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    मेटा ने कुबूला, व्यापक पैमाने पर अवैध कंटेंट प्रमोशन के लिए मिला पैसा

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 07:22 PM (IST)

    मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने डीपफेक और सामग्री संबंधी गड़बड़ियों के लिए सरकार से माफी मांगी है। उन्होंने इन मुद्दों पर कंपनी की जिम्मेदारी स्वीकार क ...और पढ़ें

    HighLights

    1. मार्क जुकरबर्ग ने डीपफेक और सामग्री गड़बड़ियों पर माफी मांगी।

    2. मेटा सीईओ ने सरकार के समक्ष अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की।

    3. सोशल मीडिया पर गलत सूचना के प्रसार पर चिंता व्यक्त की।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम एवं फेसबुक की मूल कंपनी मेटा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट को कुछ समय के लिए हटाने के साथ-साथ बच्चों के यौन शोषण वाले कंटेंट, डीपफेक और बहुत सारा पैसा लेकर कुछ खास कंटेंट को बढ़ावा देने जैसी खामियों के लिए माफी मांग ली है।

    मेटा ने माना कि बहुत सारा गैरकानूनी कंटेंट प्रमोट किया गया और खास ऑडियंस के लिए पेड प्रमोशन किए गए। मेटा के वैश्विक मामलों के प्रमुख जोएल कपलान ने लिखित बयान में कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट हटाने के लिए माफी मांग ली है। लेकिन सरकारी सूत्रों ने बताया कि माफीनामा कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्क की ओर से आया है।

    भारतीय अधिकारियों के साथ बैठक के लिए जोएल कपलान अमेरिका से आए थे। 2011 में मेटा में शामिल होने से पहले उन्होंने जार्ज डब्ल्यू बुश के प्रशासन में काम किया था। उन्हें भारत सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी की 23 जुलाई की फेसबुक पोस्ट को कुछ समय के लिए हटाने के बारे में स्पष्टीकरण देने बुलाया था।

    भारत आने के बाद पहले उन्होंने आईटी सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की और उसके बाद सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ बैठक की। बैठक के बाद सूत्रों ने बताया कि मेटा के अधिकारियों ने बच्चों के यौन शोषण वाले कंटेंट व डीपफेक से जुड़ी कमियों को स्वीकार किया और माना कि एक खास तरह के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए बहुत सारा पैसा दिया गया था।

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    पैसा दिए जाने का यह दावा बच्चों के यौन शोषण वाले कंटेंट से जुड़ा था। हालांकि न तो कपलान और न ही मेटा के किसी अन्य अधिकारी ने इन दावों को स्वीकार किया या कोई टिप्पणी की। मेटा को दोबारा बुलाया जा सकता है।

    सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने मेटा से कहा कि वह भारत के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत एक न्यूट्रल इंटरमीडियरी के दर्जा का दावा नहीं कर सकती, क्योंकि कंपनी के एल्गोरिदम सिर्फ थर्ड-पार्टी कंटेंट को होस्ट करने के बजाय सक्रिय रूप से यह तय करती है कि किस यूजर को कौन सा कंटेंट दिखेगा और उसे रिकमेंड भी करती है।

    सरकार ने तर्क दिया कि इसी आधार पर मेटा को इंटरमीडियरीज के लिए उपलब्ध 'सेफ हार्बर' सुरक्षा नहीं मिलेगी। यह सुरक्षा प्लेटफार्म को यूजर द्वारा बनाए गए कंटेंट के लिए जिम्मेदारी से बचाती है, बशर्ते वे कानून का पालन करें। मेटा को यह भी साफ कर दिया गया है कि भारत में अगर वह अपना इंटरनेट मीडिया प्लेटाफॉर्म संचालित करना चाहते हैं तो भारतीय कानून का पालन करना ही होगा।

     

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