जले नोट मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे आरोप साबित, बार एशोशियन अध्यक्ष ने महाभियोग लगाने की मांग तेज की
दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास से जले हुए नोट मिलने के मामले में संसदीय जांच समिति ने सभी आरोप सही पाए हैं। ...और पढ़ें

दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा।
HighLights
पूर्व न्यायाधीश वर्मा के आवास से जले नोट मिले।
संसदीय जांच समिति ने सभी आरोप सही पाए।
विकास सिंह ने महाभियोग प्रक्रिया की मांग की।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास के स्टोररूम से जले हुए नोट मिलने के मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है।
तीन सदस्यीय संसदीय जांच समिति द्वारा सभी तीन आरोपों को सही ठहराए जाने के बाद, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने गुरुवार को कहा कि इस मामले में महाभियोग की कार्यवाही को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए।
उनका तर्क है कि यदि ऐसे गंभीर कदाचार के दोषी पाए गए न्यायाधीश को इस्तीफा देकर सेवानिवृत्ति के बाद के लाभ और पेंशन प्राप्त करने की अनुमति दी जाती है, तो यह न्याय का उपहास होगा।
सभी आरोप साबित और समिति की रिपोर्ट
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित इस तीन सदस्यीय जांच समिति में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, बांबे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य शामिल थे।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि आधिकारिक परिसर में बड़ी मात्रा में 500 रुपये के नोटों की मौजूदगी, भौतिक साक्ष्य को ठीक से संरक्षित करने में विफलता, और न्यायमूर्ति वर्मा द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण भ्रामक व अधूरे पाए गए।
विकास सिंह ने जोर देकर कहा कि चूंकि राष्ट्रपति द्वारा उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है, इसलिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान कराया जा सकता है ताकि वे किसी भी प्रकार की पेंशन के हकदार न रहें।