पुरुषों में वाई क्रोमोसोम के घटने से बढ़ने लगता है बीमारियों का खतरा, धूम्रपान और प्रदूषण हैं मुख्य कारण
पुरुषों में उम्र बढ़ने के साथ वाई क्रोमोसोम का घटना आम है, जिससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। पहले इसे कम महत्वपूर्ण माना जाता था, लेकिन अब ...और पढ़ें

पुरुषों में वाई क्रोमोसोम के घटने से बढ़ने लगता है बीमारियों का खतरा (फाइल फोटो)
HighLights
वाई क्रोमोसोम का घटना पुरुषों में बीमारियों का खतरा बढ़ाता है।
धूम्रपान और उम्र बढ़ना वाई क्रोमोसोम क्षय के मुख्य कारण।
हृदय रोग, कैंसर, अल्जाइमर से जुड़ा वाई क्रोमोसोम नुकसान।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों की कोशिकाओं से वाई क्रोमोसोम कम होने लगते हैं। पहले इन क्रोमोसोम्स के गायब होने को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था, क्योंकि इनमें जीन अपेक्षाकृत कम होते हैं।
लेकिन हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों ने संकेत दिए हैं कि वाई क्रोमोसोम का घटना पुरुषों के समग्र स्वास्थ्य और आयु पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। बता दें कि वाई क्रोमोसोम पुरुषों में ही पाए जाते हैं, जिन्हें अब तक मुख्यत: लिंग निर्धारण और शुक्राणु निर्माण के लिए ही जरूरी माना जाता था।
नई जीन पहचान तकनीकों से पता चला है कि बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों के शरीर के कई ऊतकों में वाई क्रोमोसोम का नुकसान आम हो जाता है। आंकड़ों के अनुसार लगभग 60 वर्ष की उम्र के 40 प्रतिशत पुरुषों और 90 वर्ष की उम्र के 57 प्रतिशत पुरुषों की कुछ कोशिकाओं में वाई क्रोमोसोम नहीं पाया जाता। धूम्रपान और कैंसरकारी रसायनों के संपर्क जैसे कारक भी इस प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं।
गंभीर बीमारियों से रक्षा कवच है वाई क्रोमोसोम
वैज्ञानिकों ने पाया है कि वाई क्रोमोसोम का नुकसान सभी कोशिकाओं में नहीं, बल्कि कुछ कोशिकाओं में होता है, जिससे शरीर में कुछ कोशिकाएं वाई के साथ और कुछ बिना वाई के रह जाती हैं। प्रयोगशाला अध्ययनों में वाई-रहित कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं की तुलना में तेजी से बढ़ती देखी गई हैं, जो ट्यूमर बनने की संभावना से भी जुड़ सकती हैं।
हालांकि वाई क्रोमोसोम में केवल लगभग 50 प्रोटीन-कोडिंग जीन होते हैं और इसे लंबे समय तक केवल लिंग निर्धारण व शुक्राणु निर्माण से जुड़ा माना गया, परंतु अब शोध यह संकेत दे रहे हैं कि इसके कई जीन शरीर की अन्य कोशिकाओं में भी सक्रिय रहते हैं और जीन नियंत्रण तथा कैंसर-रोधी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं।
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क्रोमोसोम कम, यानी बीमारी का खतरा ज्यादा
विभिन्न अध्ययनों में वाई क्रोमोसोम के क्षय को हृदय रोग, किडनी की बीमारियों, अल्जाइमर, कैंसर और यहां तक कि कोविड-19 से मृत्यु दर में वृद्धि से भी जोड़ा गया है। एक बड़े यूरोपीय अध्ययन में 60 वर्ष से अधिक उम्र के जिन पुरुषों में वाई क्रोमोसोम का नुकसान अधिक पाया गया, उनमें हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा देखा गया। हालांकि वैज्ञानिक अब भी यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि वाई क्रोमोसोम का क्षय सीधे बीमारी का कारण बनता है या यह केवल अन्य जैविक प्रक्रियाओं का परिणाम है।
फिर भी पशु प्रयोगों और आनुवंशिक अध्ययनों से यह संकेत मिलता है कि वाई क्रोमोसोम शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली, रक्त कोशिकाओं के निर्माण और हृदय क्रिया को प्रभावित कर सकता है। विशेष जीन टे¨स्टग से चलता है पता वाई क्रोमोसोम की जांच साधारण ब्लड टेस्ट या सामान्य हेल्थ चेक-अप से नहीं हो सकती।
इसके लिए विशेष आनुवंशिक टेस्ट कराना पड़ता है, जो उन्नत लैब में होते हैं। खून या लार से डीएनए निकालकर वाई क्रोमोसोम के खास जीन (जैसे एसआरवाई) की मौजूदगी या कमी देखी जाती है। बड़े मल्टी-स्पेशियलिटी हास्पिटल जिनमें मालिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स या साइटोजेनेटिक्स विभाग हो या मान्यता प्राप्त प्राइवेट जेनेटिक/डीएनए टे¨स्टग लैब्स में ये जांच हो सकती है।