महाराष्ट्र: 'सोते समय भी नजर आता है शिवसेना पार्षद', पीड़ित डॉक्टर के वकील का दावा; बोले- अब भी सदमें में
महाराष्ट्र के डोंबिवली में एक नगरपालिका अस्पताल में हुए हमले के शिकार डॉक्टर वैभव सालुंखे घटना के एक महीने बाद भी गहरे सदमे और मानसिक तनाव में हैं। ...और पढ़ें

महाराष्ट्र के डोंबिवली अस्पताल हमला मामला।
HighLights
डॉक्टर वैभव सालुंखे हमले के बाद से गहरे सदमे में हैं।
उन्हें 95 से अधिक अज्ञात कॉल्स से डर और बढ़ा है।
रमेश म्हात्रे को बॉम्बे हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिली।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र के डोंबिवली स्थित एक नगरपालिका अस्पताल में हुए हमले और मारपीट का शिकार हुए डॉक्टर अब भी भारी डर और मानसिक तनाव के साये में जी रहे हैं। घटना को एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन डॉक्टर अभी तक उस शहर में वापस नहीं लौटे हैं जहां वे काम करते थे। यह जानकारी डॉक्टर के वकील ने एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू के दौरान दी।
डॉ. वैभव सालुंखे का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील अजिंक्य अडसुल ने बताया कि उनके मुक्किल 6 जुलाई की घटना के बाद से गहरे सदमे में हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा शिवसेना के नगरसेवक रमेश म्हात्रे और अन्य आरोपियों को जमानत दिए जाने के बाद भी डॉक्टर की चिंताएं कम नहीं हुई हैं।
डॉक्टर अभी भी सदमें में
वकील ने कहा कि घटना के दिन से ही मेरा मुक्किल सदमे में है। उन्होंने आगे बताया कि डॉक्टर को 95 से ज्यादा अज्ञात कॉल्स आए, जिससे उनका डर और तनाव और ज्यादा बढ़ गया। इस घटना के बाद डॉक्टर को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हो रही हैं।
गृह नगर लौटे डॉक्टर, सामान भी नहीं ला पाए
बता दें कि घटना के तुरंत बाद डॉक्टर कल्याण छोड़कर अपने गृह नगर वाशिम चले गए थे और वे अभी भी वहीं हैं। वे कल्याण स्थित अपने पीजी में अपना सामान उठाने तक के लिए वापस नहीं गए। हाल ही में, दो दिन पहले डॉक्टर केवल पुलिस अधिकारियों के सामने अपना बयान दर्ज कराने और आरोपियों की पहचान करने के लिए कल्याण आए थे।
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आरोपी का वह वाक्य आज भी डराता है
वकील अडसुल के मुताबिक, हमले के दौरान बोली गई एक बात ने डॉक्टर के मन में गहरा डर बैठा दिया है। आरोप है कि हिंसा के दौरान रमेश म्हात्रे ने डॉ. सालुंखे की तरफ इशारा करते हुए अपने समर्थकों से कहा था कि इसका चेहरा देखकर रखो, इसको बाद में देखेंगे।
वकील ने बताया कि सोते वक्त भी उन्हें रमेश म्हात्रे के सपने आते हैं। मेरा मुक्किल इस हद तक तनाव से गुजर रहा है। उनकी एकमात्र मांग सुरक्षित रूप से जीने की है। उनके परिवार में केवल उनकी मां हैं, उनके पिता नहीं हैं। उनके पास और कोई सहारा नहीं है।
कोर्ट ने आरोपी को दी शर्त पर जमानत
दूसरी ओर, बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में रमेश म्हात्रे और अन्य आरोपियों को जमानत दे दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि सुनवाई चलने तक म्हात्रे महाराष्ट्र से बाहर रहेंगे। उन्हें उत्तरी गोवा के बागा-कलंगुट इलाके में स्थित 'नाजरा रिसॉर्ट एंड लॉंस' में रहने का निर्देश दिया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार जमानत की शर्तों के तहत म्हात्रे को गोवा के उस रिसॉर्ट में ही रहना होगा। हफ्ते में तीन बार स्थानीय पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगानी होगी। अपना पासपोर्ट सरेंडर करना होगा और मामले से जुड़े गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करनी होगी।