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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 02, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Kerala News: केरल सरकार ने विधेयकों के संबंध में किया SC का रुख, कहा-राज्यपाल नहीं कर रहे हैं कर्तव्यों का निर्वहन

    By AgencyEdited By: Babli Kumari
    Updated: Thu, 02 Nov 2023 02:38 PM (IST)

    Kerala News केरल सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने राज्य विधानमंडल द्वारा पारित कुछ विधेयकों पर हस्ताक्षर नहीं करने के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान की ...और पढ़ें

    केरल सरकार ने राज्य के राज्यपाल के खिलाफ की शिकायत (फाइल फोटो)
    केरल सरकार ने राज्य के राज्यपाल के खिलाफ की शिकायत (फाइल फोटो)

    पीटीआई, तिरुवनंतपुरम। केरल सरकार ने राज्य के राज्यपाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में शिकायत की है। सरकार ने कहा कि राज्यपाल अपने संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर रहे थे इसलिए हमने उच्चतम न्यायालय का रुख किया है।

    राज्य के कानून मंत्री पी राजीव ने कहा कि राज्य विधानमंडल ने काफी विचार-विमर्श के बाद और नियमों के अनुसार विधेयक पारित किए और इसलिए, उन्हें अनिश्चित काल तक रोकना "असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक" था।

    कुछ विधेयकों के संबंध में खान द्वारा प्रावधान का नहीं हुआ पालन 

    कानून मंत्री पी राजीव ने कहा, ''जैसे ही कोई विधेयक पारित होता है तो राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 200 के प्रावधानों के अनुसार कार्य करना होता है।'' उन्होंने आगे कहा कि कुछ विधेयकों के संबंध में खान द्वारा प्रावधान का पालन नहीं किया गया है। खान ने जिन विधेयकों पर सहमति रोक रखी है उनमें लोकायुक्त संशोधन विधेयक और दो अलग-अलग विश्वविद्यालय कानून संशोधन विधेयक शामिल हैं।

    कानून मंत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि विधायिका द्वारा पारित विधेयकों को अनिश्चित काल तक नहीं रोका जाना चाहिए और उन पर "जितनी जल्दी हो सके" निर्णय लिया जाना चाहिए।

    राज्यपाल ने दो वर्षों से कुछ विधेयकों पर रोकी सहमति 

    उन्होंने आगे कहा कि हालांकि, राज्यपाल ने लगभग दो वर्षों से कुछ विधेयकों पर सहमति रोक रखी है। मंत्री ने कहा कि राज्यपाल अपनी चिंताओं को बताते हुए विधेयकों को वापस विधानसभा को भेज सकते थे और विधानसभा यह निर्णय लेती कि उनमें संशोधन करना है या बिना किसी संशोधन के उन्हें फिर से पारित करना है।

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