Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    नीट पेपर लीक रोकने के लिए केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया प्लान, अब 19 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 09:21 PM (IST)

    केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को नीट पेपर लीक रोकने के लिए उठाए गए कड़े सुरक्षा उपायों की जानकारी दी है। इसमें प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा क ...और पढ़ें

    सुप्रीम कोर्ट।

    सुप्रीम कोर्ट।

    HighLights

    1. प्रश्नपत्र तैयार करने से वितरण तक, केंद्र ने बताई कड़ी सुरक्षा।

    2. नीट यूजी को कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने पर विचार।

    3. सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि नीट पेपर लीक रोकने के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर अनुवाद, प्रिंटिंग और सेंटरों पर पहुंचाने तक की चाक चौबंद व्यवस्था की गई है। प्रश्नपत्र तैयार करने या अनुवाद के वक्त न तो इंटरनेट की सुविधा दी जाती है और न ही फोन या किसी और तरह का गैजट रखने की इजाजत होती है।

    जरूरत से पांच गुना ज्यादा प्रश्न तैयार किये जाते हैं और किसी को भी पूरा प्रश्नपत्र मालूम नहीं होता। ये सारी बातें केंद्र सरकार ने नीट पेपर लीक रोकने के लिए किये गए उपायों का ब्योरा देने वाले अपने ताजा हलफनामे में कही हैं। यह भी कहा है कि नीट यूजी परीक्षा को पेन एंड पेपर मोड से हटा कर जईई मेन्स और एडवांस की परीक्षा की तरह कंप्यूटर आधारित मोड में बदलने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

    अब अलगी सुनवाई 19 अगस्त को

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को याचिकाकर्ताओं को केंद्र के इस हलफनामे का जवाब दाखिल करने के लिए समय देते हुए सुनवाई 19 अगस्त तक टाल दी। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ को सुनवाई के दौरान बताया गया कि केंद्र सरकार ने कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए हलफनामा दाखिल कर दिया है।

    याचिकाकर्ता फेडरेशन आफ आल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन की वकील तन्वी दुबे ने कहा कि अगर परीक्षा को कंप्यूटर बेस्ड माडल में बदलने की कोई योजना है तो इसे जल्द किया जाना चाहिए क्योंकि छात्र अभी पेन एंड पेपर मोड के हिसाब से तैयारी कर रहे हैं।

    खबरें और भी

    राजद सांसद सुधाकर सिंह के वकील पीयूष कांति राय और सत्यम सिंह राजपूत ने भी अपना पक्ष रखना चाहा लेकिन पीठ ने कहा कि वे केंद्र के हलफनामे का जवाब दाखिल करें इसके बाद 19 अगस्त को सुनवाई की जाएगी। सुधाकर सिंह ने याचिका में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) में सुधार की मांग की है।

    केंद्र ने हलफनामे में क्या कहा?

    केंद्र ने हलफनामे में कहा है कि पिछले अनुभवों और 21 जून 2026 को हुई नीट की दोबारा परीक्षा के अनुभवों के आधार पर एनटीए ने नीट यूजी की इन्ड टु इन्ड समग्र सिक्योरिटी डिजाइन की है। जो कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा हाल में छात्रों के हाथ में पेपर पहुंचने तक और फिर रिजल्ट घोषित होने तक पूरी प्रक्रिया चाक चौबंद है।

    प्रश्नपत्र तैयार करने की शुरुआत प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के विषय-विशेषज्ञों के एक समूह की पहचान करने से होती है। इन विशेषज्ञों को अलग एक सुरक्षित स्थान पर एकत्र किया जाता है। उस परिसर के अंदर मोबाइल फोन या किसी अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण की अनुमति नहीं होती है। परिसर में प्रवेश या बाहर जाने वाले हर व्यक्ति की तलाशी ली जाती है।

    परिसर सीसीटवी निगरानी में रहता है और केंद्रीय सशस्त्र बलों द्वारा वहां चौबीसो घंटे सुरक्षा की जाती है। विशेषज्ञ एक व्यापक प्रश्न बैंक तैयार करते हैं, जिसमें वास्तविक जरूरत से कम से कम पांच गुना अधिक प्रश्न शामिल होते हैं। इन प्रश्नों को एक सुरक्षित प्रश्न बैंक में रखा जाता है। परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न इस प्रकार चुने जाते हैं कि कोई भी एक व्यक्ति किसी भी समय पूरे प्रश्नपत्र को देखने या जानने की पूरी जानकारी नहीं रखता हो।

    प्रश्नपत्रों के कई सेट तैयार किये जाते हैं, जो अलग अलग होते हैं। प्रश्नों का कोई न ओवरलैप होता है और न ही उन पर काम करने वाले विशेषज्ञों का। इन सेटों को आगे समानांतर रूप से अनुवाद, मुद्रण, पैकेजिंग, परिवहन, और कस्टोडियन बैंक में सुरक्षित भंडारण की पूरी प्रक्रिया से गुजारा जाता है।

    यदि परीक्षा से पहले किसी भी चरण में किसी एक सेट से संभावित लीक या सुरक्षा भंग की कोई सूचना मिलती है तो कम से कम समय में किसी अन्य सेट को उसकी जगह प्रतिस्थापित किया जा सकता है। परीक्षा के दिन सुबह यह अंतिम निर्णय लिया जाता है कि उपरोक्त सेटों में से वास्तव में कौन सा सेट उपयोग में लाया जाएगा।

    केवल एक ही सेट का उपयोग किया जाता है। अन्य को सील बंद सुरक्षित रखा जाता है। नीट यूजी 13 भाषाओं में होती है। अनुवाद चरण में लीक जोखिम कम करने के लिए एक एयर गैप्ड यानी इंटरनेट से पूरी तरह अलग एआइ असिस्टेड अनुवाद वातारण बनाया जाता है।

    एआई असिस्टेड प्रणाली प्रारंभिक अनुवाद तैयार करती है जिसे बाद में मानव अनुवादक सत्यापित करते हैं। अनुवादकों को बहुत बड़ी संख्या में प्रश्नपत्र दिए जाते हैं जिनमें से बहुत कम वास्तविक परीक्षा में शामिल होते हैं। ताकि किसी अनुवादक को पता न चल सके कि अंतत: कौन से प्रश्न शामिल होंगे। न ही व्यक्तिगत उपकरणों का उपयोग होता है, न ही कोई बाहरी स्टोरेज माध्यम या क्लाउड कनेक्टिविटी होती है।