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'अपनी मां के पैर छुओ और पापों के लिए माफी मांगो', मां-बाप के मकान पर कब्जा करने वाले बेटे को SC की फटकार

Published: Wed, 09 Sep 2026 03:09 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने मां-बेटे के संपत्ति विवाद में बेटे को अपनी मां से माफी मांगने को कहा। जस्टिस सतीश चंद्र ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने बेटे को याद दिलाई मां की अहमियत। (फाइल फोटो।)

सुप्रीम कोर्ट ने बेटे को याद दिलाई मां की अहमियत। (फाइल फोटो।)

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने बेटे को मां से माफी मांगने का आदेश दिया।

  2. जस्टिस शर्मा ने बेटे को मां के महत्व की याद दिलाई।

  3. सुप्रीम कोर्ट ने माता-पिता के पक्ष में निचली अदालतों का फैसला रखा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मां और बेटे के बीच प्रॉपर्टी के एक विवाद में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने बेटे को हिंदू धर्म में मां के महत्व की याद दिलाई। उन्होंने बेटे से मौखिक रूप से कहा कि वह अपनी मां से माफी मांगे।

इस मामले में मां और उनके पति ही प्रॉपर्टी के मालिक हैं। उन्होंने प्यार और स्नेह के कारण बेटे और बहू को बिना किसी किराए के लाइसेंस-धारक के तौर पर पहली मंजिल पर रहने की इजाजत दी थी। आरोप है कि बेटे और बहू ने माता-पिता को परेशान करना शुरू कर दिया और विवाद वाली प्रॉपर्टी अपने नाम करवाने के लिए उन पर दबाव डाला। ट्रायल कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट ने माता-पिता के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके खिलाफ बेटे ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

'अपने किए गए पापों के लिए मां से माफी मांगो'

इस मामले की सुनवाई जस्टिस शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने की। मामले को खारिज करते हुए जस्टिस शर्मा ने मौखिक रूप से कहा, "आपको जाकर अपनी मां के पैर छूने चाहिए और माफी मांगनी चाहिए। अपने सभी पापों के लिए माफी मांगें।"

इसके बाद जस्टिस शर्मा ने कोर्ट में मौजूद वकीलों से कहा, "...क्या बेटे का ऐसा करना गलत नहीं है? हम बेटे से कह रहे हैं कि वह मां के पास वापस जाए, उन्हें छुए, उनकी भावना को समझे, माफी मांगे और उनका आशीर्वाद ले।"

माता-पिता ने तोड़े बेटे से सभी रिश्ते

माता-पिता का आरोप था कि बेटे और उसकी पत्नी ने नकली कागजात के आधार पर मालिकाना हक का दावा किया। इसे देखते हुए माता-पिता ने अखबार में एक सार्वजनिक सूचना जारी करके उनसे सभी रिश्ते तोड़ लिए।

उन्होंने बेटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई और बेटे व उसकी पत्नी को नोटिस भेजकर उनका लाइसेंस रद कर दिया। साथ ही उन्हें प्रॉपर्टी खाली करने का निर्देश दिया। इसके बाद माता-पिता ने कब्जा पाने, स्थायी रोक और नुकसान की भरपाई के लिए मुकदमा दायर किया।

ट्रायल कोर्ट ने माना कि माता-पिता ही उस प्रॉपर्टी के एकमात्र मालिक थे और बेटा और उसकी पत्नी सिर्फ लाइसेंसी थे, जिनका लाइसेंस सही तरीके से रद कर दिया गया है। इसलिए उन्हें प्रॉपर्टी की पहली मंजिल का कब्जा छोड़ना होगा। दिल्ली हाई कोर्ट ने 17 अप्रैल को इस आदेश को बरकरार रखा। इसके खिलाफ बेटे ने स्पेशल लीव पिटिशन दायर की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

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