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NCERT की पुस्तकों में संशोधन: हिटलर के संदर्भ हटाए गए, विभाजन पर कांग्रेस के रुख में बदलाव किया गया

Published: Wed, 08 Jul 2026 04:43 PM (GMT+05:30)

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद NCERT ने कक्षा 8 की सोशल साइंस किताब में कई बदलाव किए हैं, जिसमें ...और पढ़ें

NCERT ई नई किताब में हुए अहम बदलाव

NCERT ई नई किताब में हुए अहम बदलाव

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद NCERT ने कक्षा 8 के सोशल साइंस की किताब में कई अहम बदलाव किए हैं। सबसे जरूरी बदलाव न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े चैप्टर में किया गया। इसके अलावा इस किताब से 1947 के बंटवारे पर कांग्रेस के रुख और एडॉल्फ हिटलर की नाजी विचारधारा के जिक्र को हटाना गया।

नए वर्जन 'एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड', जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका से जुड़े पुराने कंटेंट को आपत्तिजनक बताया था और उसकी सभी फिजिकल और डिजिटल कॉपी वापस लेने का निर्देश दिया था। नई किताब में भारत की आजादी और बंटवारे से जुड़े इतिहास के चैप्टर में भी बदलाव किए गए हैं।

कक्षा 8 की NCERT किताब से क्या-क्या हटा?

अहम बदलावों में से एक बंटवारे पर कांग्रेस के रुख से जुड़ा है। पुरानी किताब में कहा गया था कि हालांकि महात्मा गांधी और कांग्रेस के ज्यादातर नेताओं ने बंटवारे का विरोध किया था, लेकिन आखिरकार उन्होंने इसे ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता मानकर स्वीकार कर लिया।

नए वर्जन में कहा गया है कि बंटवारे का कांग्रेस ने भी जोरदार विरोध किया था और यह भी कहा गया है कि क्या इसे स्वीकार करना आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता था, यह बहस का विषय है। नए वर्जन में पुरानी किताब का एक वाक्य भी हटा दिया गया है, जिसमें कहा गया था कि 'बंटवारे के दौरान जब पूरे उपमहाद्वीप में सांप्रदायिक नरसंहार हो रहा था, तब कांग्रेस नेता बेबस थे।'

हिटलर और नाजी विचारधारा में भी बदलाव 

एक और अहम बदलाव स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की दूसरे विश्व युद्ध के दौरान की कोशिशों के बारे में है। पहले वाले एडिशन में कहा गया था कि बोस ने एडॉल्फ हिटलर का समर्थन मांगा था और जर्मन नेता को एक 'तानाशाह' बताया था, जिसकी 'नस्लवादी नाजी विचारधारा और विस्तारवादी लक्ष्यों' ने युद्ध शुरू किया था।

इसके बजाय, बदली हुई किताब में कहा गया है कि बोस ने 'ब्रिटिश-विरोधी ताकतों से समर्थन मांगा था', इसमें हिटलर या नाजी विचारधारा का कोई जिक्र नहीं है। इतिहास वाले चैप्टर को भी बढ़ाया गया है और इसमें विनायक दामोदर सावरकर का जिक्र शामिल किया गया है।

वीडी सावरकर के बारे में क्या बदला?

इसमें बताया गया है कि पूर्ण स्वतंत्रता की मांग पर चर्चा के दौरान 1925 में वीडी सावरकर ने भी स्वराज की ऐसी ही मांग की थी। बदली हुई किताब में सुप्रीम कोर्ट के दखल के कुछ महीनों बाद आई है, जिसमें न्यायपालिका पर एक चैप्टर में भ्रष्टाचार, अदालतों में लंबित मामलों और जजों के खिलाफ शिकायतों पर चर्चा की गई थी।

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