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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 28, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Manipur violence: 'सात दिनों में होना चाहिए अंतिम संस्कार', लावारिस शवों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

    By AgencyEdited By: Shalini Kumari
    Updated: Tue, 28 Nov 2023 04:54 PM (IST)

    मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया कि जिन शवों की पहचान की गई है और दावा किया गया है उनके परिजनों को बिना किसी हस्तक् ...और पढ़ें

    शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए नौ जगहों को किया सुनिश्चित
    शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए नौ जगहों को किया सुनिश्चित

    HighLights

    1. शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए नौ जगहों को किया सुनिश्चित
    2. प्रशासन को कानून व्यवस्था बनाने के खास निर्देश

    पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मणिपुर हिंसा में मारे गए लोगों के दफनाने और दाह संस्कार सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए। पैनल द्वारा पेश रिपोर्ट में कहा गया है कि 175 शवों में से 169 की पहचान कर ली गई है, जबकि छह की पहचान अब भी बाकी है।

    न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) शालिनी पी जोशी और आशा मेनन भी शामिल हैं।

    175 में 169 शवों की पहचान

    मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली पूर्व उच्च न्यायालय न्यायाधीशों की सर्व-महिला समिति द्वारा दायर एक रिपोर्ट ने मुर्दाघरों में पड़े शवों की स्थिति का संकेत दिया है।

    पीठ में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि 175 शवों में से 169 की पहचान कर ली गई है, जबकि छह की पहचान अब भी बाकी है।

    मात्र 81 शवों के परिवार ने किया दावा

    रिपोर्ट में कहा गया है कि पहचाने गए 169 शवों में से 81 पर उनके परिजनों ने दावा किया है, जबकि 88 के परिवार की ओर से कोई नहीं आया है। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने नौ स्थलों की पहचान की है, जहां दफन या दाह संस्कार किया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है, "इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि मणिपुर राज्य में मई 2023 में हिंसा हुई थी, जिन शवों की पहचान नहीं हुई है या जिन पर दावा नहीं किया गया है, उन्हें मुर्दाघर में लंबे समय तक रखना सही है या नहीं।"

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    मंगलवार को सुनवाई के दौरान, पीठ ने निर्देश दिया कि परिवार के सदस्यों द्वारा पहचाने गए और दावा किए गए शवों का अंतिम संस्कार किसी भी अन्य पक्ष की बाधा के बिना किसी भी स्थान पर किया जा सकता है।

    नौ जगहों को दाह संस्कार के लिए चुना

    कोर्ट ने कहा कि जिन शवों के परिजनों ने पहचान कर ली है, उन्हें अंतिम संस्कार की जगहों के बारे में सूचित करेंगे। पीठ ने कहा कि यह प्रक्रिया चार दिसंबर या उससे पहले पूरी की जानी चाहिए। परिजनों को निर्देश दिया गया है कि उन्हें निर्धारित नौ दाह संस्कार स्थलों में से किसी एक पर एक सप्ताह के अंदर ही धार्मिक अनुष्ठानों के साथ अंतिम संस्कार करने की अनुमति है।

    कानून व्यवस्था बनाए रखने के खास निर्देश

    इसमें कहा गया है कि कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी उचित कदम उठाने के लिए स्वतंत्र होंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दफन या दाह संस्कार व्यवस्थित तरीके से हो। शीर्ष अदालत ने कहा, "यदि शव परीक्षण के समय डीएनए नमूने नहीं लिए गए हैं, तो राज्य दफन/दाह संस्कार की प्रक्रिया से पहले ऐसे नमूने लेना सुनिश्चित करेगा।"

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    अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने को लेकर हुई हिंसा

    मई में उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद मणिपुर में अराजकता और अनियंत्रित हिंसा भड़क उठी, जिसमें राज्य सरकार को गैर-आदिवासी मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था।

    3 मई को राज्य में पहली बार जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 170 से अधिक लोग मारे गए हैं और कई सौ अन्य घायल हुए हैं, जब बहुसंख्यक मैतेई समुदाय की एसटी दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' आयोजित किया गया था।

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