एयरलाइंस के सामने नया संकट! कुछ देशों में कानूनी तौर पर उपलब्ध मारिजुआना ने बढ़ाई परेशानी, क्या है समाधान?
थाईलैंड और एम्स्टर्डम जैसे देशों में गांजा की कानूनी उपलब्धता एयरलाइंस के लिए चुनौती बन गई है, क्योंकि क्रू सदस्यों में नशीले पदार्थों के सेवन का पता ...और पढ़ें


समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। थाईलैंड और एम्स्टर्डम जैसी जगहों पर चिकित्सा या मनोरंजन के लिए मारिजुआना यानी गांजा की कानूनी उपलब्धता ने वहां उड़ान भरने वाली एयरलाइंस के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
इसका सबसे बड़ा कारण क्रू मेंबर नशे में है या नहीं, यह जांचने वाले साधारण ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट के उल्टा, साइकोएक्टिव यानी नशीले और मनोविकार पैदा करने वाले पदार्थों के सेवन का पता लगाना काफी मुश्किल होता है।
कई एयरलाइंस के अधिकारियों का कहना है कि फ्लाइट क्रू को सेवन से रोकने का एकमात्र तरीका रैंडम डोप टेस्टिंग को बढ़ाना है, क्योंकि ये पदार्थ आमतौर पर शराब की तुलना में शरीर में बहुत अधिक समय तक मौजूद रहते हैं।
उड़ान सुरक्षा पर मंडराता खतरा
विश्व स्तर पर एयरलाइंस की इस चिंता का मुख्य कारण उड़ान सुरक्षा से जुड़ा है। इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, किसी भी साइकोएक्टिव पदार्थ के प्रभाव में उड़ान का संचालन करने से पायलट जैसे लाइसेंस प्राप्त कर्मचारी सुरक्षित और उचित रूप से अपनी ड्यूटी निभाने में असमर्थ हो सकते हैं।
शायद इसका सबसे कुख्यात मामला एक अमेरिकी एयरलाइन के ऑफ-ड्यूटी पायलट का था। वह फ्लाइट डेक में जंप सीट पर यात्रा कर रहा था और उसने बीच हवा में ही विमान के इंजन को बंद करने की कोशिश की थी। कथित तौर पर इस ऑफ-ड्यूटी पायलट ने घटना से दो दिन पहले साइकेडेलिक मशरूम लिया था और वह पिछले 48 घंटों से सोया नहीं था।
ड्रग्स सेवन की टेस्टिंग एक बड़ी चुनौती
वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि विश्व स्तर पर एक चुनौती है। अक्सर डोप परीक्षण के परिणाम निर्णायक नहीं होते हैं, खासकर तब जब किसी दवा के सेवन के कारण शरीर में साइकोएक्टिव पदार्थों का पता चलता है। हालांकि, हाल ही में किया गया ड्रग्स का सेवन टेस्ट में जरूर सामने आ जाता है।
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साइकोएक्टिव पदार्थों के सेवन के लिए विमानन कर्मियों के परीक्षण की प्रक्रिया पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के नियम कहते हैं कि यदि पुष्टिकरण परीक्षण पॉजिटिव पाया जाता है, तो संबंधित संगठन के चिकित्सा प्रभारी एक मेडिकल रिव्यू ऑफिसर से परामर्श करेंगे।
यह निर्धारित करने के लिए किया जाएगा कि क्या यह परिणाम किसी वैध चिकित्सीय उपचार या किसी अन्य हानिरहित स्रोत के कारण आया है। उदाहरण के लिए, कोडीन युक्त दर्द निवारक दवा ओपिएट्स के लिए पॉजिटिव परिणाम दे सकती है।
क्या रैंडम टेस्टिंग ही है एकमात्र समाधान?
भारत और विदेशों में एयरलाइंस जागरूकता पैदा करने की कोशिश करती हैं और कर्मचारियों को गुमनाम रूप से अपनी लत की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं ताकि उसका समाधान किया जा सके।
लेकिन अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर लोग अपनी लत की रिपोर्ट करने से बचते हैं, इसलिए यह योजना जमीनी स्तर पर विफल ही रहती है। भारत में एयरलाइंस का संचालन देखने वाले अधिकारियों का कहना है कि यहां मुख्य जोर स्व-रिपोर्टिंग और नशा मुक्ति पर है।
अधिकारियों ने कहा कि लेकिन साइकोएक्टिव पदार्थों की आसान पहुंच को देखते हुए, हमें इसके परिणामों को थोड़ा और सख्त बनाने और कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। हमें रैंडम टेस्टिंग को बढ़ाना होगा, यही एकमात्र रास्ता है।
वर्तमान DGCA नियमों के तहत, सभी निर्धारित वाणिज्यिक एयरलाइंस और हवाई नेविगेशन सेवा प्रदाताओं को हर साल अपने कम से कम 10% फ्लाइट क्रू सदस्यों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स का ड्रग टेस्ट करना अनिवार्य है।