्री करने की तैयारी में है। अभी उसका सबसे बड़ा खरीदार देश चीन है।
अमेरिकी प्रतिबंध की वजह से भारत ईरान से तेल खरीदना बंद कर चुका है। दूसरी तरफ वैश्विक स्तर पर भारत चीन के बाद तेल व गैस का दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा खरीददार देश है।
ईरान से तेल खरीदेगा भारत
माना जा रहा है कि क्रूड की खरीद में भारत चीन को भी पीछे छोड़ देगा। यूरोप, जापान जैसे अन्य क्रूड खरीदार देशों में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ने से क्रूड की खरीद कम होने वाली है। ऐसे में ईरान के लिए भारत एक प्रमुख तेल क्रेता देश होगा।
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भारत दशकों तक ईरान से भारी मात्रा में तेल खरीदता रहा है। भारत की कई रिफाइनरियों को ईरान के तेल के लिए बेहद उपयुक्त भी माना जाता रहा है। अब दोनों तरफ से सिर्फ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध के समाप्त होने का इंतजार है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि 25-26 जून 2026 को गुरुग्राम में ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की होने वाली बैठक वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र की स्थिति को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण होगी। इसमें ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा तक सभी देशों की पहुंच (खरीद) और ऊर्जा क्षेत्र में समानता जैसे विषयों पर गहन विमर्श होगा।
यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब दुनिया भर के देश ऊर्जा सुरक्षा, किफायती मूल्य और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही जलवायु परिवर्तन, तकनीकी बदलाव और बढ़ती ऊर्जा मांग की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
भारत ब्रिक्स संगठन के ऊर्जा एजेंडा को काफी महत्व देता है क्योंकि इसके तीन प्रमुख देश (रूस, ईरान व यूएई) भारत के सबसे बड़े ऊर्जा सहयोगी देश रहे हैं।
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