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    'त्रिभाषा फॉर्मूले का उद्देश्य बहुभाषावाद को बढ़ाना देना', शिक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 11:43 PM (IST)

    शिक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि नई शिक्षा नीति का त्रिभाषा फॉर्मूला बहुभाषावाद को बढ़ावा देने और भारतीय भाषाओं के संरक्षण के लि ...और पढ़ें

    त्रिभाषा फॉर्मूले का उद्देश्य बहुभाषावाद को बढ़ाना देना।

    त्रिभाषा फॉर्मूले का उद्देश्य बहुभाषावाद को बढ़ाना देना।

    HighLights

    1. त्रिभाषा फॉर्मूला बहुभाषावाद और भारतीय भाषाओं के संरक्षण हेतु।

    2. कक्षा 6 से 10 तक लागू, दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य।

    3. छात्रों को कक्षा के अनुसार बोर्ड परीक्षा में राहत।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। स्कूलों में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत लागू किए गए त्रिभाषा फॉर्मूले पर खड़े किए जा रहे सवालों पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने फिर साफ किया है कि स्कूलों में त्रिभाषा फार्मूले को लागू करने का मकसद किसी पर कोई भाषा थोपना नहीं है बल्कि बहुभाषावाद को बढ़ावा देना और भारतीय भाषाओं को संरक्षण करना है।

    त्रिभाषा फार्मूले पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच शिक्षा मंत्रालय ने सोमवार को कोर्ट में इसे लेकर एक हलफनामा पेश कर यह स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय ने कहा है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूलों में तीन भाषा पढ़ाने की सिफारिश की गई थी। इसमें दो भारतीय भाषाओं का होना अनिवार्य है। इसे अब अमल में लाया जा रहा है।

    सीबीएसई ने इसे लेकर स्कूलों को निर्देश भी जारी किए हैं। यह व्यवस्था कक्षा छठी से 10वीं तक लागू होगी। हालांकि छात्रों को इसमें राहत दी गई है और कहा कि जो छात्र इस साल दसवीं कक्षा में है, उन्हें न तो तीसरी भाषा पढ़नी होगी और न ही उसकी बोर्ड परीक्षा देनी होगी। वहीं सातवीं, आठवीं व नौवीं कक्षा के छात्रों को तीसरी भाषा पढ़नी तो होगी, लेकिन दसवीं कक्षा में पहुंचने पर उसकी बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।

    इसका आकलन स्कूलों के स्तर पर आंतरिक रूप से कर लिया जाएगा। वहीं जो छात्र अभी छठवीं कक्षा में है, उन्हें तीसरी भाषा पढ़नी भी होगी और दसवीं में पहुंचने पर बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी।

    सुप्रीम कोर्ट को दिए हलफनामे में मंत्रालय ने कहा है कि एनईपी को तैयार करने के दौरान बड़े स्तर पर लोगों के सुझाव लिए गए थे।

     

     

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